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यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
किसी ने कहा है कि बाइबल के अध्ययन में चार बातें आवश्यक हैं: स्वीकार करना, अधीन होना, सौंपना (कंठस्थ करना) और आगे पहुँचाना (अंग्रेज़ी में: Admit, submit, commit और transmit)। पहली, इसकी सच्चाई को स्वीकार कीजिए; दूसरी, इसकी शिक्षाओं के अधीन हो जाइए; तीसरी, इसे स्मरण-शक्ति को सौंप दीजिए, अर्थात् कंठस्थ कीजिए; और चौथी, इसे दूसरों तक पहुँचाइए। यदि मसीही जीवन आपके लिए अच्छी वस्तु है, तो इसे किसी दूसरे तक पहुँचाइए।
अब मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं बाइबल का अध्ययन कैसे करता हूँ। हर कोई शाऊल का झिलम पहनकर नहीं लड़ सकता; और शायद आप मेरी विधियों का अनुसरण न कर सकें। फिर भी मैं कुछ ऐसे सुझाव दे सकता हूँ जो आपकी सहायता करेंगे। स्पर्जन रविवार की सुबह का अपना उपदेश शनिवार की रात को तैयार किया करते थे। यदि मैं ऐसा करने का प्रयत्न करता, तो मैं असफल हो जाता।
स्वयं भोजन करना सीखिए
जितनी जल्दी आप स्वयं अपना भोजन करना सीख लें, उतना ही अच्छा है। मुझे अपने हृदय की गहराई से उन पुरुषों और स्त्रियों पर तरस आता है जो किसी कलीसिया या चैपल में, मान लीजिए, पाँच, दस या बीस वर्षों से जा रहे हैं, और फिर भी स्वयं अपना भोजन करना नहीं सीखे।
आप जानते हैं कि परिवार में यह सदा एक बड़ी घटना मानी जाती है जब कोई बच्चा स्वयं खाने लगता है। उसे सहारा देकर मेज़ पर बिठाया जाता है, और आरम्भ में शायद वह चम्मच को उलटा पकड़ता है, परन्तु धीरे-धीरे वह उसे ठीक से पकड़ने लगता है, और माँ, या शायद बहन, ताली बजाकर कहती है, “देखो तो, मुन्ना अपने आप खा रहा है!” बस, मसीही होने के नाते हमें इसी की आवश्यकता है कि हम स्वयं अपना भोजन कर सकें। कितने ही ऐसे हैं जो असहाय और उदासीन होकर, मुँह खोले, आत्मिक वस्तुओं के भूखे बैठे रहते हैं, और पादरी को उन्हें खिलाने का प्रयत्न करना पड़ता है, जबकि बाइबल एक तैयार भोज है, जिसमें वे कभी प्रवेश करने का साहस नहीं करते।
बहुत से लोग ऐसे हैं जो बीस वर्षों से मसीही हैं, पर जिन्हें अब भी कलीसियाई चम्मच से खिलाना पड़ता है। यदि संयोग से उन्हें ऐसा पादरी मिल जाए जो उन्हें खिलाता है, तो वे ठीक-ठाक चलते रहते हैं; परन्तु यदि न मिले, तो उन्हें भोजन मिलता ही नहीं। आप परमेश्वर की सच्ची सन्तान हैं या नहीं, इसकी परख यही है—कि आप परमेश्वर के वचन से प्रेम करते हैं और उसे अपना भोजन बनाते हैं या नहीं। यदि आप अपनी बगिया में जाकर कुछ बुरादा फेंक दें, तो पक्षी उस पर कोई ध्यान नहीं देंगे; परन्तु यदि आप रोटी के कुछ टुकड़े फेंकें, तो आप देखेंगे कि वे शीघ्र ही झपटकर नीचे आएँगे और उन्हें चुग लेंगे। इसी प्रकार परमेश्वर की सच्ची सन्तान, यों कहें तो, बुरादे और रोटी के बीच का अन्तर पहचान सकती है। बहुत से तथाकथित मसीही उस रोटी से पोषण पाने के बजाय जो स्वर्ग से उतरती है, संसार के बुरादे पर जी रहे हैं। जीवित परमेश्वर के वचन के सिवा कोई भी वस्तु प्राण की लालसाओं को तृप्त नहीं कर सकती।
लगे रहने का नियम
बाइबल अध्ययन का सबसे अच्छा नियम लगे रहने का नियम है। भजनकार कहता है, “मैं तेरी चितौनियों में लवलीन हूँ।” वचन में मन लगाने से वह भीतर बढ़ता और बाहर फैलता जाता है। कुछ लोग एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के समान होते हैं, वे इतनी तेज़ी से सरपट निकल जाते हैं कि कुछ भी नहीं देख पाते।
शिकागो में मेरी भेंट एक वकील से हुई जिसने मुझे बताया कि उसने एक ही विषय के गहन अध्ययन में दो वर्ष लगाए थे; वह एक वसीयत को रद्द करवाने का प्रयत्न कर रहा था। उसने वसीयतों के विषय में जो कुछ भी उसे मिल सका, वह सब पढ़ डालना अपना काम बना लिया। फिर वह अदालत में गया और उस वसीयत के विषय में दो दिन तक बोलता रहा; वह उससे भरा हुआ था; वह वसीयतों के सिवा किसी और विषय पर बात ही नहीं कर सकता था। बाइबल के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए—उसका अध्ययन कीजिए और अध्ययन करते रहिए, एक समय में एक विषय, जब तक आप उससे भर न जाएँ।
स्वयं बाइबल को पढ़िए—अपना सारा समय टीकाओं और सहायक पुस्तकों पर मत लगाइए। यदि कोई व्यक्ति अपना सारा समय रोटी और दूध के रासायनिक तत्वों के विषय में पढ़ने में ही लगा दे, तो वह शीघ्र ही भूखों मर जाएगा।
तीन आवश्यक पुस्तकें
तीन पुस्तकें ऐसी हैं जो मेरे विचार में हर मसीही के पास होनी चाहिए।
पहली, निस्सन्देह, बाइबल है। मैं इस बात का समर्थक हूँ कि एक अच्छी बाइबल ली जाए, जिसकी छपाई अच्छी और साफ़ हो। मुझे उन छोटी-छोटी बाइबलों से अधिक प्रेम नहीं है जिनकी छपाई पढ़ने के लिए उन्हें ठीक नाक के नीचे पकड़ना पड़ता है; और यदि गिरजाघर में थोड़ा अँधेरा हो, तो छपाई दिखाई ही नहीं देती, बल्कि वह शब्दों का केवल एक गड्डमड्ड ढेर बन जाती है। हाँ, पर कोई कहेगा कि बड़ी बाइबल जेब में नहीं रखी जा सकती। बहुत अच्छा, तो उसे बगल में दबाकर ले चलिए; और यदि आपको पाँच मील पैदल चलना पड़े, तो आप पाँच मील लम्बा एक उपदेश दे रहे होंगे। मैं एक ऐसे व्यक्ति को जानता हूँ जिसे किसी दूसरे को अपनी बाइबल बगल में दबाए ले जाते देखकर पाप का बोध हुआ। आप भजन-पुस्तकें और प्रार्थना-पुस्तकें ले जाने में लज्जित नहीं होते, और बाइबल संसार की सब भजन-पुस्तकों और प्रार्थना-पुस्तकों को मिलाकर भी उन सबसे अधिक मूल्यवान है। यदि आप अच्छी बाइबल लें, तो सम्भव है कि आप उसकी अधिक अच्छी देखभाल करें। मान लीजिए कि आप एक अच्छी बाइबल के लिए दस डॉलर देते हैं, तो जितने आप बड़े होते जाएँगे उतनी ही वह आपके लिए अधिक बहुमूल्य होती जाएगी। परन्तु ध्यान रखिए कि आप कहीं इतनी बढ़िया बाइबल न ले लें कि उस पर चिह्न लगाने से डरें। मुझे सुनहरे किनारोंवाली वे बाइबलें पसन्द नहीं जो ऐसी दिखती हैं मानो उनका कभी उपयोग ही न हुआ हो।
इसके बाद मैं आपको सलाह दूँगा कि क्रूडेन की कॉनकॉर्डेंस (शब्दानुक्रमणिका) ले लीजिए। मसीही बने मुझे लगभग पाँच वर्ष हो चुके थे, तब कहीं जाकर मैंने इसके विषय में सुना। बोस्टन में एक संशयवादी ने मुझे पकड़ लिया। मैं बाइबल के विषय में कुछ भी नहीं जानता था और फिर भी मैंने बाइबल और मसीही धर्म का बचाव करने का प्रयत्न किया। उसने एक गलत उद्धरण दिया और मैंने कहा कि यह बाइबल में नहीं है: मैं दिनों-दिन ढूँढ़ता रहा। यदि मेरे पास कॉनकॉर्डेंस होती, तो मैं उसे तुरन्त ढूँढ़ लेता। पादरियों के लिए यह अच्छी बात है कि वे कभी-कभी लोगों को किसी अच्छी पुस्तक के विषय में बताएँ। इस कॉनकॉर्डेंस को खोलकर ही आप बाइबल का कोई भी भाग या कोई भी पद ढूँढ़ सकते हैं।
तीसरी, एक विषयानुसार पद-संग्रह (टॉपिकल टेक्स्ट बुक)। ये पुस्तकें परमेश्वर के वचन का लाभदायक रीति से अध्ययन करने में आपकी सहायता करेंगी। यदि ये आपके पास नहीं हैं, तो इन्हें तुरन्त ले लीजिए; हर मसीही के पास ये होनी चाहिए।[1]
संडे-स्कूल की त्रैमासिक पुस्तिकाएँ और बाइबल
मैं समझता हूँ कि यदि संडे-स्कूल के शिक्षक पूरी बाइबल अपनी संडे-स्कूल कक्षाओं में नहीं ले जाते, तो वे एक दुःखद भूल कर रहे हैं। बच्चे चाहे कितने ही छोटे हों, उन्हें यह समझने दीजिए कि यह एक ही पुस्तक है, दो पुस्तकें नहीं—पुराना नियम और नया नियम दोनों मिलकर एक ही हैं। उन्हें यह न सोचने दीजिए कि पुराना नियम उसी अधिकार के साथ हमारे पास नहीं आता जिसके साथ नया नियम आता है। किसी लड़के या लड़की के लिए यह बड़ी बात है कि वह बाइबल को काम में लाना जाने। उस सेना का क्या लाभ जिसके सैनिक अपनी तलवारें चलाना न जानते हों? मैं इस विषय पर बहुत कड़ाई से बोलता हूँ, क्योंकि मैं कुछ ऐसे सब्त-स्कूलों को जानता हूँ जिनमें एक भी बाइबल नहीं है। उनके पास प्रश्न-पुस्तिकाएँ हैं। उनमें प्रश्न होते हैं और उनके ठीक नीचे उत्तर दिए होते हैं; ताकि आपको अपना पाठ पढ़ने की आवश्यकता ही न पड़े। आलसी शिक्षकों के लिए अपनी कक्षाओं में ले आने को ये बहुत बढ़िया चीज़ें हैं। मैंने उन्हें प्रश्न-पुस्तिका लेकर कक्षा में आते देखा है, और कभी-कभी कक्षा से बात करते हुए वे उसे उलटा पकड़े रहते हैं, जब तक कि उन्हें अपनी भूल का पता न चले, और फिर वे नए सिरे से आरम्भ करते हैं। मैंने कुछ इस प्रकार की परीक्षा होते देखी है:
“जॉन, पहला मनुष्य कौन था?”
“मतूशेलह।”
“नहीं; मेरे विचार में नहीं; ज़रा देखूँ। नहीं, मतूशेलह नहीं है। क्या तुम फिर से अनुमान नहीं लगा सकते?”
“एलिय्याह।”
“नहीं।”
“आदम।”
“ठीक है, मेरे बेटे; तुमने अवश्य अपना पाठ बड़े परिश्रम से पढ़ा होगा।”
अब, मैं जानना चाहूँगा कि ऐसे शिक्षक के साथ, या ऐसी शिक्षा के साथ, कोई लड़का क्या करेगा। यह ऐसी शिक्षा है जो निकम्मी है, और जिसका कोई फल नहीं निकलता। अब, यह न कहिए कि मैं सहायक पुस्तकों की निन्दा करता हूँ। मैं इस बात का समर्थक हूँ कि जितना प्रकाश आपको मिल सके उसका लाभ उठाइए। मैं आपसे जो चाहता हूँ वह यह है कि जब आप अपनी कक्षाओं में आएँ, तो कॉनकॉर्डेंस की सहायता के बिना पाठ समझाने के लिए तैयार होकर आएँ। परमेश्वर का वचन अपने साथ लाइए; वह पुरानी पुस्तक साथ लाइए।
आप प्रायः ऐसे परिवार पाएँगे जहाँ एक पारिवारिक बाइबल तो है, परन्तु माँ को इतना डर रहता है कि बच्चे उसे फाड़ देंगे कि वह उसे खाली कमरे में रख छोड़ती है, और बहुत दिनों में कभी एक बार बच्चों को उसे देखने दिया जाता है। उन्हें उसमें सबसे अधिक रुचि पारिवारिक लेखे में होती है—कि जॉन कब पैदा हुआ, पिता और माता का विवाह कब हुआ।
मैं देहात से बोस्टन आया और एक बाइबल-कक्षा में गया जिसमें हार्वर्ड के कुछ विद्यार्थी थे। उन्होंने मुझे एक बाइबल थमा दी और बताया कि पाठ यूहन्ना में है। मैं सारे पुराने नियम में यूहन्ना को ढूँढ़ता रहा, पर वह न मिला। मैंने देखा कि वे लड़के एक-दूसरे को कोहनी मार रहे थे, “अहा, देहात से आया अनाड़ी।” अब, आप जानते हैं कि यही वह समय होता है जब आप नहीं चाहते कि कोई आपको अनाड़ी समझे। शिक्षक ने मेरी घबराहट देखी और मुझे अपनी बाइबल दे दी, और मैंने उस स्थान पर अपना अँगूठा रख दिया और उसे थामे रहा। मैंने अपना स्थान नहीं खोया। मैंने तभी कहा कि यदि मैं कभी इस उलझन से निकल गया, तो फिर कभी इस स्थिति में नहीं पकड़ा जाऊँगा। ऐसा क्यों है कि अठारह से बीस वर्ष के इतने सारे जवानों को बाइबल-कक्षा में नहीं लाया जा सकता? क्योंकि वे अपना अज्ञान प्रकट नहीं करना चाहते। संसार में ऐसा कोई स्थान नहीं जो एक जीवन्त बाइबल-कक्षा जितना आकर्षक हो। मेरा विश्वास है कि इसके लिए हम दोषी हैं कि वे संडे-स्कूल में बिना बाइबल के, त्रैमासिक पुस्तिकाओं के सहारे पाले-पोसे गए हैं। परिणाम यह है कि लड़के बाइबल को काम में लाना जाने बिना बड़े हो रहे हैं। वे नहीं जानते कि मत्ती कहाँ है, वे नहीं जानते कि इफिसियों की पत्री कहाँ है, वे नहीं जानते कि इब्रानियों को या बाइबल की अन्य पुस्तकों में से किसी को कहाँ ढूँढ़ें। उन्हें पूरी बाइबल को काम में लाना सिखाया जाना चाहिए, और यह संडे-स्कूल के शिक्षकों द्वारा बाइबल को कक्षा में ले जाकर और तुरन्त इस काम में जुट जाने से किया जा सकता है। इस देश में आजकल बाइबल लगभग कौड़ियों के मोल मिल जाती है। संडे-स्कूल इतने गरीब नहीं हैं कि बाइबलें न ले सकें। कुछ समय पहले एक बड़ी बाइबल-कक्षा में एक प्रश्न उठा, और उन्होंने सोचा कि बाइबल देख लें, परन्तु उन्होंने पाया कि कक्षा में एक भी बाइबल नहीं है। बिना बाइबल की बाइबल-कक्षा! यह वैसा ही है जैसे बिना औषधि का वैद्य; या बिना हथियारों की सेना। तब वे बेंचों की ओर गए, पर वहाँ भी एक न मिली। अन्त में वे प्रचार-मंच पर गए और मंच की बाइबल लेकर प्रश्न का निपटारा किया। हम अद्भुत प्रगति कर रहे हैं, है न? त्रैमासिक पुस्तिकाएँ अपने स्थान पर ठीक हैं, पाठ के अध्ययन में सहायक के रूप में, परन्तु यदि वे हमारे संडे-स्कूलों से बाइबलों को ही बुहारकर बाहर निकालने जा रही हैं, तो मेरे विचार में अच्छा होगा कि हम उन्हीं को बुहारकर बाहर निकाल दें।
