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यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
यहाँ उन जवानों के लिए परामर्श का एक वचन है जिनकी दृष्टि सेवकाई पर लगी है। यदि आप मेरी सलाह मानें, तो आप केवल एक पद लेकर प्रचार करनेवाले (पाठ-प्रचारक) बनने का नहीं, बल्कि पवित्रशास्त्र की व्याख्या करनेवाले प्रचारक बनने का प्रयत्न करेंगे। मेरा विश्वास है कि इस देश को जिस वस्तु की आवश्यकता है वह परमेश्वर का वचन है। ऐसी कोई पुस्तक नहीं जो लोगों को बाइबल के समान खींच सके। शिकागो विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर ने अय्यूब की पुस्तक पर कुछ व्याख्यान दिए, और कोई भी भवन इतना बड़ा न था कि उसमें सब लोग समा सकें। यदि बाइबल को केवल स्वयं अपनी बात कहने का अवसर मिल जाए, तो वह लोगों की रुचि जगा देगी। मैं नैतिक निबन्धों से ऊब चुका हूँ और उकता गया हूँ। पाँच वर्ष के एक बच्चे का मन फिराने के लिए उनका लगभग एक टन चाहिए होगा। एक बार एक व्यक्ति किसी कलीसिया के विषय में बात कर रहा था, और उसने कहा कि वह उसे इसलिए पसन्द करता है कि वहाँ का प्रचारक कभी राजनीति और धर्म को छूता ही नहीं—बस छोटे-छोटे सुन्दर निबन्ध पढ़ देता है। लोगों को परमेश्वर का वचन दीजिए। कुछ लोग बाइबल का उपयोग केवल एक पाठ-पुस्तक के रूप में करते हैं। वे एक पद ले लेते हैं और फिर उड़ चलते हैं। वे एक गुब्बारे में ऊपर जाते हैं और खगोल-विद्या की बातें करते हैं, और फिर नीचे आकर आपको थोड़ा भूगर्भ-विज्ञान सुना देते हैं, और अगले रविवार भी वे इसी प्रकार चलते रहते हैं, और फिर आश्चर्य करते हैं कि लोग अपनी बाइबल क्यों नहीं पढ़ते। मैं सोचा करता था कि चार्ल्स स्पर्जन उतने ही अच्छे प्रचारक थे जितना अच्छा प्रचारक मैंने कभी जाना, परन्तु उनके सब उपदेश सुनने की अपेक्षा मैं उन्हें पवित्रशास्त्र की व्याख्या करते सुनना अधिक पसन्द करता था। ऐसा क्यों है कि डॉ. जॉन हॉल ने इतने लम्बे समय तक अपने श्रोताओं को थामे रखा है? वे अपनी बाइबल खोलते हैं और उसकी व्याख्या करते हैं। ऐसा कैसे हुआ कि एंड्रू बोनार ने ग्लासगो में अपने श्रोताओं को थामे रखा? उनकी आवाज़ कमज़ोर थी, लोग उन्हें कठिनाई से सुन पाते थे, फिर भी हर सब्त को दो बार तेरह सौ लोग पंक्तिबद्ध होकर उनके गिरजाघर में आते थे, और उनमें से बहुत से लोग नोट्स लिखते थे, और घर जाकर उनके उपदेशों को सारे संसार में भेज देते थे। डॉ. बोनार की यह रीति थी कि वे अपनी मण्डली को एक-एक पुस्तक करके बाइबल के अध्ययन में से ले चलते थे। बाइबल का ऐसा कोई भाग न था जिसमें वे मसीह को न पा सकें। मैंने ग्लासगो में पाँच महीने प्रचार किया, और उस नगर का ऐसा कोई वार्ड या क्षेत्र न था जिसमें मैंने उस व्यक्ति का प्रभाव न पाया हो।
डॉ. एंड्रू बोनार का एक संस्मरण
सन् ’84 में मैं लंदन में था और एक बैरिस्टर एडिनबरा से आया था। उसने बताया कि कुछ सप्ताह पहले वह रविवार बिताने के लिए ग्लासगो गया था, और उसका यह सौभाग्य रहा कि उसने एंड्रू बोनार को सुना। उसने बताया कि संयोग से वह उस रविवार को वहाँ था जिस दिन डॉ. बोनार गलातियों की पत्री के उस भाग पर पहुँचे जहाँ लिखा है कि पौलुस पतरस से भेंट करने यरूशलेम गया। “फिर तीन वर्षों के बाद मैं पतरस से भेंट करने के लिये यरूशलेम को गया, और उसके पास पन्द्रह दिन तक रहा।” उन्होंने अपनी कल्पना को खुला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वे कल्पना कर सकते हैं कि एक दिन वे दोनों बहुत व्यस्त रहे थे और थक गए थे, और अचानक पतरस ने पौलुस की ओर मुड़कर कहा, “पौलुस, क्या तुम थोड़ा टहलने चलना चाहोगे?” और पौलुस ने कहा कि हाँ, वह चलेगा। सो वे हाथ में हाथ डाले यरूशलेम की गलियों में से होते हुए किद्रोन नाले के पार गए, और अचानक पतरस रुककर बोला, “देखो पौलुस, यही वह स्थान है जहाँ उसने संघर्ष किया, और जहाँ उसने दुःख उठाया और उसका पसीना लहू की बड़ी-बड़ी बूँदों के समान गिरा। वह रहा वह स्थान जहाँ यूहन्ना और याकूब सो गए थे, ठीक वहाँ। और ठीक यहाँ वह स्थान है जहाँ मैं सो गया था। मैं नहीं समझता कि यदि मैं सो न गया होता तो मैं उसका इनकार करता, परन्तु मैं हार गया। मुझे याद है कि सो जाने से पहले मैंने उसे अन्तिम बात यही कहते सुना था, ‘हे पिता, यदि तेरी इच्छा हो तो यह कटोरा मेरे पास से टल जाए।’ और जब मैं जागा तो एक स्वर्गदूत ठीक वहाँ खड़ा था जहाँ तुम खड़े हो, और उससे बातें कर रहा था, और मैंने देखा कि उसके रोमछिद्रों से लहू की बड़ी-बड़ी बूँदें निकलकर उसके गालों पर से टपक रही थीं। थोड़ी ही देर में यहूदा उसे पकड़वाने आ पहुँचा। और मैंने उसे यहूदा से इतनी कोमलता से यह कहते सुना, ‘क्या तू चूमा लेकर स्वामी को पकड़वाता है?’ और फिर उन्होंने उसे बाँध लिया और ले गए। उसी रात जब उसका मुकद्दमा चल रहा था, मैंने उसका इनकार किया।” उन्होंने पूरे दृश्य का चित्र खींच दिया। और अगले दिन पतरस ने फिर पौलुस की ओर मुड़कर कहा, “क्या तुम आज फिर टहलने चलना चाहोगे?” और पौलुस ने कहा कि हाँ, वह चलेगा। उस दिन वे कलवरी गए, और जब वे पहाड़ी पर पहुँचे, तो पतरस ने कहा, “पौलुस, यही वह स्थान है जहाँ वह तुम्हारे और मेरे लिए मरा। वह गड्ढा देखते हो, ठीक वहाँ? वहीं उसका क्रूस गड़ा था। विश्वास करनेवाला डाकू वहाँ लटका था और अविश्वासी डाकू उधर दूसरी ओर। मरियम मगदलीनी और उसकी माता मरियम वहाँ खड़ी थीं, और मैं दूर भीड़ के किनारे पर खड़ा था। उससे पहली रात जब मैंने उसका इनकार किया, तो उसने मेरी ओर इतने प्रेम से देखा कि मेरा हृदय टूट गया, और मुझसे यह सहा न गया कि मैं इतना निकट जाऊँ कि उसे देख सकूँ। वह मेरे जीवन की सबसे अन्धकारमय घड़ी थी। मैं आशा लगाए हुए था कि परमेश्वर बीच में पड़कर उसे क्रूस पर से उतार लेगा। मैं कान लगाए सुनता रहा और सोचता रहा कि मैं उसकी आवाज़ सुनूँगा।” और उन्होंने पूरे दृश्य का चित्र खींच दिया, कि कैसे उन्होंने उसकी पसली में भाला भोंका और उसके माथे पर काँटों का मुकुट रखा, और वह सब कुछ जो वहाँ हुआ।
और अगले दिन पतरस ने फिर पौलुस की ओर मुड़कर उससे पूछा कि क्या वह फिर टहलने चलना चाहेगा। और पौलुस ने कहा कि हाँ, वह चलेगा। फिर वे यरूशलेम की गलियों में से होते हुए, किद्रोन नाले के पार, जैतून पहाड़ पर से होकर, बैतफगे तक, और आगे बैतनिय्याह के निकट की ढलान पर पहुँचे। अचानक पतरस रुककर बोला, “पौलुस, यही वह अन्तिम स्थान है जहाँ मैंने उसे देखा था। मैंने उसे कभी इतनी मधुरता से बोलते नहीं सुना था जितना उस दिन। ठीक यहीं उसने हमें अपना अन्तिम सन्देश दिया था, और अचानक मैंने देखा कि उसके पाँव भूमि को नहीं छू रहे थे। वह उठा और ऊपर चला गया। अचानक एक बादल आया और उसे हमारी आँखों से छिपा लिया। मैं ठीक यहीं खड़ा होकर आकाश की ओर ताकता रहा, इस आशा में कि शायद मैं उसे फिर देख सकूँ और उसे बोलते सुन सकूँ। और श्वेत वस्त्र पहने दो पुरुष हमारे पास उतर आए और वहाँ खड़े होकर कहने लगे, ‘हे गलीली पुरुषो, तुम क्यों खड़े स्वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुमने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा।’”
मेरे मित्रो, मैं आपसे यह प्रश्न पूछना चाहता हूँ: क्या आप समझते हैं कि यह चित्र बढ़ा-चढ़ाकर खींचा गया है? क्या आप समझते हैं कि पतरस के यहाँ पौलुस अतिथि होकर रहा और पतरस उसे गतसमनी नहीं ले गया, कलवरी और जैतून पहाड़ पर नहीं ले गया? मैंने स्वयं यरूशलेम में आठ दिन बिताए, और हर सुबह मेरा मन चाहता था कि चुपके से उस बारी में उतर जाऊँ जहाँ मेरे प्रभु का पसीना लहू की बड़ी-बड़ी बूँदों के समान गिरा था। हर दिन मैं जैतून पहाड़ पर चढ़ता और उस नीले आकाश की ओर देखता जहाँ से वह अपने पिता के पास गया। मुझे कोई सन्देह नहीं कि पतरस पौलुस को उन तीनों सैरों पर ले गया होगा। यदि कोई ऐसा मनुष्य होता जो मुझे ठीक उस स्थान पर ले जा सकता जहाँ मेरे स्वामी का पसीना लहू की उन बड़ी-बड़ी बूँदों के समान गिरा, तो क्या आप समझते हैं कि मैं उससे वहाँ ले चलने को न कहता? यदि वह मुझे बता सकता कि वह स्थान कहाँ मिलेगा जहाँ मेरे स्वामी के पाँवों ने अन्तिम बार पाप के कारण शापित इस पृथ्वी को छुआ और वह ऊपर उठा लिया गया, तो क्या आप समझते हैं कि मैं उससे वह स्थान न दिखवाता?
वाक्पटुता भरा प्रचार
मैं जानता हूँ कि लोगों का एक वर्ग ऐसा है जो कहता है कि इस देश में उस प्रकार का प्रचार नहीं चलेगा। “लोग कुछ वाक्पटुता भरा चाहते हैं।” हाँ, इसमें कोई सन्देह नहीं कि कुछ लोग ऐसे हैं जो वाक्पटुता भरे उपदेश सुनना चाहते हैं, परन्तु वे चौबीस घंटे के भीतर उन्हें भूल जाते हैं।
किसी पादरी के लिए यह अच्छी बात है कि उसकी ख्याति ऐसी हो कि वह अपने लोगों को आत्मिक भोजन खिलाता है। एक बार एक व्यक्ति ने एक नकली मधुमक्खी बनाई, जो असली मधुमक्खी से इतनी मिलती-जुलती थी कि उसने एक दूसरे व्यक्ति को चुनौती दी कि वह दोनों में अन्तर बताए। वह जीवित मधुमक्खी के समान ही भिनभिनाती थी, और देखने में भी वैसी ही थी। दूसरे ने कहा, “तुम एक नकली मधुमक्खी और एक असली मधुमक्खी वहाँ नीचे रख दो, और मैं तुम्हें बहुत जल्दी अन्तर बता दूँगा।” फिर उसने भूमि पर मधु की एक बूँद रख दी और जीवित मधुमक्खी मधु की ओर चल पड़ी। हमारे साथ भी ठीक ऐसा ही है। बहुत से लोग हैं जो मसीही होने का दावा करते हैं, परन्तु वे नकली हैं, और जब आप उन्हें मधु देते हैं तो वे पहचानते तक नहीं। असली मधुमक्खियाँ हर बार मधु की ओर जाती हैं। लोगों का काम आपके सिद्धान्तों और विचारों के बिना चल सकता है; “प्रभु यों कहता है”—यही वह है जो हमें चाहिए।
