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मैं यह दिखाना चाहता हूँ कि किसी का यह कहना कितना बेतुका है कि वह नये नियम पर तो विश्वास करता है पर पुराने पर नहीं। यह एक बहुत रोचक तथ्य है कि पुराने नियम की उनतालीस पुस्तकों में से, लिखा है कि हमारे प्रभु ने कम से कम बाईस पुस्तकों से उद्धरण दिए। बहुत सम्भव है कि उसने उन सब में से उद्धरण दिए हों; क्योंकि उसने जो कुछ कहा और किया, उसके केवल अंश ही हमें लिखित रूप में मिले हैं। आप जानते हैं कि प्रेरित यूहन्ना हमें बताता है कि यदि हमारे प्रभु के सारे वचन और काम लिखे जाते, तो जो पुस्तकें लिखी जातीं वे संसार में भी कठिनाई से समातीं। पुराने नियम के लगभग आठ सौ पचास खण्ड नये नियम में उद्धृत किए गए हैं या उनकी ओर संकेत किया गया है; इनमें से केवल कुछ ही एक से अधिक बार आते हैं।
मत्ती रचित सुसमाचार में पुराने नियम की बीस पुस्तकों से सौ से अधिक उद्धरण हैं। मरकुस रचित सुसमाचार में तेरह पुस्तकों से लिए गए पन्द्रह उद्धरण हैं। लूका रचित सुसमाचार में तेरह पुस्तकों से चौंतीस उद्धरण हैं। यूहन्ना रचित सुसमाचार में छह पुस्तकों से ग्यारह उद्धरण हैं। केवल चारों सुसमाचारों में ही पुराने नियम से एक सौ साठ से अधिक उद्धरण हैं। आप कभी-कभी लोगों को यह कहते सुनते हैं कि वे पूरी बाइबल पर विश्वास नहीं करते, परन्तु चारों सुसमाचारों में यीशु मसीह की शिक्षा पर विश्वास करते हैं। अच्छा, यदि मैं उस पर विश्वास करता हूँ, तो मुझे पुराने नियम से लिए गए इन एक सौ साठ उद्धरणों को भी स्वीकार करना होगा। कुरिन्थियों को लिखी पौलुस की पत्री में पुराने नियम से तिरपन उद्धरण हैं; कभी-कभी वह उसमें से पूरे-पूरे अनुच्छेद ले लेता है। इब्रानियों में, तेरह अध्यायों की उस एक ही पुस्तक में, पचासी उद्धरण हैं। गलातियों में सोलह उद्धरण हैं। अकेले प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में दो सौ पैंतालीस उद्धरण और संकेत हैं।
बहुत-से लोग पुराने नियम को बाहर फेंक देना चाहते हैं। वे कहते हैं कि वह ऐतिहासिक पठन के रूप में अच्छा है, परन्तु वे यह विश्वास नहीं करते कि वह परमेश्वर के वचन का भाग है, और उसे उद्धार की योजना में आवश्यक नहीं मानते। पौलुस ने जो अन्तिम पत्री लिखी, उसमें ये शब्द थे: “और बालकपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।” प्रेरितों के पास जितना भी पवित्रशास्त्र था, वह सब पुराना नियम ही था।
जब संशयवादी उसकी सच्चाइयों पर आक्रमण करते हैं, तो ये लोग यह कहना सुविधाजनक पाते हैं, “अच्छा, पुराने नियम में जो कुछ है, उस सब का हम समर्थन नहीं करते,” और इस प्रकार वे पवित्रशास्त्र के बचाव में तर्क करने से बच निकलते हैं। यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि हर मसीही न केवल यह जाने कि पुराना नियम क्या सिखाता है, बल्कि उसकी सच्चाइयों को स्वीकार भी करे, क्योंकि सत्य इसी पर आधारित है। पतरस ने कहा कि पवित्रशास्त्र किसी के अपने ही विचार के अनुसार अर्थ लगाने के लिए नहीं दिया गया, और पवित्रशास्त्र की बात करते हुए उसने पुराने नियम का उल्लेख किया था, नये का नहीं।
यदि पुराने नियम का पवित्रशास्त्र सच्चा नहीं है, तो क्या आप सोचते हैं कि मसीह इतनी बार उसका उल्लेख करता, और कहता कि पवित्रशास्त्र का पूरा होना अवश्य है? जब परीक्षा करनेवाले ने उससे कहा कि वह अपनी ओर से हस्तक्षेप करने के लिए स्वर्ग से स्वर्गदूतों को बुला सकता है, तो उसने कहा: “ऐसा ही लिखा है।” मसीह ने स्वयं को बलिदान के रूप में सौंप दिया ताकि पवित्रशास्त्र पूरा हो। क्या यह नहीं कहा गया था कि वह अपराधियों के संग गिना गया? और जब अपने पुनरुत्थान के बाद वह इम्माऊस को जाते हुए अपने दो चेलों से मार्ग में बातें कर रहा था, तो क्या उसने यह नहीं कहा: “क्या इन बातों का होना अवश्य न था? क्या मुझे दुख उठाना न था?” और उसने मूसा से आरम्भ करके सारे पवित्रशास्त्र में से अपने विषय की बातों का अर्थ उन्हें समझा दिया, क्योंकि पुराने नियम का एकमात्र विषय मसीहा है। भजन संहिता 40:7 में लिखा है: “पुस्तक में मेरे विषय ऐसा ही लिखा हुआ है।” लूथर पूछते हैं, “कौन-सी पुस्तक? और कौन-सा व्यक्ति? पुस्तक केवल एक ही है—बाइबल; और व्यक्ति केवल एक ही है—यीशु मसीह।” मसीह ने पवित्रशास्त्र का और अपने में उसके पूरे होने का उल्लेख केवल मरे हुओं में से जी उठने के बाद ही नहीं किया, वरन् प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में उसने स्वर्ग में भी उसका उपयोग किया। पतमुस द्वीप पर उसने यूहन्ना से उसके विषय में बातें कीं, और उसमें की ठीक उन्हीं बातों का उपयोग किया जिन्हें लोग बाहर फेंकने का प्रयत्न कर रहे हैं। उसने कभी उनमें दोष नहीं निकाला और न ही उन्हें अस्वीकार किया।
यदि यीशु मसीह पुराने नियम का उपयोग कर सकता था, तो आइए, हम भी उसका उपयोग करें। परमेश्वर हमें उस एकतरफ़ा मसीही से बचाए जो केवल नया नियम पढ़ता है और पुराने के विरुद्ध बोलता है!
