योना भविष्यद्वक्ता पर व्याख्यान
Lectures on Jonah
जॉन कैल्विन

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इस पुस्तक के बारे में
“योना भविष्यद्वक्ता पर व्याख्यान” — जॉन कैल्विन की रचना। योना भविष्यद्वक्ता की पुस्तक पर कैल्विन के व्याख्यान।
यह हिंदी अनुवाद UECF.NET के अंग्रेज़ी वेब संस्करण (मोनरजिज़्म बुक्स (2026)) से किया गया है। अंग्रेज़ी पाठ का अनुवाद/संपादन मोनरजिज़्म बुक्स को श्रेय दिया गया है; इस संस्करण की अधिकार-स्थिति सत्यापित नहीं है। पृष्ठ-संख्याएँ और पाद-टिप्पणियाँ मूल के अनुसार रखी गई हैं। बाइबल के संदर्भ मुद्रित प्रति के अनुसार रखे गए हैं; पुस्तकों के नाम हिंदी बाइबल (O.V.) के अनुसार दिए गए हैं। यह अनुवाद UECF.NET के लिए AI-सहायता से किया गया पूर्ण अनुवाद है और संपादकीय गुणवत्ता-समीक्षा से तैयार हुआ है; किसी मानव अनुवादक का नाम इससे संबद्ध नहीं किया गया है।
जॉन कैल्विन के बारे में
जॉन कैल्विन (1509–1564) फ्रांसीसी धर्म-सुधारक, धर्मविज्ञानी और जिनेवा की कलीसिया के पासबान थे। 1536 में पहली बार प्रकाशित और 1559 तक विस्तारित उनकी “मसीही धर्म की संस्थाएँ” (Institutes of the Christian Religion) प्रोटेस्टेंट धर्म-सुधार की सबसे प्रभावशाली धर्मवैज्ञानिक रचनाओं में से एक है। उन्होंने बाइबल की अधिकांश पुस्तकों पर टीकाएँ, तथा अनेक उपदेश और ग्रन्थ लिखे; सुधारवादी कलीसियाओं की शिक्षा और शासन पर उनका प्रभाव आज तक बना हुआ है।
यह जीवन-परिचय कैल्विन के जीवन के विषय में व्यापक रूप से प्रलेखित, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों का सारांश है। सुधार [email protected] पर भेजें।
अध्याय
- मुखपृष्ठ और विषय-सूची≈ 1 मिनट
- सम्पादक की टिप्पणी≈ 1 मिनट
- मूल मुखपृष्ठ≈ 1 मिनट
- समर्पण-पत्र≈ 15 मिनट
- बैक्स्टर का विलाप, पाठक के लिए चेतावनी सहित≈ 9 मिनट
- व्याख्यान 1≈ 35 मिनट
- व्याख्यान 2≈ 33 मिनट
- व्याख्यान 3≈ 34 मिनट
- व्याख्यान 4≈ 38 मिनट
- व्याख्यान 5≈ 36 मिनट
- व्याख्यान 6≈ 37 मिनट
- व्याख्यान 7≈ 37 मिनट
- व्याख्यान 8≈ 46 मिनट
- व्याख्यान 9≈ 35 मिनट
