यूहन्ना 3:3

नया जन्म और पवित्र आत्मा

चार्ल्स एच. स्पर्जन · सब कुछ अनुग्रह से, 1894

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    यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

    “तुम्हें नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।” हमारे प्रभु यीशु का यह वचन बहुतों के मार्ग में ऐसे धधकता हुआ प्रतीत हुआ है, मानो अदन की वाटिका के फाटक पर करूब की खींची हुई तलवार हो। वे निराश हो गए हैं, क्योंकि यह परिवर्तन उनके बड़े से बड़े प्रयत्न की पहुँच से बाहर है। नया जन्म ऊपर से होता है, और इसलिए वह सृष्ट प्राणी के वश में नहीं है। अब, मेरे मन में यह बात कदापि नहीं कि झूठी सान्त्वना देने के लिए मैं किसी सत्य का इन्कार करूँ, या उसे कभी छिपाऊँ। मैं खुले मन से स्वीकार करता हूँ कि नया जन्म अलौकिक है, और वह पापी के अपने द्वारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता। यदि मैं इतना दुष्ट होता कि अपने पाठक को, जो बात निःसन्देह सत्य है उसे अस्वीकार करने या भूल जाने के लिए राज़ी करके, उसका ढाढ़स बँधाने का प्रयत्न करता, तो यह उसके लिए बहुत ही तुच्छ सहायता होती।

    परन्तु क्या यह उल्लेखनीय बात नहीं कि जिस अध्याय में हमारा प्रभु यह व्यापक घोषणा करता है, उसी अध्याय में विश्वास के द्वारा उद्धार के विषय में सबसे स्पष्ट कथन भी पाया जाता है? यूहन्ना रचित सुसमाचार का तीसरा अध्याय पढ़िए, और केवल उसके आरम्भ के वाक्यों पर ही न ठहरे रहिए। यह सच है कि तीसरा पद कहता है:

    यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।

    परन्तु फिर, चौदहवाँ और पन्द्रहवाँ पद यह कहते हैं:

    और जिस रीति से मूसा ने जंगल में साँप को ऊँचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊँचे पर चढ़ाया जाए; ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

    अठारहवाँ पद उसी शिक्षा को सबसे व्यापक शब्दों में दोहराता है:

    जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दण्ड की आज्ञा नहीं होती; परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका, इसलिए कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।

    हर पाठक पर यह स्पष्ट है कि ये दोनों कथन अवश्य एक-दूसरे से मेल खाते होंगे, क्योंकि वे एक ही मुख से निकले हैं, और परमेश्वर की प्रेरणा से लिखे गए एक ही पृष्ठ पर दर्ज हैं। जहाँ कोई कठिनाई हो ही नहीं सकती, वहाँ हम कठिनाई क्यों खड़ी करें? यदि एक कथन हमें यह निश्चय दिलाता है कि उद्धार के लिए किसी ऐसी वस्तु का होना आवश्यक है जिसे केवल परमेश्वर ही दे सकता है, और यदि दूसरा कथन हमें यह निश्चय दिलाता है कि यीशु पर हमारे विश्वास करने पर प्रभु हमारा उद्धार करेगा, तो हम सुरक्षित रूप से यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि जो विश्वास करते हैं, उन्हें प्रभु वह सब कुछ देगा जो उद्धार के लिए आवश्यक बताया गया है। वास्तव में प्रभु उन सब में, जो यीशु पर विश्वास करते हैं, नया जन्म उत्पन्न करता है; और उनका विश्वास करना ही इस बात का सबसे पक्का प्रमाण है कि उनका नया जन्म हो चुका है।

    जो हम स्वयं नहीं कर सकते, उसके लिए हम यीशु पर भरोसा रखते हैं: यदि वह हमारे अपने वश में होता, तो उसकी ओर ताकने की क्या आवश्यकता होती? विश्वास करना हमारा काम है; हमें नये सिरे से सृजना प्रभु का काम है। वह हमारे बदले विश्वास नहीं करेगा, और न ही हमें उसके बदले नया जन्म देने का काम करना है। हमारे लिए इतना ही पर्याप्त है कि हम उस अनुग्रहपूर्ण आज्ञा का पालन करें; हम में नया जन्म उत्पन्न करना प्रभु का काम है। जो हमारे लिए यहाँ तक जा सका कि क्रूस पर मर गया, वह हमारी अनन्त सुरक्षा के लिए जो कुछ आवश्यक है, वह सब हमें दे सकता है और देगा भी।

    “परन्तु मन का उद्धार देनेवाला परिवर्तन तो पवित्र आत्मा का काम है।” यह भी बिल्कुल सच है, और ऐसा कभी न हो कि हम इस पर सन्देह करें या इसे भूल जाएँ। परन्तु पवित्र आत्मा का काम गुप्त और रहस्यमय है, और उसे केवल उसके परिणामों से ही पहचाना जा सकता है। हमारे शारीरिक जन्म के विषय में भी ऐसे भेद हैं जिनमें झाँकना एक अपवित्र जिज्ञासा होगी: परमेश्वर के आत्मा के पवित्र कार्यों के विषय में तो यह बात और भी अधिक सच है। “हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है; जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।” तौभी इतना तो हम अवश्य जानते हैं — पवित्र आत्मा का रहस्यमय काम यीशु पर विश्वास करने से इन्कार करने का कारण नहीं हो सकता, जिसकी गवाही वही आत्मा देता है।

    यदि किसी मनुष्य को खेत बोने की आज्ञा दी जाए, तो वह यह कहकर अपनी लापरवाही का बहाना नहीं बना सकता कि जब तक परमेश्वर बीज को न उगाए, तब तक बोना व्यर्थ होगा। वह इस कारण खेती की उपेक्षा करने में ठीक नहीं ठहरेगा कि केवल परमेश्वर की गुप्त शक्ति ही फसल उत्पन्न कर सकती है। जीवन के साधारण कामों में कोई भी इस तथ्य के कारण रुकता नहीं कि यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनानेवालों का परिश्रम व्यर्थ होगा। यह निश्चित है कि जो कोई यीशु पर विश्वास करता है, वह कभी यह नहीं पाएगा कि पवित्र आत्मा उसमें काम करने से इन्कार करता है: वास्तव में, उसका विश्वास करना ही इस बात का प्रमाण है कि आत्मा उसके हृदय में पहले से काम कर रहा है।

    परमेश्वर अपने विधान में काम करता है, परन्तु इस कारण मनुष्य हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे रहते। वे परमेश्वर की उस सामर्थ्य के बिना, जो उन्हें जीवन और बल देती है, हिल भी नहीं सकते, तौभी वे बिना कोई प्रश्न उठाए अपने मार्ग पर आगे बढ़ते जाते हैं; और वह सामर्थ्य उसी के द्वारा दिन-प्रतिदिन दी जाती है, जिसके हाथ में उनका प्राण है और जिसके वश में उनका सब चलना-फिरना है। अनुग्रह में भी ऐसा ही है। हम पश्चाताप करते और विश्वास करते हैं, यद्यपि यदि प्रभु हमें सामर्थ्य न देता तो हम इन दोनों में से कुछ भी न कर पाते। हम पाप को छोड़ते और यीशु पर भरोसा रखते हैं, और तब हमें समझ आता है कि प्रभु ही ने अपनी सुइच्छा के अनुसार हम में इच्छा और काम, दोनों बातों को उत्पन्न किया है। यह बहाना करना व्यर्थ है कि इस विषय में कोई वास्तविक कठिनाई है।

    कुछ सत्य ऐसे हैं जिन्हें शब्दों में समझाना कठिन है, परन्तु वास्तविक अनुभव में वे काफ़ी सरल होते हैं। इस सत्य में कि पापी विश्वास करता है, और इस सत्य में कि उसका विश्वास पवित्र आत्मा के द्वारा उसमें उत्पन्न किया जाता है, कोई विरोध नहीं है। केवल मूर्खता ही मनुष्यों को ऐसी सीधी-सादी बातों पर उलझने के लिए प्रेरित कर सकती है, जबकि उनके प्राण संकट में हों। कोई भी मनुष्य जीवन-रक्षक नाव में चढ़ने से केवल इसलिए इन्कार नहीं करेगा कि वह वस्तुओं का आपेक्षिक घनत्व नहीं जानता; और न ही कोई भूख से मरता हुआ मनुष्य तब तक खाने से मना करेगा जब तक वह पोषण की सारी प्रक्रिया को समझ न ले। मेरे पाठक, यदि आप तब तक विश्वास नहीं करेंगे जब तक सब भेदों को समझ न लें, तो आपका उद्धार कभी होगा ही नहीं; और यदि आप अपनी ही गढ़ी हुई कठिनाइयों को अपने प्रभु और उद्धारकर्ता के द्वारा मिलनेवाली क्षमा को ग्रहण करने से रोकने देंगे, तो आप ऐसे दण्ड में नाश होंगे जिसके आप पूरी रीति से योग्य ठहरेंगे। तत्त्वमीमांसा की बारीकियों पर वाद-विवाद करने की सनक में पड़कर आत्मिक आत्महत्या न कीजिए।

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