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पवित्रीकरण (जारी)
हमारी पूर्ण सिद्धता अभी आनेवाली है, और उसकी आशा ही एक कारण है कि हमें स्वर्ग की लालसा करनी चाहिए।
6. अन्त में, हम पवित्रीकरण को बहुत महत्त्व देने और पवित्रता के ऊँचे स्तर के लिए संघर्ष करने में कभी लज्जित न हों। जहाँ कुछ लोग बहुत ही निम्न स्तर की उपलब्धि से सन्तुष्ट हैं, और कुछ लोग बिना किसी पवित्रता के जीते रहने में भी लज्जित नहीं होते, और केवल गिरजाघर और प्रार्थनालय जाने के चक्र से सन्तुष्ट रहते हैं, पर चक्की में जुते घोड़े की नाईं कभी आगे नहीं बढ़ते, वहाँ हम पुराने मार्गों पर दृढ़ बने रहें, स्वयं उत्कृष्ट पवित्रता के पीछे चलें और दूसरों को भी उसकी निडरता से सिफ़ारिश करें। वास्तव में सुखी होने का यही एकमात्र मार्ग है।
हमें यह निश्चय हो, चाहे दूसरे कुछ भी कहें, कि पवित्रता ही सुख है और जीवन को सबसे अधिक चैन से पार करनेवाला मनुष्य वही है जो पवित्र किया गया है। इसमें सन्देह नहीं कि कुछ सच्चे मसीही ऐसे हैं जो रोग, पारिवारिक परीक्षाओं या अन्य गुप्त कारणों से बहुत कम अनुभवगम्य शान्ति का आनन्द उठाते हैं और स्वर्ग के मार्ग पर जीवन भर शोक मनाते हुए चलते हैं। परन्तु ये अपवाद हैं। साधारण नियम के रूप में, जीवन के लम्बे सफ़र में यह सत्य पाया जाएगा कि "पवित्र किए गए" लोग ही पृथ्वी पर सबसे सुखी लोग हैं। उनके पास ठोस सान्त्वनाएँ हैं जिन्हें संसार न दे सकता है और न छीन सकता है। "उस [बुद्धि] के मार्ग आनन्द के हैं।" "तेरी व्यवस्था से प्रीति रखनेवालों को बड़ी शान्ति होती है।" उसने, जो झूठ नहीं बोल सकता, कहा: "मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हलका है।" परन्तु यह भी लिखा है, "दुष्टों के लिये शान्ति नहीं" (नीति. 3:17; भज. 119:165;
