यह हिन्दी संस्करण UECF.NET के लिए AI-सहायता से किए गए पूर्ण अनुवाद और सम्पादकीय गुणवत्ता-समीक्षा के द्वारा तैयार किया गया है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
शीर्षक-पृष्ठ और विषय-सूची
सर्वाधिकार © मोनर्जिज़्म बुक्स
प्रार्थना के विषय में
जॉन कैल्विन द्वारा
विश्वास का एक निरन्तर अभ्यास।
उससे प्राप्त होनेवाले दैनिक लाभ।
मसीही धर्म की स्थापना (Institutes of the Christian Religion) की पुस्तक III, अध्याय 20 से,
हेनरी बेवरिज द्वारा अनूदित (1845)।
विषय-सूची
I. प्रार्थना का स्वरूप और मसीही अभ्यास के रूप में उसकी आवश्यकता, खण्ड 1, 2।
II. प्रार्थना किससे की जानी चाहिए। एक ऐसी आपत्ति का खण्डन जो मन में सहज ही उठ खड़ी होती है, खण्ड 3।
III. प्रार्थना में पालन किए जानेवाले नियम, खण्ड 4-16।
IV. प्रार्थना किसके द्वारा की जाए, खण्ड 17-19।
V. हमारे मध्यस्थ और सिफ़ारिशी के सिद्धान्त से सम्बन्धित एक भ्रम का खण्डन, तथा सन्तों की मध्यस्थता के समर्थन में दिए जानेवाले मुख्य तर्कों के उत्तर, खण्ड 20-27।
VI. प्रार्थना का स्वरूप और उसके कुछ आनुषंगिक पहलू, खण्ड 28-33।
VII. प्रार्थना का एक सिद्ध रूप, अर्थात् प्रभु की प्रार्थना की व्याख्या, खण्ड 34-50।
VIII. प्रार्थना के विषय में पालन किए जानेवाले कुछ नियम, जैसे समय, धीरज, मन की दशा और विश्वास की निश्चयता, खण्ड 50-52।
