अध्याय XI.— मसीही मृत्यु को कैसे देखते हैं,
पर न तो हमें मृत्युदण्ड दिया जाना चाहिए, और न दुष्ट मनुष्य और दुष्ट आत्मा हम से अधिक बलवान होते, यदि जन्म लेनेवाले हर मनुष्य पर मृत्यु एक ऋण न होती। इसलिए जब हम यह ऋण चुकाते हैं तब धन्यवाद देते हैं। और हम यहाँ बताना ठीक और उचित समझते हैं, क्रेस्केन्स के निमित्त और जो उसके समान बकते हैं उनके निमित्त, जो कही जा-
• ता ज़ेनोफोन द्वारा। हेर्कुलीस, ज़ेनोफोन कहता है, एक ऐसे स्थान पर आकर जहाँ तीन मार्ग मिलते थे, सद्गुण और दुर्गुण को पाया, जो स्त्रियों के रूप में उसे दिखाई दिए : दुर्गुण, विलासी वस्त्र में, और ऐसे आभूषणों से खिली मोहक मुखाकृति के साथ, और शीघ्र पिघलती कोमलतावाली आँखों के साथ,^ हेर्कुलीस से कहा कि यदि वह उसका अनुसरण करे, तो वह उसे सदा समर्थ करेगी
अपना जीवन सुख में बिताने के लिये और सबसे सुन्दर आभूषणों से सजा हुआ, जैसे तब उसके अपने शरीर पर थे ; और सद्गुण, जिसकी दृष्टि और वस्त्र मैले थे, बोला, पर यदि तू मेरी आज्ञा माने, तो तू
अपने को न उस आभूषण से सजाएगा और न उस सुन्दरता से जो बीत जाती और नष्ट होती है, पर
मूर्ति जिस का आप आदर करते हैं, और जिस पर आप रक्त छिड़कते हैं, केवल निर्बुद्धि पशुओं का ही नहीं, मनुष्यों का भी, आप में सबसे प्रसिद्ध और कुलीन पुरुष के हाथ से मारे गए लोगों के रक्त की अर्घ्य बनाकर? और जूपिटर तथा अन्य देवताओं की नकल पुरुषगमन और स्त्री के साथ निर्लज्ज संसर्ग में करते हुए, क्या हम एपिकुरस और कवियों की रचनाओं को अपना प्रतिवाद न ला सकते ? पर क्योंकि हम मनुष्यों को ऐसे उपदे-
अनन्त और अनमोल अनुग्रह। और हम मानते हैं कि जो कोई उन बातों से भागता है
जो अच्छी सी लगती हैं, और जो कठिन और अनोखी गिनी जाती हैं उनके पीछे दृढ़ता से लगता है, प्रवेश करता है
धन्यता में। क्योंकि दुर्गुण, अविनाशी की नकल से (क्योंकि जो वास्तव में अ-
विनाशी उसके पास न है और न वह उत्पन्न कर सकती है) उसने अपने कामों के चारों ओर डाल दिया है, एक छद्म-
श, और जो उनको करते हैं और ऐसी मिसालों की नकल करते हैं, सब, जैसा अब इस प्रवचन में हमने
वेश, सद्गुण के गुणों को, और जो गुण वास्तव में उत्तम हैं, पृथ्वीमनस्क मनुष्यों को बन्दी बनाता है, A^सद्गुण से अपना ही बुरा जोड़ते हुए
तुम्हें समझाने का यत्न किया, हम हर प्रकार से घेरे जाते हैं। पर हम चिन्तित नहीं, क्योंकि हम जानते हैं कि परमेश्वर सब का न्यायपूर्ण दर्शक है। पर क्या ही भला होता कि अभी भी कोई चढ़े
गुण। पर जिन्होंने समझा उत्कृ-
ष्टताएँ जो वास्तविक की हैं, वे हैं
सद्गुण में अक्षय भी। और यह हर समझदार मनुष्य को सोचना चाहिए, मसीहियों के विषय में भी और
ऊँचा मंच, और ऊँचे शब्द से पुकारे,5 " लज्जित हो, लज्जित हो, तुम जो निर्दो-
क्रीड़ावीरों के विषय में, और उनके विषय में जिन्होंने वह किया जिसका कवियों ने
तथाकथित देवताओं का वर्णन किया, मृत्यु के प्रति हमारी अवहेलना से इतना निष्कर्ष निकालते हुए, तब भी जब उससे बचा जा सकता था।^
ष उन कामों पर, जिन्हें तुम स्वयं खुलेआम करते हो, और जो बातें तुम पर लागू होती हैं उन्हें लगाते हो तुम्हारे-
आप पर और तुम्हारे देवताओं पर, उन पर जिनकी उनसे रत्ती भर भी सहानुभूति नहीं। फिरो ; बुद्धिमान बनो।"
