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इच्छा की दासता और मुक्ति की प्रस्तावना
इच्छा की दासता और मुक्ति की प्रस्तावना
इच्छा की दासता और मुक्ति में जॉन कैल्विन मसीही धर्मविज्ञान के एक अत्यन्त गम्भीर प्रश्न को उठाते हैं: पतित अवस्था में मनुष्य की इच्छा का स्वरूप क्या है। आधुनिक पाठकों के लिए सुगम बनाई गई इस रचना में कैल्विन के तीक्ष्ण तर्कों को स्पष्ट किया गया है और उनकी भाषा को सरल किया गया है, ताकि मानवीय स्वतन्त्रता और ईश्वरीय प्रभुता की सीमाओं पर एक सदाबहार चिन्तन प्रस्तुत हो सके। यह संक्षिप्त संस्करण पाठकों को अल्बर्टस पिघियस के विरुद्ध कैल्विन के खण्डन में ले चलता है; पिघियस अपने समय का एक प्रसिद्ध धर्मवैज्ञानिक था, जो उद्धार के विषय में मनुष्य की स्वतन्त्र इच्छा के विचार का समर्थन करना चाहता था।
कैल्विन की यह रचना उनके इस मत का बचाव भी है और घोषणा भी कि पतन के बाद से मनुष्य की इच्छा पाप से गहराई तक प्रभावित है, और हमें ऐसी प्रवृत्तियों का दास बनाए रखती है जो ईश्वरीय हस्तक्षेप के बिना हमें परमेश्वर से अलग रखती हैं। कैल्विन का तर्क है कि पाप से दूषित मनुष्य की इच्छा पवित्र आत्मा के नया जन्म देनेवाले कार्य के बिना अपने आप परमेश्वर की ओर नहीं झुक सकती। दासता की यह धारणा, जैसा पवित्रशास्त्र में चित्रित है, मनुष्य की दशा के मर्म को छूती है और अनुग्रह को समझने की नींव है। कैल्विन इफिसियों 2:1-9 जैसे अंशों की ओर संकेत करते हैं, जो मनुष्य को “अपराधों और पापों में मरा हुआ” बताते हैं, ऐसी दशा जिससे केवल परमेश्वर ही छुड़ा सकता है।
पिघियस को कैल्विन का उत्तर उनकी धर्मवैज्ञानिक गहराई ही नहीं, उनकी पास्तरीय चिन्ता को भी प्रकट करता है। वे इस बात पर बल देते हैं कि नैतिक स्वतन्त्रता या जन्मजात भलाई का मनुष्य का घमण्ड मसीह के बलिदान की आवश्यकता और अनुग्रह की सामर्थ्य को घटा देता है। कैल्विन की पद्धति, जो पवित्रशास्त्र में जमी है और इस उत्कट अभिलाषा से प्रेरित है कि कलीसिया मनुष्य की सामर्थ्य से बढ़कर परमेश्वर का आदर करे, उद्धार का ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जो पूरी तरह परमेश्वर की दया पर निर्भर है; ऐसा दृष्टिकोण जो निर्बलों के लिए आशा लाता है और पतितों के प्रति परमेश्वर के प्रेम को महिमा देता है।
इस सुगम संस्करण में पाठक कैल्विन के उत्कृष्ट तर्कों को संक्षिप्त रूप में पाएँगे, जो उनके विचारों के सार को खोए बिना मूल बातों पर केन्द्रित हैं। उनके चिन्तन हमें अपनी आत्मिक दशा, दीनता और परमेश्वर पर अपनी निर्भरता पर विचार करने की चुनौती देते हैं। जब हम कैल्विन के साथ इस यात्रा पर निकलें, तो हम भी, जैसा उन्होंने देखा, हमारी इच्छा को मुक्त करने और हमारे जीवन को छुड़ाने में परमेश्वर के अनुग्रह की सुन्दरता और आवश्यकता को देख सकें।
