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हमारे प्रभु और एकमात्र उद्धारकर्ता यीशु मसीह के पवित्र भोज पर लघु ग्रन्थ
हमारे प्रभु और एकमात्र उद्धारकर्ता यीशु मसीह का
क्योंकि हमारे प्रभु यीशु मसीह के भोज का पवित्र संस्कार बहुत समय से अनेक बड़ी त्रुटियों में उलझा रहा है, और गत वर्षों में नए सिरे से विभिन्न मतों और झगड़ालू विवादों में फँस गया है, इसलिए यदि निर्बल विवेकवाले लोग ठीक से यह निश्चय नहीं कर पाते कि उन्हें कौन-सा मत अपनाना चाहिए, वरन् सन्देह और असमंजस में पड़े रहते हैं, इस प्रतीक्षा में कि सब झगड़े एक ओर रखकर परमेश्वर के सेवक इस विषय में किसी सहमति पर पहुँचें, तो यह आश्चर्य की बात नहीं। फिर भी, चूँकि इस विधि के विषय में कोई निश्चयता न होना अत्यन्त जोखिम की बात है, जिसका ज्ञान हमारे उद्धार के लिए इतना आवश्यक है, मैंने सोचा कि यह बड़े काम का परिश्रम होगा कि इस विषय में जो कुछ जानना आवश्यक है उसका मुख्य सार संक्षेप में और फिर भी स्पष्टता से निकालने का प्रयत्न करूँ। यह भी जोड़ना चाहिए कि मुझसे ऐसा करने का अनुरोध कुछ आदरणीय जनों ने किया, जिन्होंने इसकी आवश्यकता को समझा, और जिन्हें मना करना मेरे कर्तव्य का उल्लंघन होता।
परन्तु सब कठिनाई से मुक्त होने के लिए उचित है कि उस क्रम को ध्यान में रखा जाए जिसका अनुसरण करने का मैं प्रस्ताव करता हूँ। तो पहले हम यह समझाएँगे कि प्रभु ने किस उद्देश्य से और किस कारण से हमारे लिए इस पवित्र संस्कार की स्थापना की। दूसरे, हमें इससे क्या फल और लाभ मिलता है, जब यह भी दिखाया जाएगा कि यीशु मसीह की देह हमें किस प्रकार दी जाती है। इसके बाद, इसका वैध उपयोग क्या है। चौथे, हम विस्तार से बताएँगे कि यह किन त्रुटियों और अन्धविश्वासों से दूषित किया गया है, जहाँ यह भी दिखाया जाएगा कि परमेश्वर के सेवकों को पोप के अनुयायियों से कितना भिन्न होना चाहिए। और अन्त में, हम यह बताएँगे कि उस विवाद का स्रोत क्या रहा है, जो इतनी तीव्रता से चलाया गया है, उन लोगों के बीच भी जिन्होंने हमारे समय में सुसमाचार को फिर से प्रकाश में लाया और खरी शिक्षा में कलीसिया की सही रीति से उन्नति करने में स्वयं को लगाया।
