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पाठक के नाम रोलैंड हॉल का पत्र
परमेश्वर के विश्वासयोग्य सेवक और हमारे समय के प्रेरित श्रीमान जॉन कैल्विन के इन उपदेशों को छपवाने के लिए मुझे विशेष रूप से तीन कारण प्रेरित करते हैं। पहला, इन उपदेशों में प्रस्तुत विषय की योग्यता। दूसरा, वह सादगी और सरलता जो यह महान पादरी लोगों के सामने अपने सब उपदेशों में बरतता है। तीसरा, पवित्रशास्त्र को आदरपूर्वक सँभालना, बिना ताने, ठट्ठे, हँसी-मज़ाक या किन्हीं तुच्छ कहानियों के, जिससे हमारी अंग्रेज़ जाति देख और परख सके कि परमेश्वर का वचन जब अत्यन्त नंगा, खुला और उस रँगी हुई म्यान से रहित होता है जो मनुष्य उस पर चढ़ाना चाहते हैं, तब उसमें अपने आप में कितनी सामर्थ्य होती है।
विषय सब मनुष्यों के जानने के योग्य है और इन चार बातों में टिका है। पहली, मूर्तिपूजा से भाग निकलने की एक सामान्य चेतावनी। दूसरी, सताव सहने और क्रूस उठाने में मसीह के पीछे चलने का आग्रह। तीसरी, परमेश्वर की सेवा करने की स्वतंत्रता और परमेश्वर की कलीसिया में जीवन बिताने के लाभ की सराहना। चौथी, यह वर्णन कि किसी मसीही मण्डली में परमेश्वर की शुद्ध आराधना करने की इस स्वतंत्रता को सब मसीहियों को कितने परिश्रम और यत्न से ढूँढ़ना और चाहना चाहिए। और अन्त में भजन संहिता 87 की व्याख्या जोड़ दी गई है, जो सिखाती है कि परमेश्वर की कलीसिया, यद्यपि इस संसार में दीन-हीन दिखाई देती है, तौभी पृथ्वी के सब राज्यों से श्रेष्ठ है, क्योंकि परमेश्वर उससे प्रेम रखता है, उसका शासन करता है, उसे स्थिर करता है, उसे बढ़ाता है, और अपने चुने हुए लोगों की गिनती और संख्या उसी में से लेता है।
दूसरी बात के विषय में: यह सादगी वैसी ही है जैसी हमारे उद्धारकर्ता मसीह और उसके प्रेरितों ने अपने प्रचार में बरती, जिसके विषय में सन्त पौलुस कुरिन्थियों से कहता है कि वह वचन की उत्तमता या मनुष्य के ज्ञान के साथ उन्हें परमेश्वर की गवाही सुनाने नहीं आया, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस और उसके द्वारा कार्य करनेवाली परमेश्वर की सामर्थ्य व्यर्थ ठहरे, क्योंकि तब मनुष्य उसे वाक्पटुता का फल मान बैठते जो केवल परमेश्वर का आत्मा विश्वासियों के हृदयों में करता है।
तीसरी बात के लिए: वह सन्त पतरस की आज्ञा का पालन करता है। यदि कोई बोले, तो ऐसे बोले मानो परमेश्वर का वचन है। इसलिए उसके सब उपदेश और कुछ नहीं, वरन पवित्रशास्त्र का मीठा रस और परमेश्वर का जीवित वचन प्रतीत होते हैं, जो स्फटिक के पात्रों में हमारी आँखों के सामने रखा गया है, कि हमें उसे देखने के लिए लुभाए और जीवन के इन रसों को चखने और सूँघने के लिए उकसाए, जिन्हें वह हमारे इन दिनों में परमेश्वर द्वारा उसे दी गई उस भरपूरी में से हमारे लिए उँडेलता है। परमेश्वर हमें अनुग्रह दे कि हम इसमें और अन्य सब बातों में जो हमें दी जाती हैं, परमेश्वर के अच्छे दानों को धन्यवाद के साथ ग्रहण करें। ऐसा ही हो।
