इस पुस्तक में खोजें
यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
1 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 88प्रभु यहोवा यों कहता है, इस्राएल का घराना फिर मुझ से बिनती करेगा कि मैं उनके लिये यह करूँ। यहेजकेल 36:37। प्रार्थना दया की अग्रदूत है। पवित्र इतिहास को उलटकर देखिए, तो आप पाएँगे कि शायद ही कभी कोई बड़ी दया इस संसार में बिनती के द्वारा घोषित हुए बिना आई हो। प्रार्थना सदा आशीष की भूमिका होती है। वह आशीष के आगे-आगे चलती है, मानो आशीष की परछाईं हो। जब परमेश्वर की दया की धूप हमारी आवश्यकताओं पर उदय होती है, तो वह प्रार्थना की परछाईं को मैदान पर दूर तक डाल देती है। या, एक और दृष्टान्त लें, तो जब परमेश्वर दया का एक पहाड़ खड़ा करता है, तब वह आप उनके पीछे से चमकता है, और हमारी आत्माओं पर प्रार्थना की परछाईं डालता है, ताकि हम निश्चिन्त रहें कि यदि हम बहुत प्रार्थना में लगे रहते हैं, तो हमारी बिनतियाँ दया की ही परछाइयाँ हैं। इस प्रकार प्रार्थना को आशीष के साथ इसलिये जोड़ा गया है कि हमें उसका मूल्य दिखाई दे। स्पर्जन।
2 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 88हम भले काम करने में हियाव न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। गलातियों 6:9। इस वर्तमान जीवन की घड़ियाँ आनेवाले जीवन के युगों का बीज-रूप हैं। ए. जे. गॉर्डन।
3 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 88मैं आप तेरे संग चलूँगा। निर्गमन 33:14।
हमें कभी भी भोर को अपनी प्रार्थना की कोठरी से तब तक बाहर नहीं निकलना चाहिए, जब तक हमने अपने विचारों को गहराई और एकाग्रता से इस सच्चाई पर केन्द्रित न कर लिया हो कि परमेश्वर वहाँ सचमुच हमारे साथ उपस्थित है, हमें चारों ओर से घेरे हुए है, और उस कमरे को उतनी ही वास्तविकता से भर रहा है जितनी वास्तविकता से वह स्वयं स्वर्ग को भरता है। हो सकता है कि आरम्भ में इसका कोई स्पष्ट परिणाम न दिखे; परन्तु जैसे-जैसे हम परमेश्वर की उपस्थिति का अनुभव करने के लिये बार-बार प्रयत्न करेंगे, वैसे-वैसे वह हमारे लिये अधिकाधिक वास्तविक होती जाएगी। और जब यह आदत हम में जड़ पकड़ लेगी, तब चाहे हम किसी कमरे में अकेले हों, या किसी प्राकृतिक वन-मन्दिर की हरी घास पर चल रहे हों, या पथरीली सड़क पर टहल रहे हों—रात के सन्नाटे में हों, या दिन की उमड़ती भीड़ के बीच—हम प्रायः अपने आप को ये शब्द धीरे से कहते हुए पाएँगे, “तू निकट है; हे प्रभु, तू यहीं है।”—एफ़. बी. मेयर
4 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 89प्रभु हमारे परमेश्वर ही में दया और क्षमा है। दानिय्येल 9:9। जैसे स्प्रिंगवाला ताला अपने आप बन्द हो जाता है, परन्तु बिना कुंजी के खुल नहीं सकता, वैसे ही हम अपने आप तो पाप में जा पड़ सकते हैं, परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह की कुंजी के बिना लौट नहीं सकते। कॉड्रे।
5 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 89अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है। रोमियों 13:11। मैंने एक चित्रकार के विषय में सुना है जिसे भोर के उजाले में काम करना बहुत प्रिय था। वह कहता था कि दिन के आरम्भिक प्रकाश में रंग अधिक अच्छी तरह पहचाने जाते हैं, और इसलिये उसकी रीति थी कि वह अपने चित्रशाला में बैठकर सूर्योदय की प्रतीक्षा करता रहे। फिर हर क्षण उजाला बढ़ता जाता, और वह पाता कि वह ऐसे काम पूरे कर सकता है जिन तक वह न पहुँच पाता यदि दिन चढ़ने तक ठहरा रहता। क्या हमारे लिये भी कोई काम प्रतीक्षा नहीं कर रहा—ऐसा काम जिसे कोई और नहीं कर सकता—ऐसा काम भी, जिसे पूरा करने में स्वामी ने हमारी सहायता करने की प्रतिज्ञा की है? क्या वह आकर हमें अब भी सोते हुए पाएगा? या धार्मिकता का सूर्य जब प्रगट होगा, तो क्या हमें उस चित्रकार के समान प्रतीक्षा करते हुए, दिन की पहली किरण की बाट जोहते और लालसा करते हुए पाएगा? निश्चय हम में से जो इस प्रकार प्रभु की बाट जोहते हैं, वे नया
बल प्राप्त करते जाएँगे, और उकाब के समान ऊपर उठकर सूर्य का स्वागत करेंगे। टॉमस चैम्पनेस।
6 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 90परमेश्वर की कलीसिया, जिसे उसने अपने लहू से मोल लिया है। प्रेरितों के काम 20:28। निश्चय वह अपनों के साथ जो चाहे कर सकता है। उन्हें अपना बनाने के लिये उसने जो दाम चुकाया है, वही इस बात की पर्याप्त गारंटी है कि जिस किसी बात से उनके कल्याण का तनिक भी सम्बन्ध हो, उसे वह कभी हल्का नहीं समझेगा। उस लहू के कारण जो उसने हमारे लिये बहाया है, हम उसकी दृष्टि में बहुमूल्य हैं; और यदि वह किसी भी समय हमारे सुख के प्रति चिन्ता में कम पाया जाए, तो इसका अर्थ यह होगा कि वह अपने उस लहू के साथ वैसा ही व्यवहार करे जैसा इस संसार के पापी उसके साथ करते हैं। मसीह के प्रेम का दृढ़ निश्चय हमारे हृदयों पर इतनी गहराई से खुदा होना चाहिए कि उसकी ओर से उदासीनता का कोई आभास भी हम पर तनिक भी प्रभाव न डाल सके। यही वह विजय है जिससे संसार पर जय प्राप्त होती है। जॉर्ज बोवेन।
7 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 90सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए। रोमियों 15:13। जैसे सांसारिक बातों में, वैसे ही आत्मिक बातों में भी आशा में बड़ी शक्ति है, और इसलिये परमेश्वर के लोगों को उस अनुग्रह को यत्न से पोसना चाहिए। एक सुदृढ़ नींव पर टिकी हुई आशा—कि यीशु मसीह में नई सृष्टि बनाए जाने के कारण हम उसके हैं; कि हमारे नाम, चाहे संसार में अप्रसिद्ध हों, जीवन की पुस्तक में लिखे हुए हैं, और अनुग्रह हमारे अधिकार में है और स्वर्ग हमारी आँखों के सामने; कि कुछ और थोड़े से वर्षों के बाद, उन स्वर्गदूतों के समान पवित्र होकर जो सिंहासन के सामने गाते हैं, हम आनन्द के साथ राजा के महल में पहुँचाए जाएँगे, कि मसीह के समान और मसीह के साथ हों, और उसे आमने-सामने और मुँह-दर-मुँह देखें—ऐसी आशाएँ कर्म के प्रबल स्रोत हैं। गुथरी।
8 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 90उसने तुझ से जीवन माँगा, और तू ने उसे जीवन दिया; तू ने उसको युगानुयुग का दीर्घायु दिया है। भजन संहिता 21:4।
जब कंगाल लोग हम से कुछ माँगते हैं, तो हम प्रायः उन्हें वैसे ही उत्तर देते हैं जैसे प्रतिध्वनि आवाज़ को देती है—उत्तर आधी बिनती को काट देता है। मनुष्यों में हमें याएल का सा शिष्टाचार कम ही मिलेगा, जिसने पानी माँगनेवाले को दूध दिया—सिवाय इसके कि वह भी वैसा ही हो जैसा यह था, अर्थात् फँसानेवाला उपकार, जिससे हानि को और अच्छी तरह भीतर लाया जा सके। हम में ऐसे नामान बहुत नहीं हैं कि जब आप उनसे एक किक्कार माँगें, तो वे आपको दो लेने के लिये विवश करें; परन्तु हमारी प्रार्थनाओं का परमेश्वर का उत्तर एक बड़ा करके दिखानेवाले शीशे के समान है, जो बिनती को उत्तर में उससे कहीं बड़ा कर देता है जितनी वह प्रार्थना में थी। बिशप रेनॉल्ड्स।
9 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 91यीशु ने यह पहिला चिन्ह दिखाया। यूहन्ना 2:11। साधारण वस्तु में से ही वह बहुमूल्य वस्तु निकाली गई; और दैनिक जीवन की साधारण बातों में से ही, जब वे आज्ञाकारिता के साथ यीशु को अर्पित की जाती हैं और उसके चरणों में रखी जाती हैं, वह अपने महिमामय वरदान निकालता है, यहाँ तक कि हमारा सम्पूर्ण जीवन एक महान संस्कार बन जाता है।— डब्ल्यू. हे एटकिन
10 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 91दिन को . . . उसने बादल के द्वारा, और रात भर अग्नि के प्रकाश के द्वारा उनकी अगुवाई की। भजन संहिता 78:14। मेरा दिन मेरी समृद्धि है; यह वह समय है जब सौभाग्य का सूर्य मेरे ऊपर चमकता है, और इसलिये यही वह समय है जब मुझे छाया की आवश्यकता होती है। हे मेरे परमेश्वर, यदि मेरी धूप में छाया की धारियाँ न होतीं, तो मैं तुझे भूल जाता। परन्तु मुझे दिनों के साथ-साथ रातों का भी सामना करना है। रात मेरी विपत्ति है; यह वह समय है जब सौभाग्य का सूर्य पहाड़ियों के पीछे डूब चुका है, और मैं अकेला छोड़ दिया गया हूँ; और हे मेरे पिता, तभी मुझे तेरी अग्नि के प्रकाश की आवश्यकता होती है! रात के लिये मेरी अग्नि का प्रकाश कलवरी का दर्शन है—क्रूस में तेरे प्रेम का दर्शन। मुझे “रात भर” तेरी अग्नि के प्रकाश की आवश्यकता है।—जॉर्ज मैथेसन
11 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 91अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ कि हम क्या कुछ होंगे; परन्तु इतना जानते हैं कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है। यूहन्ना 3:2।
“अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं।” यह खाई के एक ओर का खम्भा है। “अब तक यह प्रगट नहीं हुआ कि हम क्या कुछ होंगे, परन्तु जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे।” यह दूसरी ओर का खम्भा है। इन दोनों को कैसे जोड़ा जाए? केवल एक ही मार्ग है जिससे वर्तमान पुत्रत्व खिलकर और फलकर भविष्य की सिद्ध समानता बन सकता है, और वह यह है कि हम परमेश्वर की सहायता से दिन-प्रतिदिन उस खाई के ऊपर उसके समान बढ़ती हुई समानता का, और उससे उत्पन्न होनेवाली पवित्रता का पुल बाँधते जाएँ। —एलेक्ज़ेंडर मैक्लैरन
12 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 92देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं। मत्ती 20:18। यरूशलेम की ओर ऐसी चढ़ाई कभी नहीं हुई थी जैसी यीशु यहाँ अपने चेलों के सामने रखता है। वह अपनी इच्छा से ऊपर जाता है। यह काम किसी बाहरी दबाव से नहीं कराया गया था। इस समय यरूशलेम से बचा जा सकता था। उसे जान-बूझकर चुना गया। यह ऐसी विजय की ओर चढ़ाई थी जो पराजय के मार्ग से प्राप्त होनी थी, ऐसे राज्याभिषेक की ओर जो अपमान और दीनता के द्वारा मिलना था। हे विश्वासी, आज संसार में अपनी यात्रा करते हुए, अपने उद्धार के कर्ता को इस प्रकार यरूशलेम की ओर चढ़ते हुए देखकर बल पाइए, शान्ति पाइए, प्रेरणा पाइए! और स्मरण रखिए कि जीवन के उन सब प्रत्यक्ष रूप से नीचे ले जानेवाले मार्गों में, जहाँ दुःख, और सम्भवतः मृत्यु, आपके सामने है, ऐसी सब ढलानें, जो यीशु के आत्मा में उतरी या सही जाती हैं, वास्तव में ऊपर चढ़ने की सीढ़ियाँ हैं, जो आपको परमेश्वर के पर्वत और पुनरुत्थान की महिमा तक ले जाती हैं। —जे. बी. स्ट्रेटन
13 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 92ये कुम्हार थे, और पौधों और बाड़ों के बीच रहते थे; वहाँ वे राजा के काम के लिये उसके साथ रहते थे। 1 इतिहास 4:23। हम कहीं भी और हर कहीं “राजा के काम के लिये उसके साथ” रह सकते हैं। हो सकता है कि हम इसके लिये बहुत ही असम्भावित या प्रतिकूल स्थान में हों; वह किसी गाँव का छोटा-सा जीवन हो सकता है, जहाँ अपने चारों ओर राजा की “गति” बहुत कम दिखाई देती हो; वह हर प्रकार के बाड़ों के
बीच हो सकता है, हर दिशा में रुकावटें ही रुकावटें; इससे भी बढ़कर, हो सकता है कि हमारे हाथ अपने दैनिक काम के लिये हर प्रकार के कुम्हारी के बरतनों से भरे हों। कोई बात नहीं! जिस राजा ने हमें “वहाँ” रखा है, वह आकर वहीं हमारे साथ रहेगा; बाड़े सब ठीक हैं, नहीं तो वह उन्हें शीघ्र ही हटा देता; और इससे यह नहीं निकलता कि जो बात हमारे मार्ग में बाधा लगती है, वह उसी मार्ग की रक्षा के लिये न हो; और रहे कुम्हारी के बरतन, तो ये ठीक वही हैं जिन्हें उसने हमारे हाथों में देना उचित समझा है, और इसलिये वे, वर्तमान के लिये, “उसका काम” हैं। फ्रांसिस रिडली हैवरगल
14 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 93मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूँगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मति दिया करूँगा। भजन संहिता 32:8। जब परमेश्वर मार्गदर्शन करता है, तब हमारा जीवन, चाहे वह जो कुछ भी कर रहा हो, उपयोगी और आशा से भरा होता है; और अनुशासन अपना सिद्ध करनेवाला काम करता है। एच. ई. कॉब
15 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 93मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे। मत्ती 20:28। हमें अपने आप को मसीह के प्रति ऐसा समर्पित करना है कि उसके आगमन का यह महान उद्देश्य हमारे सम्पूर्ण जीवन पर अधिकार करे और उसे अपने वश में कर ले। हमें परमेश्वर के समान दूसरों को आशीष देने के लिये जीना है। यही उसकी इच्छा है, हमारे विषय में उसका उद्देश्य। यही वह है जो उसकी सामर्थ हमारे लिये करने की बाट जोह रही है। और यही, उसके महान प्रेम का हम पर दावा भी है। इसकी सच्चाई पर एक फीकी-सी आह भरकर हामी न भरिए, और फिर लापरवाही से दूसरी ओर से निकल न जाइए। इसके विषय में सोचिए और प्रार्थना कीजिए, पर ऐसा न हो कि आपको इतनी भी क्षणिक आशा न हो कि वह प्रार्थना सुनी जाएगी। भले और उपयोगी बनने के बड़े-बड़े संकल्पों में अपने आप को न समेटिए। क्रूस पर चढ़ाए हुए के सामने घुटने टेकिए। मसीह के क्रूस में उसके महान उद्देश्य और मनुष्यों के प्रति उसके तरसते हुए प्रेम को अक्षर-अक्षर पढ़िए। उन छिदे हुए हाथों और पाँवों और लहूलुहान माथे से, हमारे प्रिय प्रभु की सारी भयानक लज्जा और वेदना से, जो पुकार हम तक आती है, उसकी सारी शक्ति को अपने हृदय में अनुभव करने दीजिए। और इन सब के द्वारा मोल लिये और बँधे हुए होकर, अपने आप को उसके महान उद्देश्य के लिये उसे सौंप दीजिए। इस जीवन-कार्य के लिये उसी को अपना बल बना लीजिए। मार्क गाय पियर्स
16 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 94यीशु . . . भलाई करता फिरा। प्रेरितों के काम 10:38। सब ललित कलाओं में सबसे उत्तम कला भलाई करने की कला है; और फिर भी इसी का अभ्यास सबसे कम किया जाता है। टी. डीविट टॉलमेज।
17 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 94और यहोवा के दूत ने उससे [हाजिरा से] कहा, अपनी स्वामिनी के पास लौट जा और उसके वश में रह। उत्पत्ति 16:9। अधीनता एक महान मसीही नियम है, परन्तु हम इसे उत्पत्ति में, मनुष्यजाति के इतिहास के बिलकुल आरम्भ में ही पाते हैं, और वह भी स्वर्गदूत के द्वारा दिया हुआ। संकलित।
18 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 94तब सुलैमान कहने लगा . . . मैं ने सचमुच तेरे लिये एक वासस्थान बनवाया है। 1 राजाओं 8:12, 13। केवल सुलैमान, जो शान्ति का राजकुमार था, मन्दिर बना सका। यदि हम आत्माओं को जीतनेवाले बनना और कलीसिया को, जो परमेश्वर का मन्दिर है, उन्नत करना चाहते हैं, तो आइए इस बात पर ध्यान दें: वाद-विवाद से नहीं, न तर्क से, परन्तु मसीह को ऊँचा उठाने के द्वारा ही हम मनुष्यों को उसकी ओर खींचेंगे। जे. हडसन टेलर।
19 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 94मैं ने दुःख की भट्ठी में परखकर तुझे चुन लिया है। यशायाह 48:10। क्या यह वचन कोमल वर्षा के समान नहीं आता, जो ज्वाला के प्रकोप को शान्त कर देती है? हाँ, क्या यह ऐसा अग्निरोधी कवच नहीं, जिस पर ताप का कोई बल नहीं चलता? क्लेश आए तो आए—परमेश्वर ने मुझे चुन लिया है। हे दरिद्रता, तू मेरे द्वार से भीतर घुस आ सकती है—परन्तु परमेश्वर पहले से घर में है, और उसने मुझे चुन लिया है। हे रोग, तू भीतर घुस सकता है, परन्तु मेरे पास मरहम तैयार है—परमेश्वर ने मुझे चुन लिया है। आँसुओं की इस तराई में मुझ पर चाहे जो कुछ बीते, मैं जानता हूँ कि उसने मुझे “चुन लिया” है। हे मसीही, मत डरिए; यीशु आपके साथ है। आपकी सब अग्निमय परीक्षाओं में उसकी उपस्थिति आपकी शान्ति भी है और आपकी सुरक्षा भी। जिसे उसने अपना होने के लिये चुन लिया है, उसे वह कभी नहीं छोड़ेगा। “मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ”—यही “दुःख की भट्ठी” में पड़े अपने चुने हुओं से उसकी प्रतिज्ञा का निश्चित वचन है। स्पर्जन
20 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 95परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को . . . चुन लिया है। 1 कुरिन्थियों 1:28। यूरोप के कुछ बड़े-बड़े भवनों में ऐसे चित्र देखे जा सकते हैं जो तूलिका से नहीं बनाए गए, परन्तु पच्चीकारी के हैं, जो पत्थर, काँच या किसी और वस्तु के छोटे-छोटे टुकड़ों से मिलकर बने हैं। कलाकार इन छोटे टुकड़ों को लेता है, और उन्हें चमकाकर और सजाकर एक भव्य और सुन्दर चित्र बना देता है। चित्र का हर एक अलग भाग काँच या संगमरमर या सीपी का एक छोटा-सा निकम्मा टुकड़ा हो सकता है; परन्तु जब हर एक अपने स्थान पर होता है, तो सब मिलकर कला की उत्कृष्ट कृति बन जाते हैं। मैं समझता हूँ कि उस महान कलाकार के हाथों में मानवजाति के साथ भी ऐसा ही होगा। परमेश्वर पत्थर और पीतल के उन छोटे-छोटे निकम्मे टुकड़ों को उठा रहा है जो बिना किसी के ध्यान दिए पाँवों तले रौंदे जा सकते थे, और उनसे अपनी महान उत्कृष्ट कृति बना रहा है। बिशप सिम्पसन
21 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 95आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! भजन संहिता 100:2। परमेश्वर चाहता है कि हमारा जीवन एक गीत हो। उसने हमारे लिये संगीत अपने वचन में, और उन कर्तव्यों में लिख दिया है जो जीवन में हमारे स्थानों और सम्बन्धों में हमारे पास आते हैं। जो काम हमें करने चाहिए, वे स्वरलिपि की रेखाओं पर अंकित स्वर हैं। अपने जीवन को सुन्दर संगीत बनाने के लिये हमें आज्ञाकारी और अधीन रहना होगा। हर प्रकार की आज्ञा का उल्लंघन एक बेसुरा स्वर गाना है, और उससे बेसुरापन ही उत्पन्न होता है। जे. बी. मिलर।
22 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 95परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा, और द्वार बन्द करके अपने पिता से जो गुप्त में है प्रार्थना कर। मत्ती 6:6। यह विश्वास का गढ़ है; यहीं वह दैनिक संग्राम के लिये अपने आप को हथियारों से लैस करता है। प्रार्थना की उस कोठरी में सन्नाटा सारे घर में मृत्यु का सूचक है। जब उस द्वार को उसके कब्ज़ों पर जंग खाने दिया जाता है, और वह कोठरी सूनी पड़ी रहती है, तब हृदय-रूपी घर पर शीघ्र ही शैतान फिर से अधिकार कर लेता है, और दुष्ट आत्माएँ भीतर आकर वहाँ बस जाती हैं।—थियोडोर कायलर
23 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 96पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ। 1 पतरस 1:16। पवित्रता का राजमार्ग जीवन की सबसे साधारण सड़क के साथ-साथ चलता है—ठीक आपके अपने मार्ग के साथ-साथ। आँधी और वर्षा में, चाहे वह कितने ही ज़ोर से थपेड़े मारे—यह तो बस उसके साथ हाथ में हाथ डालकर चलना है। मार्क गाय पियर्स।
24 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 96तब यहोवा ने कहा, यह जो मैं करता हूँ सो क्या अब्राहम से छिपा रखूँ? उत्पत्ति 18:17। अब्राहम परमेश्वर के साथ संगति में रहने के कारण, सदोम में रहनेवाले लूत से बहुत पहले ही उस नगर के विनाश के विषय में जान गया था। काश, हम में और अधिक संगति हो! संकलित।
25 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 96मैं शरीर में अब जो जीवन जीता हूँ। गलातियों 2:20। मैं इस संसार में से केवल एक ही बार होकर जाने की आशा रखता हूँ—इसलिये यदि कोई दया मैं दिखा सकूँ, या कोई भलाई मैं अपने किसी साथी मनुष्य के लिये कर सकूँ, तो मुझे उसे अभी कर लेने दो; मैं उसे टालूँ नहीं और न उसकी उपेक्षा करूँ, क्योंकि मैं इस मार्ग से फिर नहीं गुज़रूँगा। मार्कस ऑरेलियस।
26 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 96हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएँ। भजन संहिता 90:12। हर एक दिन एक छोटा-सा जीवन है; और हमारा सारा जीवन एक ही दिन का दोहराया जाना है: इसी कारण बूढ़ा याकूब अपने जीवन को दिनों से गिनता है; और मूसा यह चाहता है कि उसे पवित्र गणित की यह बात सिखाई जाए—कि वह अपने वर्ष नहीं, परन्तु अपने दिन गिने। इसलिये जो लोग एक दिन खो देने का साहस करते हैं, वे भयंकर रूप से अपव्ययी हैं; और जो उसे व्यर्थ गँवाने का साहस करते हैं, वे निरे दुस्साहसी हैं। —बिशप हॉल
27 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 96मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। कुलुस्सियों 1:27। धर्म वह साधारण आग से बचने की सीढ़ी नहीं है जिसे आप किसी सम्भावित खतरे की आशंका में अपने घर की बाहरी
दीवार पर बना देते हैं, और खतरा आने तक वहीं छोड़ देते हैं। किसी सुबह जब आपके घर में आग लग जाती है, तब आप उसके पास जाते हैं, और वह पुरानी बेचारी चीज़ जिसे आपने वहाँ बनाया था, और सोचा था कि किसी दिन काम में ला सकेंगे, इतनी जंग खाई हुई और टूटी-फूटी है, और मौसम ने उस पर इतने थपेड़े मारे हैं और धूप ने उसके कब्ज़ों को इतना बिगाड़ दिया है, कि वह काम ही नहीं करती। यही उस मनुष्य की दशा है जिसने अपने लिये विश्वास का एक ऐसा मत-सा बना लिया है, उस दिन की आशंका में परमेश्वर पर एक भरोसा, जब खतरा उसे आ घेरेगा, और अपने आप से कहा है, मैं सुरक्षित हूँ, क्योंकि उस समय मैं उसी में शरण ले लूँगा। परन्तु धर्म तो वह घर है जिसमें हम रहते हैं; वह मेज़ है जिस पर हम बैठते हैं; वह अंगीठी है जिसके पास हम आ बैठते हैं; वह कमरा है जो अपनी मनोहर और परिचित उपस्थिति की छत हमारे ऊपर ताने रहता है; वह बिछौना है जिस पर हम लेटते हैं, और बीते हुए समय पर विचार करते हैं, और भविष्य की ओर दृष्टि लगाते हैं, और नई ताज़गी पाते हैं। फ़िलिप्स ब्रुक्स।
28 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 97पिता की उस प्रतिज्ञा की बाट जोहते रहो। प्रेरितों के काम 1:4। किसी प्रतिज्ञा पर तब तक ठहरे रहिए जब तक परमेश्वर वहाँ आपसे न मिले। वह सदा अपनी प्रतिज्ञाओं के मार्ग से ही लौटकर आता है। संकलित।
29 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 97वह विजय जिस से संसार पर जय प्राप्त होती है, हमारा विश्वास है। यूहन्ना 5:4। संसार मुझ पर तब विजय पाता है जब वह मुझे अपने पिता परमेश्वर को देखने, उससे प्रेम करने, उसके साथ संगति रखने और उसकी सेवा करने से रोकने में सफल हो जाता है। मैं उस पर तब विजय पाता हूँ जब मैं उस पर अपना हाथ रखता हूँ और उसे विवश करता हूँ कि वह उसके और निकट पहुँचने में, उसके और अधिक समान बनने में, उसके विषय में और अधिक बार सोचने में, उसकी इच्छा को और अधिक आनन्द से और अधिक निरन्तरता से पूरी करने में मेरी सहायता करे। संसार पर एकमात्र विजय यह है कि उसे झुकाकर सबसे ऊँची बातों में अपनी सेवा में लगाया जाए—ईश्वरीय स्वभाव का और अधिक स्पष्ट दर्शन पाने में, स्वयं परमेश्वर के प्रति और गहरा प्रेम पाने में, और उसके प्रति और अधिक आनन्दपूर्ण समर्पण और सेवा में। यही विजय है—जब आप संसार को ऐसी सीढ़ी बना सकें जो आपको परमेश्वर तक उठा ले जाए। जब संसार धुँधला कर देनेवाले परदे के समान आपके और परमेश्वर के बीच आ जाता है, तो उसने आप पर विजय पा ली है। जब संसार
आपके और परमेश्वर के बीच एक पारदर्शी माध्यम के समान आता है, तो आपने उस पर विजय पा ली है। विजय पाना यह है कि उसे अपने पाँवों तले करके उस पर खड़े हो जाएँ, और उसके सहारे परमेश्वर की ओर ऊपर हाथ बढ़ाएँ। —एलेक्ज़ेंडर मैक्लैरन
30 सितम्बर
मुद्रित पृष्ठ 98क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहाँ कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें। भजन संहिता 91:11। किसी कर्तव्य को बहुत छोटा न समझिए, जीवन के किसी दौर को बहुत तुच्छ न जानिए, किसी काम को बहुत नीचा न मानिए, यदि वह आपके मार्ग में आए; क्योंकि परमेश्वर उसे इतना महत्त्व देता है कि उसमें आपकी रक्षा करने के लिये अपने स्वर्गदूतों को भेजता है। —मार्क गाय पियर्स
