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1 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 5भोर को . . . चढ़कर . . . उसकी चोटी पर मेरे साम्हने खड़ा होना। निर्गमन 34:2। हे मेरे पिता, मैं आ रहा हूँ। नीचे के तुच्छ मैदान की कोई भी वस्तु मुझे पवित्र ऊँचाइयों से दूर न रख सकेगी। मुझे शीघ्र चढ़ने में सहायता दे, और तू मेरे पाँव को सम्भाले रह, कहीं ऐसा न हो कि वह कठोर चट्टान पर गिर पड़े! तेरे बुलाने पर मैं आता हूँ, इसलिये तू मेरे मन से छल न करेगा। अपने साथ स्वर्ग से मधु, हाँ, दूध और दाखमधु, और मेरे प्राण की भलाई के लिये तेल भी ले आ; और सूर्य को उसकी चाल में ठहरा दे, नहीं तो तेरे मुख को निहारने और तेरी कोमल वाणी को सुनने के लिये समय बहुत थोड़ा पड़ जाएगा। पर्वत पर भोर! वह इतनी अच्छी तरह आरम्भ हुए दिन के बाकी सारे समय मुझे बलवन्त और आनन्दित बनाए रखेगी। —जोसेफ़ पार्कर
2 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 5प्रतिफल मेरे पास है। प्रकाशितवाक्य 22:12। हमें केवल किए हुए काम के लिये ही नहीं, वरन उठाए हुए बोझों के लिये भी प्रतिफल मिलेगा; और मुझे तो ऐसा लगता है कि सबसे उज्ज्वल प्रतिफल शायद उन्हीं के लिये होंगे जिन्होंने बिना कुड़कुड़ाए बोझ उठाए हैं। उस दिन वह उस सोसन के फूल को, जो इतने लम्बे समय से काँटों के बीच बढ़ता रहा है, उठाकर सारे विश्व की महिमा और आश्चर्य बना देगा; और उस सोसन की सुगन्ध स्वर्ग की सारी सेनाओं से अवर्णनीय स्तुतियाँ निकलवाएगी। —एन्ड्रयू बोनार
3 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 5तू कहाँ है? उत्पत्ति 3:9। क्या आप अपने आप को उससे छिपा रहे हैं जो आपको अपना धन्य काम अपने ही
ढंग से करने के लिये भेजना चाहता है? ओह, आज सवेरे मुझे आपसे यह कहने दीजिए, “प्रभु को आपका प्रयोजन है।” हो सकता है कि जो काम वह आपसे करवाना चाहता है वह एक छोटा-सा काम ही जान पड़े, परन्तु वह महत्त्वपूर्ण है। उसे “आपका प्रयोजन है।” उससे मुँह न मोड़िए; अपने आप को उसके द्वारा काम में लिये जाने के मार्ग से हटा न लीजिए; अपने लिये यह नियम बनाकर आरम्भ न कीजिए कि आप क्या करेंगे और क्या नहीं करेंगे; परन्तु अपने हृदय की गहराई से पुकार उठिए, “मैं यहाँ हूँ! मुझे भेज।” —डब्ल्यू. हे एटकिन
4 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 6धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है। भजन संहिता 34:19। धर्मी की सारी विपत्तियाँ खुलकर किसी महिमामय बात में बदल जाती हैं। बन्दी केवल छुड़ाया ही नहीं जाता, वरन वह द्वार पर अपनी बाट जोहते हुए एक स्वर्गदूत को भी पाता है। और हर एक छुटकारे के साथ एक विशेष आशीष आती है। एक स्वर्गदूत का नाम विश्वास है; एक और का, प्रेम; एक और का, आनन्द; एक और का, धीरज; एक और का, कृपा; एक और का, भलाई; एक और का, नम्रता; एक और का, संयम; एक और का, शान्ति। इन अनुग्रह-गुणों में से हर एक कहता है, “हम बड़े क्लेश में से निकलकर आए हैं।” —जी. बोवेन
5 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 6यहोवा मेरा . . . भजन का विषय है। भजन संहिता 118:14। आइए, हम इस पर विचार करें कि परमेश्वर स्वयं हमारा गीत बन जाता है। परमेश्वर को जानने की परिपूर्णता और सिद्धता यही है: उसे ऐसा जानना कि वह स्वयं हमारा आनन्द बन जाए; उसे ऐसा जानना कि जब हम उसके गीत गाते हैं तब स्तुति सबसे मधुर, सबसे भरपूर, सबसे ताज़ी और सबसे आनन्दमय हो। जिसने यह धन्य भेद सीख लिया है, वह स्वर्ग की सुनहरी कुंजी लिए फिरता है—नहीं, वह तो स्वर्ग को पृथ्वी पर उतार लाया है, और अब उसे स्वर्गदूतों से डाह करने की आवश्यकता नहीं। —मार्क गाय पियर्स
6 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 6डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा करेगा। निर्गमन 14:13। प्रायः ऐसा जान पड़ता है कि परमेश्वर अपनी सन्तानों को ऐसी स्थितियों में रखता है
जो अत्यन्त कठिन होती हैं—वह उन्हें एक ऐसे सँकरे कोने में ले जाता है जिससे निकलने का कोई मार्ग नहीं; वह ऐसी परिस्थिति रचता है जिसकी अनुमति कोई भी मानवीय बुद्धि कभी न देती, यदि पहले से उससे सलाह ली गई होती। वह बादल ही उन्हें वहाँ तक ले जाता है। हो सकता है कि आप भी इसी घड़ी ऐसी ही स्थिति में उलझे हों। यह सचमुच उलझन भरी और अत्यन्त गम्भीर जान पड़ती है; परन्तु यह पूर्णतः ठीक है। इसका परिणाम उसे, जो आपको यहाँ तक ले आया है, पूरी तरह से भी बढ़कर सही सिद्ध करेगा। यह उसके सर्वशक्तिमान अनुग्रह और सामर्थ्य को प्रगट करने का मंच है। वह आपको केवल छुड़ाएगा ही नहीं, वरन ऐसा करते हुए वह आपको ऐसा पाठ सिखाएगा जिसे आप कभी न भूलेंगे, और जिसकी ओर आनेवाले दिनों में बहुत से भजनों और गीतों में आप बार बार लौटेंगे। परमेश्वर ने जैसा किया है ठीक वैसा ही करने के लिये आप उसे कभी पर्याप्त धन्यवाद न दे सकेंगे। —एफ़. बी. मेयर
7 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 7पर अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो। इफिसियों 5:8। संसार में हम जो प्रभाव डालते हैं, वह यीशु मसीह के साथ हमारे सम्बन्ध से उत्पन्न होता है; और यीशु मसीह के साथ हमारा सम्बन्ध हमारे प्रभाव से प्रगट होता है। —संकलित
8 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 7इसलिये अपने प्राणों की भली भाँति चौकसी करना। यहोशू 23:11। (हाशिये का पाठ।) जब तक सोना उस क्वार्ट्ज़ और चट्टान में मिला रहता है जिसमें वह जड़ा हुआ है, तब तक उसे मुद्रा के रूप में काम में नहीं लाया जा सकता। इसी प्रकार आपका प्राण परमेश्वर के लिये तब तक किसी काम का नहीं जब तक उसे पाप, सांसारिकता और स्वार्थ से, जिनमें वह दबा पड़ा है, निकाल न लिया जाए। आत्मा की नया जन्म देनेवाली सामर्थ्य के द्वारा आपको मसीह के लिये अलग किया जाना चाहिए, उसकी मूर्ति और नाम से अंकित किया जाना चाहिए, और एक ईश्वरीय मुद्रा बना दिया जाना चाहिए, जो मनुष्यों के बीच उसकी समानता धारण किए रहे। मसीही, यों कहें, मसीह का चलनेवाला सिक्का है, राज्य की वह मुद्रा जिसके द्वारा खोए हुए संसार के साथ दया और अनुग्रह के बड़े बड़े लेन-देन चलाए जाते हैं। जैसे मुद्रा सोने का प्रतिनिधित्व करती है, वैसे ही मसीही मसीह का प्रतिनिधित्व करता है, और उसकी भली और भावती इच्छा को दर्शाता है। —ए. जे. गॉर्डन
9 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 8जो थोड़े से थोड़े में सच्चा है, वह बहुत में भी सच्चा है। लूका 16:10। जीवन का छोटे से छोटा काम भी उतने ही निश्चय से सबसे ऊँचे उद्देश्य से किया जा सकता है जितना कि सबसे ऊँचा और श्रेष्ठ काम। विश्वासयोग्यता कामों को वैसे ही मापती है जैसे परमेश्वर उन्हें मापता है। सच्ची कर्तव्यनिष्ठा हमारे कर्तव्यों के साथ वैसा ही व्यवहार करती है जैसा परमेश्वर उनके साथ करता है। कर्तव्य कर्तव्य है, विवेक विवेक है, सही सही है, और गलत गलत है, चाहे वे किसी भी आकार के अक्षरों में छपे हों। “बड़ा” और “छोटा” विवेक के शब्दकोश के शब्द नहीं हैं। वह केवल दो शब्द जानता है—सही और गलत। —एलेक्स. मैक्लारेन
10 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 8मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। फिलिप्पियों 4:19। कैसा स्रोत—“परमेश्वर”! कैसा मापदण्ड—“उसका वह धन जो महिमा सहित है”! कैसा माध्यम—“मसीह यीशु”! यह आपका मधुर सौभाग्य है कि आप अपनी सारी घटी को उसके धन के साम्हने रख दें, और उसके धन की उपस्थिति में अपनी घटी को भूल जाएँ। उसका अक्षय भण्डार, उसके हृदय के सम्पूर्ण प्रेम के साथ, आपके लिये खोल दिया गया है; जाइए और विश्वास की निष्कपट सरलता से उसमें से लीजिए, तब आपको कभी किसी सृष्ट प्राणी रूपी धारा की ओर ताकने, या किसी सृष्ट प्राणी रूपी सहारे पर टिकने का अवसर न पड़ेगा। —सी. एच. एम.
11 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 8जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो, तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो। याकूब 1:2। परमेश्वर पर भरोसा रखने से हम घाटे में नहीं रह सकते, क्योंकि विश्वास से उसका आदर होता है, और सबसे अधिक आदर तब होता है जब विश्वास उसके मार्गों और उसके विधान के घने बादल के पीछे उसके प्रेम और सच्चाई को पहचान लेता है। धन्य हैं वे जो इस प्रकार परखे जाते हैं! केवल हम अविश्वास और दोषी विवेक से दूर रहें। तब हम प्रभु की चट्टान और मण्डप में छिप जाएँगे, और जब तक सारी विपत्तियाँ टल न जाएँ, अनन्त प्रेम के पंखों तले शरण पाए रहेंगे। —संकलित
12 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 9धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया। यूहन्ना 20:29। देखी हुई वस्तुएँ छाया मात्र हैं: वास्तविक सार अनदेखी वस्तुओं में पाया जाता है। . . . इसमें सन्देह नहीं कि मसीह में हमारे विश्वास की नींव अनदेखी है; परन्तु उस मीनार की नींव भी तो अनदेखी है, जो वहाँ लहरों के बीच अपना ऊँचा, सीधा रूप उठाए खड़ी है, और उन लहरों पर उद्धार देनेवाला प्रकाश डालती है। ऐसा जान पड़ता है कि वह लुढ़कती हुई तरंगों पर टिकी है; परन्तु उनके नीचे, अदृश्य और अटल, वह ठोस चट्टान है जिस पर वह सुरक्षित खड़ी है; और जब ऊपर आँधी गरजती है, और नीचे तरंगें टकराकर दहाड़ती हैं, तब भी मैं उस अकेली समुद्री मीनार में शान्ति से सो सकता हूँ। चट्टान पर नेव डाली हुई, और रेतीले, लहरों से पिटते हुए किनारे पर खड़े सबसे शानदार महल से भी अधिक सुरक्षित, वह हिलाई नहीं जा सकती। तो युगों की चट्टान तो और भी कम हिलाई जा सकती है! जो उस पर भरोसा रखता है, वह मृत्यु के योग्य है, न्याय के लिये तैयार है, अन्तिम दिन की बजनेवाली तुरही के लिये तत्पर है, क्योंकि “यहोवा अपने दासों का प्राण मोल लेकर बचा लेता है; और जितने उसके शरणागत हैं उनमें से कोई भी दोषी न ठहरेगा।” —गथरी
13 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 9मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ। यूहन्ना 15:8। कैसी सम्भावना, कैसी प्रेरणा, कि हम “अपने पिता” की महिमा को बढ़ा सकते हैं! इस विचार से हमारे हृदय उछल पड़ते हैं। यह कैसे हो सकता है? “पत्ते” लाने से—उसके प्रति प्रेम का अंगीकार मात्र करने से? नहीं। कुछ फल लाने से? नहीं। “कि तुम बहुत सा फल लाओ।” उपज की बहुतायत में ही किसान का आनन्द और उसकी महिमा है। इसलिये हमें असाधारण, “सौ गुना” फल लानेवाले मसीही बनने का लक्ष्य रखना चाहिए, और सबसे बड़ी उपज से कम किसी बात से सन्तुष्ट न होना चाहिए। हमारा जीवन भले कामों से भरा होना चाहिए। तब कटनी के समय हम कह सकेंगे, “हे पिता, मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है!” —डब्ल्यू. जेनिंग्स
14 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 9प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूँगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूँगा। भजन संहिता 145:2।
एक बहुत सुन्दर चिह्न है जिसके द्वारा जापानी लोग अपने मित्रों के प्रति अपनी शुभकामनाएँ प्रगट किया करते हैं। वह एक ढोल की आकृति है जिसमें पक्षियों ने अपना घोंसला बना लिया है। इसके विषय में यह कहानी कही जाती है कि एक समय एक भला राजा था, जिसे अपनी प्रजा के कल्याण की ऐसी गहरी चिन्ता थी कि उसने महल के फाटक पर एक ढोल रखवा दिया, कि जिस किसी के साथ कोई अन्याय हुआ हो जिसका निवारण होना हो, या जिसे किसी वस्तु की घटी हो, वह उस ढोल को बजाए, और राजा तुरन्त, दिन हो या रात, उस विनती करनेवाले से भेंट करेगा और उसे राहत पहुँचाएगा। परन्तु सारे देश में ऐसी समृद्धि और सन्तोष छाया रहा कि किसी को किसी बात के लिये गुहार लगाने की आवश्यकता ही न पड़ी, और पक्षियों ने उस ढोल के भीतर अपने घोंसले बना लिये और उसे अपने गीतों के संगीत से भर दिया। ऐसा ही अनुग्रहपूर्ण प्रवेश स्वर्ग के राजा के द्वारा भी हमें दिया गया है, और दिन-रात उसका तत्परता से सुनना और उसकी सहायता उन सब की पहुँच में है जो उसके पास आते हैं; परन्तु सब मनुष्यों में सबसे धन्य वे हैं जिन्होंने पृथ्वी पर ही ऐसी धन्यता पा ली है जिसमें सारी घटी भुला दी जाती है, और भरोसा पिता की देखरेख में अपनी सुरक्षा के विषय में ऐसा निश्चिन्त रहता है कि प्रार्थना निरन्तर स्तुति को स्थान दे देती है। वे प्रभु में सदा आनन्दित रहते हैं।—मार्क गाय पियर्स
15 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 10वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।—यशायाह 40:31। हे मेरे प्राण, तेरे अस्तित्व की विजय यही है—परमेश्वर के साथ चल पाना! उड़ान तो नवयुवक प्राण की होती है; वह धर्म का रोमांच है। बिना थके दौड़ना उन्नत प्राण का होता है; वह धर्म की सुन्दरता है। परन्तु चलना और थकित न होना सिद्ध प्राण का होता है; वह धर्म की सामर्थ्य है। क्या तू मनुष्यों की मैली सड़कों में से होकर श्वेत वस्त्र पहिने चल सकता है? क्या तू पृथ्वी के नीच और अशुद्ध लोगों को छूकर भी अपने वस्त्र निर्मल रख सकता है? क्या तू पापियों के सम्पर्क में आकर भी स्वयं निष्कलंक रह सकता है? तो तू ने उकाब की उड़ान को भी पीछे छोड़ दिया है! —जॉर्ज मैथेसन
16 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 11और मूसा पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात रहा। निर्गमन 24:18। परमेश्वर के साथ संगति का जीवन एक दिन में नहीं बन सकता। वह घड़ी-घड़ी हर बात को आदतन उसके पास ले जाने से आरम्भ होता है, जैसा मूसा ने मिस्र में किया। परन्तु वह आगे बढ़कर सहभागिता के अधिक और लम्बे समयों तक पहुँचता है; और मध्यस्थता, प्रतीक्षा और पवित्र सहवास के दिनों और रातों में अपनी पूर्णता और परमानन्द पाता है। —एफ़. बी. मेयर
17 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 11एलीशा ने कहा, हे यहोवा, मैं तुझ से विनती करता हूँ, इसकी आँखें खोल दे कि यह देख सके। 2 राजाओं 6:17। यही वह प्रार्थना है जो हमें अपने लिये और एक दूसरे के लिये करनी चाहिए, “हे प्रभु, हमारी आँखें खोल दे कि हम देख सकें”; क्योंकि हमारे चारों ओर का संसार भी, भविष्यद्वक्ता के चारों ओर के संसार के समान, परमेश्वर के घोड़ों और रथों से भरा है, जो हमें महिमामय विजय के स्थानों तक ले जाने के लिये प्रतीक्षा कर रहे हैं। और जब हमारी आँखें इस प्रकार खुल जाएँगी, तब हम जीवन की सब घटनाओं में, चाहे वे बड़ी हों या छोटी, आनन्ददायक हों या दुःखदायक, अपने प्राणों के लिये एक “रथ” देखेंगे। जो कुछ भी हमारे पास आता है, जिस क्षण हम उसे रथ मानकर उससे व्यवहार करते हैं, उसी क्षण वह रथ बन जाता है; और दूसरी ओर, छोटी से छोटी परीक्षाएँ भी, यदि हम उन्हें वैसा समझें, तो जगन्नाथ का रथ बन सकती हैं जो हमें कुचलकर दुःख या निराशा में डाल दे। यह हम में से हर एक पर निर्भर है कि हम चुनें कि वे क्या बनेंगी। यह सब इस पर निर्भर नहीं कि ये घटनाएँ क्या हैं, परन्तु इस पर कि हम उन्हें किस प्रकार लेते हैं। यदि हम उनके नीचे लेट जाएँ, और उन्हें अपने ऊपर से लुढ़कने और हमें कुचलने दें, तो वे जगन्नाथ के रथ बन जाती हैं; परन्तु यदि हम उन पर चढ़ जाएँ, जैसे किसी विजय-रथ पर, और उनसे अपने आप को विजयपूर्वक आगे और ऊपर ले चलवाएँ, तो वे परमेश्वर के रथ बन जाती हैं। —स्मिथ
18 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 11जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं। रोमियों 8:28। एक हज़ार परीक्षाओं में से केवल पाँच सौ ही नहीं
जो विश्वासी की भलाई के लिये काम करती हैं, वरन उनमें से नौ सौ निन्यानवे, और उनके साथ एक और भी।—जॉर्ज मूलर
19 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 12तू हारून के लिये पवित्र वस्त्र बनवाना। निर्गमन 28:2। क्या हमारे पास नीले और बैंजनी और सुन्दर अर्थ-भरे वस्त्र नहीं हैं? हमारे पास स्तुतिरूपी वस्त्र हैं; हम प्रभु यीशु को पहिने हुए हैं। और क्या हमारे पास आभूषण नहीं हैं? नम्र और शान्त आत्मा का आभूषण परमेश्वर की दृष्टि में बहुमूल्य है। और क्या हमारे पास सोने की घंटियाँ नहीं हैं? हमारे पास पवित्र कामों की सोने की घंटियाँ हैं। हमारे वचन घंटियाँ हैं, हमारे काम घंटियाँ हैं, हमारे उद्देश्य घंटियाँ हैं। हम जहाँ कहीं भी चलते हैं, हमारी गति इस प्रकार पवित्र स्थानों, पवित्र कामों और पवित्र चरित्र की ओर की गति समझी जाती है। —जोसेफ़ पार्कर
20 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 12हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, भोर को मैं अपनी प्रार्थना तेरी ओर लगाऊँगा, और ऊपर ताकता रहूँगा। भजन संहिता 5:3। भोर दिन का फाटक है, और प्रार्थना के द्वारा उसकी भली भाँति रखवाली की जानी चाहिए। यह उस धागे का एक सिरा है जिसमें दिन के काम पिरोए जाते हैं, और इसे भक्ति की गाँठ से भली भाँति बाँधा जाना चाहिए। यदि हम जीवन की गरिमा का अधिक अनुभव करते, तो हम उसकी भोर के विषय में अधिक सावधान रहते। जो अपने बिछौने से उठते ही अपने काम-धन्धे की ओर दौड़ पड़ता है और आराधना के लिये नहीं ठहरता, वह वैसा ही मूर्ख है मानो उसने अपने कपड़े न पहिने हों, या अपना मुँह न धोया हो; और वैसा ही नासमझ है मानो वह बिना हथियार या कवच के युद्ध में कूद पड़ा हो। हमारा भाग यह हो कि जंगल की तपन और मार्ग का बोझ हमें सताने लगें, उससे पहले ही हम परमेश्वर के साथ सहभागिता की धीरे धीरे बहती नदी में स्नान कर लें। —स्पर्जन
21 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 12हे यहोवा, अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। भजन संहिता 25:4। एक ऐसा मार्ग है जिस पर परमेश्वर की हर एक सन्तान को चलना है, और केवल उसी मार्ग पर परमेश्वर उसके साथ चल सकता है। —डेनहम स्मिथ
22 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 13सो परमेश्वर के लोगों के लिये विश्राम बाकी है। इब्रानियों 4:9। नये यरूशलेम की मीनारों से मृत्यु के जल के पार तैरकर आती हुई इस पहली स्वर्गीय घंटा-ध्वनि का संगीत कितना मधुर है! हे यात्री, जो अपनी लम्बी और कठिन तीर्थयात्रा में थककर मूर्च्छित हो रहे हो, इसे सुनो! यह विश्राम है। हे सैनिक, जो अब तक युद्ध का लहू और धूल अपने ऊपर लिये फिरते हो, इसे सुनो! यह विश्राम है। हे समुद्र-यात्री, जो पाप और दुःख की लहरों पर उछाले जाते हो, और संसार के उथल-पुथल भरे परिवर्तनों के महासागर पर इधर-उधर धकेले जाते हो, इसे सुनो! बन्दरगाह दिखाई दे रहा है; जो लहरें तुम पर टूट रही हैं वे भी मानो धीमे स्वर में कह रही हैं, “वह अपने प्रिय को यों ही विश्राम देता है।” यह अस्तित्व की वह लम्बी आह है जिसका अन्त में उत्तर मिल गया है। पृथ्वी के लम्बे खिंचे सप्ताह का परिश्रम और कष्ट समाप्त हो गया है। उसके अखण्ड सब्त की शान्ति आरम्भ हो गई है। मनुष्य, थका-माँदा मनुष्य, अन्ततः अपने परमेश्वर की गोद में वह विश्राम पा गया है जिसे वह बहुत दिनों से खोज रहा था! —मैकडफ़
23 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 13उसकी छाया में। श्रेष्ठगीत 2:3। फ़्रांसिस रिडले हैवरगल कहती हैं: मुझे इससे चार चित्र सूझते जान पड़ते हैं: थकानेवाले मैदान में एक चट्टान की छाया के नीचे; एक वृक्ष की छाया के नीचे; और भी निकट, उसके पंख की छाया के नीचे; सबसे निकट और सबसे समीप, उसके हाथ की छाया में। निश्चय ही वह हाथ छेदा हुआ हाथ होगा, जो कभी-कभी हमें बहुत कठोरता से दबा सकता है, और फिर भी सदा हमें घेरे रहता, सम्भाले रहता और छाया किए रहता है!
24 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 13उसके ढंग से ऐसा जान पड़ा, कि वह आगे बढ़ना चाहता है। लूका 24:28। क्या परमेश्वर सदा इसी प्रकार व्यवहार नहीं करता? वह अपने पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे पास आता है, जैसे वह उन दो चेलों के पास आया था। वह सुसमाचार के प्रचार के द्वारा, परमेश्वर के वचन के द्वारा, अनुग्रह के नाना प्रकार के साधनों के द्वारा और जीवन की उन परिस्थितियों के द्वारा जो उसके विधान से आती हैं, हम से बातें करता है; और इस प्रकार बातें करने के बाद वह ऐसा ढंग दिखाता है मानो आगे बढ़ जाना चाहता हो। यदि कान उसकी वाणी के लिये और
हृदय उसके आत्मा के लिये खुल जाए, तो यह प्रार्थना ऊपर उठेगी, “हे प्रभु, मेरे साथ रह।” परन्तु यदि उस वाणी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, तो वह आगे बढ़ जाता है, जैसा वह हज़ारों बार कर चुका है, और हर बार हृदय को पहले से अधिक कठोर, और कान को आत्मा की पुकार के प्रति पहले से अधिक बन्द छोड़ जाता है। —एफ़. व्हिटफ़ील्ड
25 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 14मेरा परमेश्वर मेरा बल है। यशायाह 49:5। ओह, सहज जीवन के लिये प्रार्थना न कीजिए! अधिक बलवन्त मनुष्य बनने के लिये प्रार्थना कीजिए! अपनी शक्तियों के बराबर कामों के लिये प्रार्थना न कीजिए; अपने कामों के बराबर शक्तियों के लिये प्रार्थना कीजिए! तब आपका काम करना कोई आश्चर्यकर्म न होगा। परन्तु आप स्वयं एक आश्चर्यकर्म होंगे। हर दिन आप अपने आप पर, उस जीवन की समृद्धि पर जो परमेश्वर के अनुग्रह से आप में आई है, अचम्भा करेंगे। —फ़िलिप्स ब्रुक्स
26 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 14लज्जा की कुछ चिन्ता न करके। इब्रानियों 12:2। और यह कैसे किया जाए? दो प्रकार से। पहाड़ पर चढ़ जाइए, तो मैदान की वस्तुएँ बहुत छोटी दिखाई देंगी; आप जितना ऊँचा चढ़ेंगे, वे उतनी ही तुच्छ जान पड़ेंगी। परमेश्वर के साथ संगति रखिए, तो यहाँ के धमकानेवाले शत्रु बहुत, बहुत ही कम भयानक जान पड़ेंगे। दूसरा उपाय यह है कि परदा उठाइए और उसके पीछे जो है उसे निहारिए। आल्प्स के किसी पहाड़ी देश की तलहटी में फैली नीची पहाड़ियाँ मैदान से देखने पर तब तक ऊँची दिखाई दे सकती हैं, जब तक बर्फ़ीली चोटियाँ कोहरे में लिपटी रहती हैं; परन्तु जब हवा का एक छोटा-सा झोंका आकर ऊँची चोटियों पर से कोहरे को हटा देता है, तब कोई भी सामने की छोटी हरी पहाड़ियों की ओर नहीं देखता। इसी प्रकार संसार की बाधाएँ और संसार की कठिनाइयाँ और चिन्ताएँ तब तक बहुत ऊँची दिखाई देती हैं, जब तक बादल नहीं छँटता। परन्तु जब हम बड़ी बड़ी श्वेत चोटियों को देख लेते हैं, तब उनसे नीचे की हर वस्तु आख़िरकार उतनी ऊँची नहीं लगती। यीशु की ओर ताकिए, तो कठिनाइयाँ बौनी हो जाएँगी।—एलेक्स. मैक्लारेन
27 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 14क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते? यूहन्ना 11:9। किसी मसीही का यहाँ होना, और
स्वर्ग में न होना, इसी बात का प्रमाण है कि कोई काम उसकी बाट जोह रहा है।
28 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 15जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है। मत्ती 26:39। जिनकी इच्छाएँ परमेश्वर की इच्छा में गाड़ दी गई हैं, उनके लिये कोई निराशा नहीं होती। —फ़ेबर
29 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 15जीवते परमेश्वर। दानिय्येल 6:20। पवित्रशास्त्र में हम यह अभिव्यक्ति कितनी ही बार पाते हैं, और फिर भी ठीक यही बात है जिसे हम भूल जाने के लिये इतने प्रवृत्त रहते हैं! हम जानते हैं कि लिखा है “जीवते परमेश्वर”; परन्तु अपने दैनिक जीवन में शायद ही कोई बात ऐसी हो जिसे हम व्यवहार में इतना अधिक भूल जाते हों जितना इस सत्य को कि परमेश्वर जीवता परमेश्वर है; कि वह अब भी वही है जो वह तीन या चार हज़ार वर्ष पहले था; कि उसके पास वही प्रभुतापूर्ण सामर्थ्य है, और जो उससे प्रेम रखते और उसकी सेवा करते हैं उनके प्रति वही उद्धार करनेवाला प्रेम है जो उसके पास सदा से था; और कि वह उनके लिये अब भी वही करेगा जो उसने दो, तीन, चार हज़ार वर्ष पहले दूसरों के लिये किया, केवल इसलिये कि वह जीवता परमेश्वर, वह न बदलनेवाला है। ओह, इसलिये हमें उस पर कितना भरोसा रखना चाहिए, और अपने सबसे अन्धकारमय क्षणों में भी इस सत्य को कभी न भूलना चाहिए कि वह अब भी जीवता परमेश्वर है और सदा रहेगा!—जॉर्ज मूलर
30 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 15सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। रोमियों 6:4। यही वह जीवन है जिसे जीने के लिये हम बुलाए गए हैं, और यही वह जीवन है जिसे बिताना हमारा सौभाग्य है; क्योंकि परमेश्वर हमें कभी कोई ऐसी बुलाहट नहीं देता जो साथ ही सौभाग्य न हो, और वह हमें कभी और ऊपर आने का सौभाग्य नहीं देता जब तक कि हमें ऊपर उठाने के लिये अपना हाथ भी हमारी ओर न बढ़ाए। पुनरुत्थान के जीवन की वास्तविकताओं और महिमाओं में और ऊपर, और ऊपर आइए, यह जानते हुए कि आपका जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। हर एक बोझ को झटककर अपने से अलग कर दीजिए, हर एक अशुद्धता से मुँह मोड़ लीजिए, अपने
आप को कुम्हार के हाथों में मिट्टी के समान सौंप दीजिए, ताकि वह आप पर अपनी पुनरुत्थान-महिमा की परिपूर्णता की छाप लगा दे, कि आप दर्पण में प्रभु की महिमा को देखते हुए प्रभु के आत्मा के द्वारा महिमा से महिमा में बदलते जाएँ।—डब्ल्यू. हे एटकिन
31 जनवरी
मुद्रित पृष्ठ 16मसीह सब कुछ और सब में है। कुलुस्सियों 3:11। मसीह की सेवा मेरे जीवन का काम है। मसीह की इच्छा मेरे जीवन की व्यवस्था है। मसीह की उपस्थिति मेरे जीवन का आनन्द है। मसीह की महिमा मेरे जीवन का मुकुट है। —संकलित
