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1 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 98यीशु के पाँवों के पास। लूका 10:39। यीशु के पाँवों के पास—यही हमारे विशेषाधिकार और आशीष का स्थान है, और यहीं हमें जीवन के व्यावहारिक कर्तव्यों के लिये शिक्षा पानी और योग्य बनना है। यहीं, उसकी बाट जोहते हुए, हमें नया बल प्राप्त करना है, और उकाबों के समान पंख फैलाकर ऊपर उठना सीखना है; और यहीं हमें वह सच्चा ज्ञान प्राप्त होना है जो सामर्थ है। यहीं हमें सीखना है कि सच्चा काम कैसे किया जाता है, और उसे करने के लिये सच्ची प्रेरक शक्ति से सुसज्जित होना है। यहीं हमें काम की परीक्षाओं के बीच—और वे थोड़ी नहीं हैं—और साधारण जीवन की परीक्षाओं के बीच भी सान्त्वना पानी है; और यहीं हमें पृथ्वी के दिनों के बीच स्वर्ग के आनन्द का कुछ पूर्वस्वाद पाना है; क्योंकि उसके पाँवों के पास बैठना सचमुच स्वर्गीय स्थानों में होना है, और उसकी महिमा को निहारना वह करना है जिससे हम वहाँ कभी नहीं थकेंगे।— डब्ल्यू. हे एटकिन
2 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 98परमेश्वर प्रेम है; और जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है, और परमेश्वर उस में बना रहता है। यूहन्ना 4:16।
परमेश्वर प्रेम है; और यह सोचना जितना सच है उतना ही अच्छा भी है कि जैसे पृथ्वी को छूनेवाली सूर्य की हर किरण के दूसरे छोर पर सूर्य होता है, वैसे ही परमेश्वर की पृथ्वी पर प्रेम के हर कण के दूसरे छोर पर परमेश्वर है। मार्क गाय पियर्स।
3 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 99उन्होंने उनको पहचाना कि ये यीशु के साथ रहे हैं। प्रेरितों के काम 4:13। एक मसीही को यीशु मसीह की हूबहू छवि होना चाहिए। आपने मसीह के जीवन-चरित पढ़े हैं, जो सुन्दरता और वाक्पटुता से लिखे गए हैं; परन्तु मसीह का सबसे उत्तम जीवन-चरित उसकी जीवित जीवनी है, जो उसके लोगों के वचनों और कामों में लिखी जाती है। यदि हम वही होते जिसका हम दावा करते हैं, और जो हमें होना चाहिए, तो हम मसीह के चित्र होते; हाँ, उसकी ऐसी हूबहू छवियाँ कि संसार को हमें घण्टों तक थामे रहकर यह न कहना पड़ता, “हाँ, इसमें कुछ-कुछ समानता तो दिखती है”; परन्तु वे हमें एक बार देखते ही पुकार उठते, “यह यीशु के साथ रहा है; इसने उससे शिक्षा पाई है; यह उसके समान है; इसने नासरत के उस पवित्र मनुष्य के विचार को ठीक-ठीक पकड़ लिया है, और उसे अपने जीवन और प्रतिदिन के कामों में पूरा करता है।” स्पर्जन।
4 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 99मत डर; केवल विश्वास रख। मरकुस 5:36। यदि आपके स्वर्गीय जीवन में कठिनाइयाँ और परीक्षाएँ आपको घेरे हुए हैं, तो निराश न होइए। हो सकता है कि परमेश्वर ने उन्हें जान-बूझकर वहाँ रखा हो, ताकि विश्वास की और ऊँची उन्नति के लिये आपको प्रशिक्षित और अनुशासित करे। यदि वह आपको “खेते-खेते कष्ट उठाने” के लिये बुलाता है, तो सम्भव है कि वह आपको और भी मज़बूत नाविक बनाना चाहता हो, आपको इस ओर ले जाना चाहता हो कि आप ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधा करें, और सबसे बढ़कर, आपको उस पर और भी पवित्र भरोसा रखने की ओर धकेलना चाहता हो, जिसके हाथ में नाव और उसका भविष्य है, और जो घिरते हुए बादलों, अन्धकारमय क्षितिज और झागदार लहरों के बीच हमारी शंकाओं को सदा यह कोमल झिड़की देता रहता है—“क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी?”—मैकडफ़
5 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 100देख, क्या ही धन्य वह मनुष्य है जिसको परमेश्वर ताड़ना देता है। अय्यूब 5:17। धन्य, क्योंकि वह ताड़ना इसलिये ठहराई गई है कि उसे आशीष और शान्ति के मार्गों में ले आए। धन्य, क्योंकि उसमें कोई अनावश्यक कठोरता नहीं है। धन्य, क्योंकि वह ताड़ना इतनी हमारे विरुद्ध नहीं जितनी हमारे सबसे क्रूर शत्रुओं—हमारे पापों—के विरुद्ध है। धन्य, क्योंकि हमारे पास सान्त्वना के भरपूर वचन हैं। धन्य, क्योंकि प्रभु जिससे प्रेम करता है, उसकी ताड़ना भी करता है। धन्य, क्योंकि हमारा हलका-सा क्लेश पल भर का ही है। जॉर्ज बोवेन।
6 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 100उस तारे को देखकर वे अति आनन्दित हुए। मत्ती 2:10। हम जो यीशु को ढूँढ़ते हैं, हमें आनन्दित रहना चाहिए; जब हम ऐसे दिखाई देते हैं मानो उसकी कब्र ढूँढ़ रहे हों, तो इससे हमारे प्रभु की कोई प्रतिष्ठा नहीं होती। मसीह के अनुयायियों के उदास चेहरों ने संसार की दृष्टि में उसकी हानि की है। तो आइए, हम मुस्कराते हुए चलें, क्योंकि यदि हम ऊपर देखें और अपने आप को सही मार्ग पर रखें, तो तारा हमारे पास है। टॉमस चैम्पनेस।
7 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 100जब मैं अन्धकार में पड़ूँगा, तब भी यहोवा मेरे लिये ज्योति का काम देगा। मीका 7:8। यदि आप तर्क के प्रकाश के बदले विश्वास के प्रत्यक्ष अन्धकार को चुनने के लिये तैयार हैं, तो परमेश्वर के वचन से आप पर अद्भुत ज्योति चमक उठेगी। —ए. जे. गॉर्डन
8 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 100तब मैं (दानिय्येल) अकेला रह गया और यह बड़ा दर्शन देखा। दानिय्येल 10:8। एकान्त परमेश्वर का बाहरी कक्ष है; बस एक कदम
और, और आप उसकी प्रत्यक्ष उपस्थिति में हो सकते हैं।
9 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 101आओ, भोजन करो। यूहन्ना 21:12। आज सुबह हमारे प्राणों के प्रियतम का स्वर हमें अपना निमन्त्रण देते हुए सुनाई देता है। वह पूछता है, “हे बालको, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को है?” हम उत्तर देते हैं, “नहीं; अपने आप में तो हमारे पास भूख और भुखमरी के सिवा कुछ नहीं। हे परमेश्वर, हम अपना पेट आप नहीं भर सकते!” तब उसका अपना मधुर स्वर उत्तर देता है, “आओ, भोजन करो!” डब्ल्यू. हे एटकिन।
10 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 101हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है! यहेजकेल 37:3। यह विश्वास का उत्तर है। “तू ही जानता है!”—हृदय के विश्राम करने के लिये कैसा तकिया है! “तू ही जानता है!”—हृदय की कठिनाइयों और उलझनों और परीक्षाओं को समेटने और व्यक्त करने के लिये कैसे थोड़े पर व्यापक शब्द हैं! “तू ही जानता है!”—जीवन की उथल-पुथल भरी लहरों के बीच; ऐसे समुद्र के बीच जो कोई शान्ति नहीं जानता; ऐसे दृश्य के बीच जिसमें इधर-उधर उछाले जाना ही हर घड़ी का इतिहास है—कैसा अवर्णनीय मधुर विश्राम-स्थान! इनमें हर उस हृदय के लिये कैसा उत्तर है जो अपनी बड़ी-बड़ी भावनाओं को व्यक्त करने के लिये शब्द नहीं पाता; उस हृदय के लिये जिसके दुःख इतने गहरे हैं कि भाषा परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग नहीं पाती! काश, ये शब्द हमारे मार्ग की हर कठिनाई के उत्तर के रूप में सदा प्राण में सबसे ऊपर रहें! ये हर उस बात के लिये परमेश्वर का उत्तर हैं जिसकी थाह हम नहीं पा सकते; परमेश्वर का उत्तर, जिस पर हमारे हृदय टिकें और जिसे हमारे होंठ कहें, जब हर मार्ग ऐसा रुँध जाए कि हम आगे न बढ़ सकें। “हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है!” हे विश्वासी, यहीं विश्राम कीजिए। अपने प्राण को इन शब्दों पर टिका दीजिए। अपने परमेश्वर की गोद में शान्ति से विश्राम कीजिए, और इन शब्दों को जीवन के हर दृश्य में अपने साथ ले चलिए। “हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है।”—एफ़. व्हिटफ़ील्ड
11 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 102देखो, एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुँचा है। उत्पत्ति 28:12। उस रहस्यमय सीढ़ी के विषय में सोचिए, जो परमेश्वर के सिंहासन से उतरकर उस स्थान तक आती है, चाहे वह कितना ही दीन क्यों न हो, जहाँ आप हों। वह कोई बंजर पहाड़ी मैदान हो सकता है; कोई दीन झोंपड़ी; किसी जहाज़ का केबिन; किसी बसनेवाले की कुटिया; पीड़ा की खाट; परन्तु यीशु मसीह आपको ढूँढ़ निकालता है, और ठीक वहीं आता है जहाँ आप हैं। इस सीढ़ी का एक डंडा उसके ईश्वरत्व का सोना है; दूसरा उसकी मनुष्यता की चाँदी है; उसके पायदान वे घटनाएँ हैं जो बैतलहम की चरनी से लेकर सामर्थ के दाहिने हाथ तक, जहाँ वह बैठा है, एक के बाद एक घटीं। वह सीढ़ी आपके लिये आशीषों के बोझ से झूल रही है। काश, आप अपने पाप, और चिन्ता, और भय के बोझों को प्रार्थना और विश्वास के ऊपर चढ़नेवाले स्वर्गदूतों के हाथ भेज दें!—ताकि आप अपने हृदय में शान्ति, और आनन्द, और प्रेम, और महिमा के झुण्ड के झुण्ड उतरते स्वर्गदूतों को ग्रहण कर सकें। एफ़. बी. मेयर
12 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 102निश्चय इस स्थान में यहोवा है, और मैं इस बात को न जानता था। उत्पत्ति 28:16। कठोर तपस्वी पल्ली-पुरोहित ऊँचे गिरजाघर के शिखर पर चढ़ गया, कि परमेश्वर के निकट हो, और उसका वचन नीचे लोगों तक पहुँचा सके। और उपदेश की पाण्डुलिपि में वह प्रतिदिन वह लिखता जो उसे लगता कि स्वर्ग से भेजा गया है; और सात में से एक दिन वह उसे दो बार लोगों के सिरों पर नीचे गिरा देता। उसके बुढ़ापे में परमेश्वर ने कहा, “नीचे आ और मर।” और उसने शिखर पर से पुकारा: “हे प्रभु, तू कहाँ है?” और प्रभु ने उत्तर दिया: “यहाँ नीचे, अपने लोगों के बीच।” संकलित।
13 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 102अब, हे इस्राएल, जो जो विधि और नियम मैं तुम्हें सिखाना चाहता हूँ उन्हें सुन लो, और उन पर चलो; जिस से तुम जीवित रहो, और जो देश तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उस में जाकर उसके अधिकारी हो जाओ। व्यवस्थाविवरण 4:1। “सुन लो” और “चलो”, जिस से तुम “जीवित रहो” और “अधिकारी हो जाओ।” यह एक सार्वभौमिक और स्थायी सिद्धान्त है। यह
इस्राएल के लिये सच था, और हमारे लिये भी सच है। जीवन का मार्ग और अधिकार पाने का सच्चा रहस्य परमेश्वर की पवित्र आज्ञाओं का सीधा-सादा पालन है। हम इसे सारे प्रेरित ग्रन्थ में, आरम्भ से अन्त तक, देखते हैं। परमेश्वर ने हमें अपना वचन इसलिये नहीं दिया कि हम उस पर अटकलें लगाएँ या वाद-विवाद करें, परन्तु इसलिये कि हम उसका पालन करें। और जब हम अनुग्रह के द्वारा अपने पिता की विधियों और नियमों का हार्दिक और आनन्दपूर्ण पालन करते हैं, तभी हम जीवन के उज्ज्वल मार्ग पर चलते हैं, और उस सब की वास्तविकता में प्रवेश करते हैं जो परमेश्वर ने मसीह में हमारे लिये संचित कर रखा है।—सी. एच. एम.
14 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 103अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है; और मैं शरीर में अब जो जीवित हूँ तो केवल उस विश्वास से जीवित हूँ जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया और मेरे लिये अपने आप को दे दिया। गलातियों 2:20। जो मनुष्य परमेश्वर में जीता है, वह परमेश्वर के जीवन के सिवा और कोई जीवन नहीं जानता। फ़िलिप्स ब्रुक्स।
15 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 103पर हम जो दिन के हैं, विश्वास और प्रेम की झिलम पहिनकर और उद्धार की आशा का टोप पहिनकर सावधान रहें। 1 थिस्सलुनीकियों 5:8। विश्वास, प्रेम, आशा—ये तीनों मिलकर वह रक्षात्मक कवच बनाते हैं जो प्राण की रक्षा करता है; और ये तीनों ही आत्म-संयम को सम्भव बनाते हैं। जैसे गोताखोर अपनी विशेष पोशाक में उफनते, दूर-दूर तक लहराते महासागर की तली तक उतारा जाता है, वैसे ही जिस मनुष्य का हृदय विश्वास और प्रेम से कसा हुआ है, और जिसका सिर आशा के टोप से ढका है, वह परीक्षा और सांसारिकता के सबसे प्रचण्ड समुद्र में उतारा जा सकता है, और फिर भी उसकी गहराइयों के बीच से सूखा और सुरक्षित चलता रहेगा, और उस हवा में साँस लेगा जो बेचैन लहरों के ऊपर के लोक से आती है। विश्वास आपको परमेश्वर की सारी सामर्थ के साथ सम्पर्क में ले आएगा। प्रेम आपको ऐसे क्षेत्र में ले जाएगा जहाँ आपके चारों ओर की सारी परीक्षाएँ मानो इथुरियल के भाले से छू दी जाएँगी, और अपनी घिनौनी असलियत प्रगट कर देंगी। और आशा आपकी आँखों को चारों ओर के लुभानेवाले वैभव को देखने से हटाकर ऊपर की महिमाओं पर लगा देगी। और इस प्रकार लगाम एक बिलकुल नई रीति से आपके हाथों में आ जाएगी, और आप अपने स्वभाव पर
ऐसी रीति से राजा बनकर राज्य कर सकेंगे जिसकी आपने पहले कभी कल्पना भी न की थी, बशर्ते आप केवल मसीह पर भरोसा रखें और उससे प्रेम करें, और अपनी अभिलाषाओं को ऊपर की वस्तुओं पर लगाएँ। तब आप अपने ऊपर शासन कर सकेंगे, जब आप मसीह को अपने ऊपर शासन करने देंगे। एलेक्ज़ेंडर मैक्लैरन।
16 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 104हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा। यशायाह 40:8। परमेश्वर का वचन जीवन का जल है; तुम उसे जितना अधिक उलीचते हो, वह उतना ही ताज़ा बहता है। वह परमेश्वर की महिमा की आग है; तुम उसे जितना अधिक फूँकते हो, वह उतनी ही उजली जलती है। वह प्रभु के खेत का अन्न है; तुम उसे जितना अच्छा पीसते हो, वह उतना ही अधिक देता है। वह स्वर्ग की रोटी है; वह जितनी अधिक तोड़ी और बाँटी जाती है, उतनी ही अधिक बची रहती है। वह आत्मा की तलवार है; वह जितनी अधिक माँजी जाती है, उतनी ही अधिक चमकती है। बिशप ज्युएल
17 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 104तेरे सुख के समय मैं ने तुझ से बात की थी। यिर्मयाह 22:21। जब हम दूर तक देखना चाहते हैं, तो दिन के तेज़ प्रकाश की चकाचौंध को रोकने के लिये अपनी आँखों पर हाथ की छाया कर लेते हैं। इसी प्रकार परमेश्वर मानो हमारी भौंहों पर अपना हाथ रखता है, और समृद्धि की चमक को मन्द कर देता है, ताकि हम उसकी भलाई के और व्यापक रूपों को देख सकें। यह एक सामान्य अनुभव है कि किसी व्यक्तिगत क्लेश के अन्धकार में से बाहर देखते हुए, मनुष्यों ने पहली बार पृथ्वी के धरातल से परे देखा है, और बिउला देश की झलकें पाई हैं। आइए, हम उस हाथ से पीछे न हटें जिसके विषय में हम जानते हैं कि वह केवल आशीष से ही भारी है। लुडलो।
18 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 104निश्चय वह तुझे बहेलिये के जाल से बचाएगा। भजन संहिता 91:3। वह तुझे बहेलिये के जाल से बचाएगा। अर्थात् छोटी-छोटी बातों से, उन छिपे हुए फन्दों और जालों से जो हमारे लिये बिछाए गए हैं। बड़े पाप डराते हैं, जबकि छोटे फन्दे उलझा लेते हैं। शिकारी के तीर से बच निकलना धूर्त चारे से बचने की अपेक्षा सहज है। और वे कहाँ नहीं बिछाए गए? धन और दरिद्रता,
रोग और स्वास्थ्य, समृद्धि और विपत्ति, मित्रता और अकेलापन, काम और काम का अभाव—हर एक का अपना फन्दा है, जिसमें न केवल असावधान लोग पकड़े जाते हैं, वरन बुद्धिमान और चौकस लोग भी कभी-कभी शिकार बन जाते हैं। छोटी बातें, केवल धागे, जिनसे बचने का यत्न करना भी शायद ही आवश्यक लगे—फिर भी वे हमें जकड़ने और रोकने के लिये पर्याप्त मज़बूत हैं, और हमारे विनाश का आरम्भ हो सकती हैं। मार्क गाय पियर्स।
19 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 105यहोवा ने कैन के लिये एक चिन्ह ठहराया। उत्पत्ति 4:15। हम कैन के चिन्ह की ऐसी चर्चा करते हैं मानो वह शाप का चिन्ह हो। वास्तव में वह परमेश्वर की दया का चिन्ह था, उसके शत्रुओं से उसकी रक्षा। डी. जे. बरेल।
20 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 105तुम में से कौन है जो यहोवा का भय मानता . . . है, जो अन्धियारे में चलता हो और उसके पास ज्योति न हो? वह यहोवा के नाम का भरोसा रखे, और अपने परमेश्वर पर आशा लगाए रहे। यशायाह 50:10। एक बूढ़े नाविक ने कहा, “प्रचण्ड आँधियों में हम केवल एक ही काम कर सकते हैं, केवल एक ही उपाय है; हमें जहाज़ को एक निश्चित स्थिति में लाकर उसी में स्थिर रखना पड़ता है।” हे मसीही, आपको भी यही करना है। कभी-कभी, पौलुस के समान, आपको न सूर्य दिखाई देता है न तारे, और बड़ी आँधी आप पर चल रही होती है; और तब आप केवल एक ही काम कर सकते हैं; केवल एक ही उपाय है। तर्क आपकी सहायता नहीं कर सकता। बीते हुए अनुभव आपको कोई प्रकाश नहीं देते। प्रार्थना से भी कोई सान्त्वना नहीं मिलती। केवल एक ही मार्ग बचा है। आपको अपने प्राण को एक स्थिति में लाकर उसी में स्थिर रखना होगा। आपको प्रभु पर आशा लगाए रहना होगा; और चाहे कुछ भी आ पड़े—आँधियाँ, लहरें, आड़ी-तिरछी धाराएँ, गर्जन, बिजली, भयानक चट्टानें, गरजती तरंगें—चाहे कुछ भी हो, आपको अपने आप को पतवार से बाँध लेना होगा, और परमेश्वर की सच्चाई पर, उसकी वाचा की प्रतिज्ञा पर, मसीह यीशु में उसके अनन्त प्रेम पर अपना भरोसा दृढ़ता से थामे रहना होगा। रिचर्ड फ़ुलर।
21 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 105प्राण देने तक विश्वासी रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा। प्रकाशितवाक्य 2:10।
हर विश्वासयोग्य मसीही की यात्रा के अन्त में एक स्वर्ग है। कायलर।
22 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 106मिस्र देश को भाग जा। मत्ती 2:13। क्यों? क्योंकि एक क्रूर राजा है जो बालक के प्राण लेना चाहेगा। क्या मसीह आप में जन्मा है? क्या आपका जीवन उस चरनी के समान है—जो उसमें रखी वस्तु के कारण एक मंजूषा के समान बहुमूल्य है? तो सावधान रहिए; क्योंकि प्राणों का नाश करनेवाला, हेरोदेस से भी अधिक धूर्त और निर्लज्ज, आपको नष्ट करने का यत्न करेगा। एक दिन आनेवाला है जब वे कहेंगे, “जो बालक के प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए।” अनुग्रह शत्रु के बाद भी बना रहेगा, और हम फिर लौटकर जीवन की सुख-सुविधाओं का आनन्द लेंगे, और कोई हेरोदेस हमें डराने को न होगा। आखिरकार, पाप ही अल्पायु है, क्योंकि जब वह दुष्ट सदा के लिये बाँध दिया जाएगा, तब भलाई फूलती-फलती रहेगी। — टॉमस चैम्पनेस
23 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 106जैसा मेरे प्रभु राजा ने कहा है, वैसा ही तेरा दास करेगा। 1 राजाओं 2:38। परमेश्वर के लिये कोई बड़ा काम करने से भी कहीं अधिक उत्तम एक बात है, और वह कहीं अधिक उत्तम बात यह है कि हम वहाँ हों जहाँ परमेश्वर हमें चाहता है, वह करें जो परमेश्वर हमसे करवाना चाहता है, और उसकी इच्छा से अलग हमारी कोई इच्छा न हो। जी. कैम्पबेल मॉर्गन।
24 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 106उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें। मत्ती 5:16। कहते हैं कि संसार की आँख किसी भी असंगति के लिये उकाब की सी पैनी होती है—दोषी और अयोग्य लोगों की सनकों और असंगतियों को पकड़ लेने में तेज़। उसकी आँख उकाब की सी तो है; परन्तु उकाब भी सूर्य के सामने पलकें झपकाता है, और उसकी आँख की जलती पुतली दोपहर की निष्कलंक शुद्धता के सामने लज्जित होकर सिकुड़ जाती है। आपका उजियाला मनुष्यों के
सामने ऐसा चमके कि दूसरे लोग आपके भक्तिपूर्ण जीवन की एकरूपता से प्रभावित और मोहित होकर पूछने आएँ, और कहें कि आप यीशु के साथ रहे हैं। पन्शन।
25 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 107ग्यारह चेले . . . उस पहाड़ पर गए, जिसे यीशु ने उन्हें बताया था . . . यीशु ने उनके पास आकर कहा . . . इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ। मत्ती 28:16, 18, 19। संसार के उल्लेखनीय कामों का आरम्भ प्रायः बहुत छोटा होता है। थोड़े से अक्षरों से कितने हज़ार शब्द बनते हैं! दस अंकों से कितनी हज़ार संख्याएँ! एक बिन्दु सारी ज्यामिति का आरम्भ है। तालाब में फेंका गया एक छोटा-सा पत्थर एक छोटा घेरा बनाता है, फिर उससे बड़ा, यहाँ तक कि वह फैलकर दोनों किनारों तक पहुँच जाता है। इसी प्रकार छोटे आरम्भों से परमेश्वर सारे संसार में एक प्रवाह फैला देता है। चार्नॉक।
26 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 107देखो, मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिये होगा। लूका 2:10। यह सच है कि बड़े आनन्द का यह सुसमाचार “सब लोगों के लिये” होना था, परन्तु पहले नहीं। यह सन्देश हमारे अपने कानों में पड़ता है, और पहले हमारे अपने प्राणों के लिये है। ओह, इस बात पर भली-भाँति विचार कीजिए! परमेश्वर के सब सत्यों को पहले अपने ही हृदय में उतारिए। सच्चे मन से प्रार्थना में माँगिए कि पवित्र आत्मा उन्हें स्वर्ग की लेखनी से आपके अपने विवेक पर लिख दे। तब आप स्वामी के काम में आने योग्य पात्र बनेंगे, और उसके सन्देश को आत्मिक सामर्थ के साथ दूसरों के प्राणों तक पहुँचाएँगे। एफ़. व्हिटफ़ील्ड।
27 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 107प्रभु जिससे प्रेम करता है, उसकी ताड़ना भी करता है। इब्रानियों 12:6। सांसारिक समृद्धि स्वर्ग के विशेष प्रेम का कोई चिन्ह नहीं है: और न दुःख और चिन्ता परमेश्वर की अप्रसन्नता का कोई चिन्ह हैं, वरन इसके ठीक विपरीत। परमेश्वर का प्रेम सबल, और सच्चा, और उत्सुक है—हमारे आराम के लिये नहीं, परन्तु हमारे स्थायी कल्याण के लिये; वह इसे प्राप्त करने पर तुला हुआ है, और इतना दृढ़ है कि हमारी आत्माओं को ऊँचे संगीत के सुर में मिलाने के अपने प्रयत्नों में गलत समझे जाने और झिड़की सहने को भी सह ले। इसलिये वह
हमें शिक्षा देता हुआ आता है। आइए, हम परमेश्वर के प्रेम की पाठशाला में अपना नाम विद्यार्थियों के रूप में लिखवाएँ। आइए, हम पाठ्यक्रम के विषय में अपनी धारणाओं को एक ओर रख दें; आइए, हम अपने आप को इस बात के लिये सौंप दें कि हमारी अगुवाई की जाए और हमें सिखाया जाए; आइए, हम दुःख के श्यामपट पर से दिए जानेवाले किसी भी पाठ के लिये तैयार रहें: आइए, हम उसके प्रेम की अटूट दृढ़ता के विषय में इतने निश्चित हों कि चाहे वह हमें घात भी करे, तौभी उस पर भरोसा रखने का साहस करें। और आइए, हम उस भव्य क्षण की बाट जोहें, जब वह जीवन के सारे अनुशासन का कारण हमें बताएगा, ऐसी मुस्कान के साथ जो हमारे प्राणों को परमानन्द से पुलकित कर देगी, और शोक और लम्बी साँस को सदा के लिये भाग जाने पर विवश कर देगी। एफ़. बी. मेयर।
28 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 108यदि पिता से कुछ माँगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा। यूहन्ना 16:23। प्रार्थना प्रतिज्ञा पर आधारित होनी चाहिए, परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, उसकी प्रतिज्ञाएँ सदा हमारी प्रार्थनाओं से अधिक विस्तृत होती हैं! यहाँ उलटे पिरामिड बनाने का कोई भय नहीं, क्योंकि यीशु मसीह ही नींव है। फ्रांसिस रिडली हैवरगल।
29 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 108वह भोजन पर से उठा, और अपने कपड़े उतार दिए, और अंगोछा लेकर अपनी कमर बाँधी। तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अंगोछे से उसकी कमर बन्धी थी, उसी से पोंछने लगा। यूहन्ना 13:4, 5। काम साधारण और तुच्छ इसलिये होते हैं कि वे प्रायः मनुष्यों के साधारण और तुच्छ विचारों को व्यक्त करते हैं। आइए, हम उन कामों पर तुच्छता का दोष न लगाएँ जिनसे हमारा दैनिक जीवन बनता है, परन्तु अपने ओछे प्राणों पर, जो उन कामों के द्वारा इतने अयोग्य रूप में अपने आप को प्रगट करते हैं। एक ही काम, उस प्राण के अनुसार जो उसके द्वारा प्रगट होता है, अयोग्यता की गहराई से लेकर उत्कृष्टता की अलौकिक ऊँचाई तक, बीच की हर सीढ़ी से होकर क्रमशः ऊपर चढ़ सकता है। हमारे प्रभु के देहधारण के महिमामय उद्देश्यों में से एक यह था कि वह जीवन के छोटे-छोटे ब्योरों के साथ हमारा मेल करा दे, ताकि हम इन्हें महत्त्वहीन समझकर तुच्छ न जानें, वरन अपने आप को इस बात के लिये तुच्छ जानें कि हम इन ब्योरों को एक
उदात्त स्वभाव के व्याख्याता नहीं बना पाते। ओह, तो आइए, हम जीवन के दैनिक ब्योरों को स्नेह और कृतज्ञता से देखें, और उन सब पर यीशु के हाथ की पवित्र करनेवाली छाप देखें! जॉर्ज बोवेन।
30 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 109उसने . . . करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को . . . नियुक्त कर दिया, कि वे जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा दें। उत्पत्ति 3:24। धन्य वे हैं जो उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, कि उन्हें जीवन के वृक्ष के पास आने का अधिकार मिले। प्रकाशितवाक्य 22:14। यह कितनी अद्भुत और कितनी सुन्दर बात है कि प्रकाशितवाक्य का अन्तिम पृष्ठ मुड़कर उत्पत्ति के पहले पृष्ठ को छू लेता है। मनुष्य का इतिहास ऐसे स्वर्गदूतों से आरम्भ हुआ जिनके मुख क्रुद्ध थे और जिनकी ज्वालामय तलवारें जीवन के वृक्ष का मार्ग रोके हुए थीं। इसका अन्त इस बात से होता है कि करूबों का पहरा हटा लिया गया है; या, सम्भवतः यह कहना अधिक ठीक होगा कि वे अपनी तलवारें म्यान में रखकर उस फल के, जो अब वर्जित नहीं रहा, पहरेदार होने के बदले उसके मार्गदर्शक बन गए हैं। यह बाइबल की प्रतीकात्मक भव्य रीति है यह कहने की कि बीच की सारी बातें—पाप, दुर्दशा, मृत्यु—केवल एक कोष्ठक हैं। परमेश्वर का उद्देश्य विफल नहीं होने का। इतिहास में से उसके प्रतापी प्रयाण का अन्त यह होना है कि मनुष्यों को जीवन के वृक्ष तक पहुँच मिले, जिससे वे, उन उदास युगों तक—जो महान अनन्तकाल में केवल एक क्षण के समान हैं—अपने पाप के कारण वंचित रखे गए थे। एलेक्ज़ेंडर मैक्लैरन।
31 अक्टूबर
मुद्रित पृष्ठ 109कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में ज्ञान और प्रकाश की आत्मा दे: और तुम्हारे मन की आँखें ज्योतिर्मय हों। इफिसियों 1:17, 18। एक शाम हम स्विट्ज़रलैण्ड में एक पहाड़ से नीचे उतर रहे थे, कि एक काले गर्जन-भरे तूफ़ान ने दिन को मिटा दिया, और सब कुछ अचानक अन्धकार में डूब गया। हम संकरी, धूल भरी पगडण्डियों को, और उन उदास ढलानों को जो और भी गहरे अन्धकार में निगली जा चुकी थीं, बस धुँधला-सा ही देख पाते थे। तब हमारे चारों ओर की उस भव्यता का—ऊँचाइयों, और गहराइयों, और आश्चर्यों का—क्या हुआ? सब कुछ
अन्धकार में लुप्त था। तब बिजली आई—कौंधें नहीं, परन्तु सारा आकाश धधक उठा, निरन्तर, और हर ओर। हमने महिमा की कैसी-कैसी गहराइयों में झाँका! अन्धकार में से वैभव के कैसे-कैसे आश्चर्य चमक उठे! सोचिए कि किस प्रकार हमारे साथ, हमारे भीतर, वह है जो जीवन के साधारण, धूल भरे मार्गों को जगमगा देने के लिये आता है, परमेश्वर की महिमा के प्रकाश से हमारे मन्द विचारों को आलोकित करता है; प्राण की दृष्टि को निर्मल करता है, और फिर उस उद्धार की महानता को प्रगट करता है जो मसीह में हमारा है। मार्क गाय पियर्स।
