मई · 31 दैनिक पाठ

मई

सम्पादक: डी. एल. मूडी · फ़्लेमिंग एच. रेवेल कम्पनी, 1900

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    यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

    1 मई

    मुद्रित पृष्ठ 45

    तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढ़ूंगा। भजन संहिता 63:1। ऐसे संसार में, जहाँ आत्मा के पंखों को अस्त-व्यस्त कर देने वाली इतनी बातें हैं, परमेश्वर के मण्डप के गुप्त स्थान में प्रवेश करना कितना आवश्यक है, क्योंकि केवल वही उसे फिर से स्थिरता और शान्ति में ले आएगा! ऐसे संसार में, जहाँ उदास और निराश करने वाली इतनी बातें हैं, उसके साथ संगति कितनी धन्य है जिसमें सच्चे आनन्द और स्थायी हर्ष का एकमात्र सच्चा स्रोत और सोता है! ऐसे संसार में, जहाँ इतनी बातें हमारी आत्माओं को अपवित्र करने, उन्हें साधारण और अशुद्ध बना देने की निरन्तर चेष्टा करती रहती हैं, प्रार्थना में उन्हें फिर से पवित्रता और परमेश्वर के लिये अर्पित करना कितना ऊँचा सौभाग्य है। —आर्चबिशप ट्रेंच।

    2 मई

    मुद्रित पृष्ठ 45

    उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी। यूहन्ना 1:4। तुम जगत की ज्योति हो। मत्ती 5:14।

    ज्योति में हम चल सकते और काम कर सकते हैं। हम ज्योति में चलते हैं और पूरी रीति से ज्योति की सन्तान बन जाते हैं। हम अपनी ज्योति को, अर्थात् परमेश्वर की ज्योति को, चमकने देते हैं, ताकि मनुष्य हमारे भले कामों को देखकर हमारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें। कोमलता से, चुपचाप, प्रेम से, निरन्तर हम अपने आप को इसके लिये दे देते हैं कि उस ज्योति और उस प्रेम को आगे पहुँचाएँ जिसे परमेश्वर इतनी निरन्तरता से हम में चमकाता रहता है। हमारा एकमात्र काम यह है कि हम बाट जोहें, और ग्रहण करें, और फिर मसीह में परमेश्वर की ज्योति को आगे पहुँचाएँ। —एन्ड्रयू मरे।

    3 मई

    मुद्रित पृष्ठ 46

    दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ। 1 कुरिन्थियों 15:58। भलाई करने में सक्रिय रहना हर्षित मसीही बने रहने का एक नुस्खा है; यह देह के लिये व्यायाम के समान है, और यह प्राण को स्वस्थ रखता है। —बिशप राइल।

    4 मई

    मुद्रित पृष्ठ 46

    और स्वर्ग की ओर देखकर आह भरी। मरकुस 7:34। बहुधा हम आह भरते हैं और भीतर की ओर देखते हैं; यीशु ने आह भरी और बाहर की ओर देखा। हम आह भरते हैं, और नीचे देखते हैं; यीशु ने आह भरी, और ऊपर देखा। हम आह भरते हैं, और पृथ्वी की ओर देखते हैं; यीशु ने आह भरी, और स्वर्ग की ओर देखा। हम आह भरते हैं, और मनुष्य की ओर देखते हैं; यीशु ने आह भरी, और परमेश्वर की ओर देखा। —स्टॉर्क।

    5 मई

    मुद्रित पृष्ठ 46

    हम क्लेशों में भी घमण्ड करते हैं। रोमियों 5:3। क्या आपने कभी सोचा है कि किसी दिन ऐसा होगा कि फिर कभी न कोई बात आपको परखने के लिये होगी, न कोई व्यक्ति आपको सताने के लिये? —ए. बी. सिम्पसन।

    6 मई

    मुद्रित पृष्ठ 46

    पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्वर्गीय वस्तुओं पर ध्यान लगाओ। कुलुस्सियों 3:2। जिसका मन ऊपर की वस्तुओं पर लगा है, वह उस व्यक्ति के समान है जो मानो आकाश को थामे लटका हुआ है; और इन्हें दृढ़ता से पकड़े रहकर, चाहे वह संसार को अपने पैरों के नीचे से लुढ़ककर दूर जाते हुए देखे, तौभी वह कह सकता है, “मेरा मन स्थिर है; मेरा

    मन स्थिर है; हे प्रभु, मैं गाऊँगा और स्तुति करूँगा!”

    —गथरी

    7 मई

    मुद्रित पृष्ठ 47

    प्रभु सचमुच जी उठा है, और शमौन को दिखाई दिया है। लूका 24:34। उन्होंने . . . (पतरस का) वचन आनन्द से ग्रहण किया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्यों के लगभग उन में मिल गए। प्रेरितों के काम 2:41। इससे पहले कि प्रभु हमें अपनी सेवा में काम में ला सके, हमारा उसके साथ निकट का व्यक्तिगत व्यवहार होना आवश्यक है। जिस प्राण को वह दूसरों को आशीष देने में काम में लाना चाहता है, उसके साथ उसे सदा एकान्त में व्यवहार करना होगा। क्या आप अपने आस-पास के लोगों से यीशु के लिये बोलना चाहते हैं? तो अपना सन्देश लेने के लिये आपको स्वयं यीशु के पास जाना होगा। जो कुछ आप यीशु के लिये कहते हैं, वह यीशु ही से प्राप्त किया हुआ होना चाहिए। ओह, कितनी साँस चारों ओर निर्बल होकर व्यर्थ जाती है, क्योंकि वह पवित्रस्थान में भीतर नहीं ली गई! हमें जीवते परमेश्वर के साथ अधिक एकान्त व्यवहार की आवश्यकता है। हम बिना भेजे दौड़ पड़ते हैं; परमेश्वर के हम से बोलने से पहले ही हम बोल पड़ते हैं; कोई आश्चर्य नहीं कि हम इतनी बार असफल होते हैं। ओह, इससे पहले कि परमेश्वर हृदय को काम में ला सके, उसे कितनी गुप्त प्रार्थना और कितने हृदय-जाँचने वाले अनुशासन की आवश्यकता है! —एफ़. व्हिटफ़ील्ड।

    8 मई

    मुद्रित पृष्ठ 47

    धर्मी पेट भर खाने पाता है। नीतिवचन 13:25। मसीह अवश्य तृप्त करता है; तो फिर यदि हम तृप्त नहीं हैं, तो इसका कारण यही होगा कि हम पूरी रीति से और केवल उसी को अपना भोजन नहीं बना रहे हैं। दोष उस प्रबन्ध में नहीं है जो किया गया है। —फ़्रांसिस रिडली हैवरगल।

    9 मई

    मुद्रित पृष्ठ 47

    प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है। इब्रानियों 12:6। किसी ने ठीक ही कहा है कि “सांसारिक चिन्ताएँ एक स्वर्गीय अनुशासन हैं,” परन्तु वे अनुशासन से भी बढ़कर कुछ हैं; वे परमेश्वर के रथ हैं, जो प्राण को उसके विजय के ऊँचे स्थानों पर ले जाने के लिये भेजे गए हैं। श्रेष्ठगीत में हमें “प्रेम से जड़े हुए एक रथ” के विषय में बताया गया है। हम सदा अपने निज रथ के भीतर लगे प्रेम के अस्तर को नहीं देख पाते;

    वह बहुधा बहुत ही अप्रिय दिखाई देता है; परन्तु परमेश्वर का भेजा हुआ हर रथ अवश्य ही प्रेम से जड़ा हुआ होगा, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। वास्तव में, उसका प्रेम ही तो रथ को भेजता है। इसलिये अपनी ताड़नाओं को, चाहे वे वर्तमान में कितनी ही दुखदायी क्यों न हों, परमेश्वर के रथ समझिए, जो आपके प्राणों को आत्मिक उपलब्धि और उन्नति के “ऊँचे स्थानों” तक ले जाने के लिये भेजे गए हैं, और आप पाएँगे कि वे आखिरकार “प्रेम से जड़े हुए” ही हैं। —स्मिथ।

    10 मई

    मुद्रित पृष्ठ 48

    उसके पुत्र यीशु मसीह का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। यूहन्ना 1:7। खनिक की आँख से एक शिक्षा सीखिए, जो दिन भर उड़ती हुई कोयले की धूल के बीच काम करता रहता है। जब वह दिन के उजाले में बाहर निकलता है, तो उसका चेहरा चाहे कितना ही मैला हो; परन्तु उसकी आँखें साफ़ और चमकीली होती हैं, क्योंकि अश्रु-ग्रन्थि में स्थित आँसुओं का सोता अपनी कोमल धाराएँ निरन्तर आँख पर बहाता रहता है, और धूल का हर कण जैसे ही उस पर पड़ता है, उसे धोकर साफ़ कर देता है। क्या यही शुद्धिकरण का वह आश्चर्यकर्म नहीं है जिसकी आवश्यकता ऐसे संसार में हमारी आत्माओं को है? और हमारा धन्य प्रभु अपने शुद्ध करने वाले लहू के द्वारा हमारे लिये यही करने को तैयार है, यदि हम केवल उस पर भरोसा रखें। —एफ़. बी. मेयर।

    11 मई

    मुद्रित पृष्ठ 48

    जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना। यूहन्ना 2:5। फ़्लोरेंस नाइटिंगेल ने कहा था: “यदि मैं आपको अपने जीवन के विषय में कुछ बता सकूँ, तो वह यह दिखाने के लिये होगा कि किस प्रकार बहुत ही साधारण योग्यता वाली एक स्त्री को परमेश्वर ने विचित्र और अनजाने मार्गों में ले चलकर उसकी सेवा में वह करवाया जो उसने उस स्त्री में किया है। और यदि मैं आपको सब कुछ बता सकूँ, तो आप देखेंगे कि किस प्रकार परमेश्वर ने ही सब कुछ किया है, और मैंने कुछ भी नहीं। मैंने कड़ा परिश्रम किया है, बहुत कड़ा परिश्रम, बस इतना ही; और मैंने परमेश्वर को कभी किसी बात से इनकार नहीं किया।”

    12 मई

    मुद्रित पृष्ठ 48

    मैं बढ़ना भी जानता हूं। फिलिप्पियों 4:12। समृद्ध होना एक जोखिम भरी बात है। विपत्ति की घरिया

    मसीही के लिये समृद्धि की कुठाली की अपेक्षा कम कठोर परीक्षा है। मनुष्यों के आनन्द से लबालब भरे प्याले को स्थिर हाथ से उठाए रखने के लिये मानवीय कौशल से बढ़कर कुछ चाहिए; तौभी पौलुस ने वह कौशल सीख लिया था, क्योंकि वह घोषणा करता है, “हर एक बात में मैं ने तृप्त होना और भूखा रहना दोनों सीखा है।” जब परमेश्वर की विधान-सम्बन्धी दयाएँ हमें बहुत मिलती हैं, तो बहुधा ऐसा होता है कि परमेश्वर का अनुग्रह हम में बहुत थोड़ा होता है; पृथ्वी से तृप्त होकर हम स्वर्ग के बिना काम चलाने में सन्तुष्ट रहते हैं। निश्चय जानिए, भूखा रहना जानने की अपेक्षा तृप्त होना जानना अधिक कठिन है, क्योंकि मनुष्य के स्वभाव की प्रवृत्ति घमण्ड और परमेश्वर को भूल जाने की ओर इतनी प्रबल है। ध्यान रखिए कि आप अपनी प्रार्थनाओं में माँगें कि परमेश्वर आपको सिखाए कि “तृप्त कैसे रहें।” —स्पर्जन।

    13 मई

    मुद्रित पृष्ठ 49

    जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा। लूका 14:11। . . . यदि आप मुकुट का मार्ग पूछें—तो वह क्रूस से होकर है; पर्वत का—तो वह तराई से होकर है; ऊँचा किए जाने का—तो वह यह है कि जो अपने आप को छोटा बनाता है। —जे. एच. इवान्स।

    14 मई

    मुद्रित पृष्ठ 49

    और उन के लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूं ताकि वे भी सत्य के द्वारा पवित्र किए जाएं। यूहन्ना 17:19। क्या आपको स्मरण है कि जब यीशु अन्तिम भोज के समय अपने चेलों के साथ बैठा था, तो उसने किस प्रकार अपना शब्द ऊँचा करके प्रार्थना की, और उस प्रार्थना के बीच में ये अद्भुत शब्द आए: “उन के लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूं ताकि वे भी पवित्र किए जाएं”? क्या मनुष्य ने परमेश्वर के मुख से जितनी शिक्षाएँ पाई हैं, उन सब में इससे बढ़कर कुछ महान, इससे बढ़कर दूरगामी कुछ है—कि मैं अपना सर्वोत्तम बनूँ, केवल अपने लिये नहीं, वरन संसार के लिये? आप अपने संगी मनुष्यों की सहायता कर सकते हैं—आपको अपने संगी मनुष्यों की सहायता करनी ही चाहिए; परन्तु आप उनकी सहायता केवल एक ही रीति से कर सकते हैं, और वह यह कि आप वह सबसे महान और सबसे उत्तम मनुष्य बनें जो बनना आपके लिये सम्भव है। —फ़िलिप्स ब्रुक्स।

    15 मई

    मुद्रित पृष्ठ 50

    विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। नीतिवचन 16:32। परमेश्वर और उसके स्वर्गदूतों की दृष्टि में किसी भी दूसरी विजय से अधिक प्रिय अपने आप पर विजय है, जिसे हर मनुष्य स्वर्ग की सहायता से अपने लिये प्राप्त कर सकता है। —डीन स्टैनली।

    16 मई

    मुद्रित पृष्ठ 50

    यह वही बालक है जिसके लिये मैं ने प्रार्थना की थी; और यहोवा ने मुझे मुंह मांगा वर दिया है। इसी लिये मैं भी उसे यहोवा को अर्पण कर देती हूं; कि यह अपने जीवन भर यहोवा ही का बना रहे। 1 शमूएल 1:27, 28। परमेश्वर कभी-कभी वरदान केवल इसलिये देता है कि प्रेम के पास त्याग करने के लिये कुछ हो। जो वस्तुएँ वह हमारे हाथों में रखता है, वे सम्भवतः इसलिये रखी जाती हैं कि हमें यह दिखाने का अवसर मिले कि हमारे हृदय में क्या है। ओह, कि हम में ऐसे प्रेम की उत्कटता होती जो हमें अपनी हर वस्तु को जाँचने के लिये प्रेरित करती, ताकि पता लगाएँ कि वह किस प्रकार मसीह के प्रति अपना स्नेह प्रगट करने का साधन बनाई जा सकती है! —जॉर्ज बोवेन।

    17 मई

    मुद्रित पृष्ठ 50

    पहिले तुम परमेश्वर के राज्य और उसके धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। मत्ती 6:33। हमें केवल एक ही चिन्ता रखने की आवश्यकता है, कि हम पहली बात को पहले स्थान पर रखें—परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता। तब दोनों लोकों के लिये जो कुछ हमें चाहिए, वह सब दिया जाएगा। परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेगा; परन्तु ऐसे आश्वासन पर आनन्द मनाते हुए हम कभी-कभी भूल जाते हैं कि यदि हम ईश्वरीय प्रतिज्ञा पर दावा करना चाहते हैं तो हमें अपना भाग पूरा करना होगा। यह सदा सहज नहीं होगा। कल इसका अर्थ कोई अरुचिकर काम, कोई अप्रिय कर्तव्य, किसी ऐसे व्यक्ति के लिये कोई महँगा बलिदान हो सकता है जो योग्य न जान पड़ता हो। जीवन अच्छे चरवाहे के पीछे चलने की हमारी तत्परता की कठिन परीक्षाओं से भरा है। जब तक हमने मसीह को अपने जीवन का मार्गदर्शक नहीं बना लिया, तब तक इस आश्वासन पर दावा करने का हमें तनिक भी अधिकार नहीं है। —जे. आर. मिलर।

    18 मई

    मुद्रित पृष्ठ 51

    उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी। भजन संहिता 34:1। तेरी स्तुति क्षणिक न हो—संगीत का एक दौर, और फिर वाद्य को दीवार पर टाँग दिया जाए, जब तक किसी अद्भुत विधान का कोई और उत्सव का दिन तुझे उसे फिर उतारने पर विवश न करे। परमेश्वर अपने पवित्र लोगों के घर अतिथि के समान नहीं आता, वरन उनके साथ निवास करने आता है। दाऊद ने इसे जीवन भर का काम बना लिया था: “मैं जीवन भर तेरी स्तुति करता रहूँगा।” —गर्नल।

    19 मई

    मुद्रित पृष्ठ 51

    मैं अकेला इन सब लोगों का भार नहीं सम्भाल सकता, क्योंकि यह मेरे लिये बहुत भारी है। गिनती 11:14। मसीह के सब सेवकों के लिये यह स्मरण रखना अत्यन्त आवश्यक है कि जब भी प्रभु किसी मनुष्य को उत्तरदायित्व के पद पर रखता है, तो वह उसे उसके योग्य भी बनाएगा और उसमें सम्भाले भी रखेगा। निस्सन्देह, यह बिलकुल दूसरी बात है यदि कोई मनुष्य बिना भेजे किसी कार्यक्षेत्र में, या कठिनाई अथवा संकट के किसी पद पर दौड़ पड़े। ऐसी दशा में हम निश्चय देर-सवेर उसके पूरी रीति से टूट जाने की आशा कर सकते हैं। परन्तु जब परमेश्वर किसी मनुष्य को किसी विशेष पद पर बुलाता है, तो वह उसे उस पद को सम्भालने के लिये आवश्यक अनुग्रह से सम्पन्न करेगा। यह बात हर दशा में सच है। यदि हम केवल जीवते परमेश्वर से लिपटे रहें, तो हम कभी असफल नहीं हो सकते। यदि हम सोते से पानी भर रहे हैं, तो हम कभी सूख नहीं सकते। हमारे नन्हे झरने शीघ्र ही सूख जाएँगे; परन्तु हमारा प्रभु यीशु मसीह घोषणा करता है, “जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी।” —सी. एच. एम.

    20 मई

    मुद्रित पृष्ठ 51

    तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! यशायाह 6:5। अपने पापी हृदय का दर्शन हमें दीन नहीं करता; यीशु मसीह का दर्शन हमें दीन करता है। मैं नाश हुआ, क्योंकि मेरी आँखों ने राजा को देखा है। —एन्ड्रयू ए. बोनार।

    21 मई

    मुद्रित पृष्ठ 52

    सोचते सोचते आग भड़क उठी। भजन संहिता 39:3। हे मेरे प्राण, यदि तू अधिक मनन करता, तो आग अधिक भड़कती। तू अपने साथ अकेले में अधिक बार क्यों नहीं जाता? यदि तू कम सांसारिक होता तो संसार के लिये अधिक योग्य होता। यदि तुझ में अधिक स्वर्गीय आग होती, तो तुझ में अधिक पार्थिव सामर्थ होती। क्या कोई ऐसा गुप्त मण्डप नहीं जिसमें तू जाकर अपने आप को गरमा सके? क्या कोई ऐसा परमपवित्र स्थान नहीं जहाँ तू प्रेरणा की वह ज्वाला पा सके जो तुझे बलवन्त बना दे? क्या मनुष्य के पुत्र के विषय में यह नहीं लिखा है कि “जब वह प्रार्थना कर ही रहा था, तो उसके चेहरे का रूप बदल गया”? हाँ; उसकी प्रार्थना ही से उसकी रूपान्तरित महिमा आई थी। उसके हृदय की ज्योति ही से उसके मुख की ज्योति निकली थी। जब वह मनन कर रहा था, तभी आग भड़क उठी। हे मेरे प्राण, क्या तू चाहता है कि तेरा जीवन मनुष्यों की आँखों के सामने महिमान्वित, सुशोभित और रूपान्तरित हो जाए? परमेश्वर के मण्डप के गुप्त स्थान में चढ़ जा, जहाँ प्रेम की आग जल रही है। तेरा जीवन मैदान के निवासियों के लिये महिमा से चमकेगा। तेरी प्रार्थनाएँ ज्योतिर्मय होंगी; वे तेरे मुख को मूसा के मुख के समान प्रकाशित कर देंगी जब वह नहीं जानता था कि उसका मुख चमक रहा है। तेरे वचन जलते हुए होंगे; वे इम्माऊस के मार्ग पर यात्रा करने वाले बहुत से हृदयों को सुलगा देंगे। तेरा मार्ग दीप्तिमान होगा; जब तू एलिय्याह के समान एकान्त में प्रार्थना कर चुकेगा, तब तुझे एलिय्याह का अग्निमय रथ मिलेगा। —जॉर्ज मैथेसन।

    22 मई

    मुद्रित पृष्ठ 52

    जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूं, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा। मत्ती 10:42। हम भलाई करने और उदारता दिखाने के अवसरों को बहुत दूर ढूँढ़ने के संकट में हैं। बुरांस के फूलों तक हाथ बढ़ाते हुए हम छोटे-छोटे डेज़ी के फूलों को रौंद डालते हैं। —संकलित।

    23 मई

    मुद्रित पृष्ठ 52

    नाले के पास छिप रह। 1 राजाओं 17:3। नदी के पास नहीं, वरन नाले के पास। नदी में तो

    सदा भरपूर जल रहता, परन्तु नाला किसी भी क्षण सूख सकता था। यह हमें क्या सिखाता है? परमेश्वर अपने लोगों को यहाँ विलासिता की बहुतायत में नहीं रखता। संसार की बहुतायत उनके मन को उससे हटा सकती है। वह उन्हें नदी नहीं, वरन नाला देता है। नाला आज बह रहा हो सकता है, कल वह सूख सकता है। और परमेश्वर ऐसा क्यों करता है? हमें यह सिखाने के लिये कि हम उसके दानों और आशीषों में नहीं, वरन स्वयं उसी में विश्राम करें। हमारे हृदय सदा यही करते रहते हैं—देने वाले के बदले दान में विश्राम करते हैं। इसलिये परमेश्वर नदी के पास हम पर भरोसा नहीं कर सकता, क्योंकि वह अनजाने में ही हृदय में उसका स्थान ले लेती है। इस्राएल के विषय में कहा गया है कि जब वे तृप्त हो गए, तब वे परमेश्वर को भूल गए। —एफ़. व्हिटफ़ील्ड।

    24 मई

    मुद्रित पृष्ठ 53

    उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है। भजन संहिता 103:19। उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है—इसलिये तुझे ऐसी कोई बात नहीं मिल सकती जो स्तुति का विषय न हो, क्योंकि ऐसी कोई बात नहीं जो तेरे प्रभु की अनुग्रहपूर्ण अनुमति, या योजना, या नियन्त्रण का विषय न हो। पूरी सृष्टि पर—तू कहीं भी उसके राज्य से बाहर कदम नहीं रख सकता, और न किसी बात में उसकी देखभाल और शासन से परे जा सकता है। पूरी सृष्टि पर, इसलिये सब कुछ परमेश्वर की ओर से मानकर ग्रहण कर; सब कुछ परमेश्वर की ओर से मानकर रख; और अपनी कृतज्ञता के द्वारा सब कुछ फिर परमेश्वर को लौटा दे, और इस प्रकार चक्र को पूरा कर, और उसे सब बातों का अल्फ़ा और ओमेगा, आदि और अन्त बना। —मार्क गाय पियर्स।

    25 मई

    मुद्रित पृष्ठ 53

    यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे। 2 तीमुथियुस 2:12। महिमा के मुकुट के लिये सबसे ऊँची बोली लगाने वाला वह है जो आत्म-त्याग के क्रूस को सबसे अधिक दीनता से उठाता है। —ए. जे. गॉर्डन।

    26 मई

    मुद्रित पृष्ठ 53

    अपने मन की रक्षा कर। नीतिवचन 1। सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। नीतिवचन 4:23। जो अपने मन को शुद्ध और पवित्र रखना चाहता है, उसे

    हर उस मार्ग पर एक पहरेदार बिठाना चाहिए जिससे पाप वहाँ प्रवेश पा सकता है, और तथाकथित “छोटे” पापों से सबसे अधिक चौकसी करनी चाहिए। परमेश्वर के जन को अपनी आँखों की रक्षा करनी है, और इसी लिये अय्यूब ने कहा, “मैं ने अपनी आंखों के विषय वाचा बान्धी है”—अपनी जीभ की, और इसी लिये यह उपदेश है, “अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले”—अपने कानों की, और इसी लिये यह चेतावनी है, “हे मेरे पुत्र, उस शिक्षा का सुनना छोड़ दे जो भटका देती है”—अपने पाँवों की, और इसी लिये दाऊद कहता है, “मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।” और चूँकि पाँचों इन्द्रियों का ऐसा कोई द्वार नहीं जिससे शत्रु महानद के समान भीतर न घुस आए, जब तक कि आत्मा उसके विरुद्ध झण्डा खड़ा न करे, इसलिये हमें हर फाटक की रखवाली करने, और हर द्वार के ऊपर यह लिख देने की आवश्यकता है, “यहाँ कोई हानि पहुँचाने वाली या अशुद्ध करने वाली वस्तु प्रवेश नहीं करती।” —गथरी।

    27 मई

    मुद्रित पृष्ठ 54

    जो कुछ भी करो . . . सब प्रभु यीशु के नाम से करो। कुलुस्सियों 3:17। छोटे कामों को ऐसे कीजिए मानो वे बड़े हों, प्रभु यीशु मसीह की महिमा के कारण, जो आप में वास करता है; और बड़े कामों को ऐसे कीजिए मानो वे छोटे और सहज हों, उसकी सर्वसामर्थ के कारण। —पास्कल।

    28 मई

    मुद्रित पृष्ठ 54

    उसे उन्होंने बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले। मत्ती 27:32। बहुत से मसीही हैं जिनके विषय में यह सच है। उन्हें क्रूस उठाने के लिये विवश किया जाता है, परन्तु यह कैसे होता है? यह उनके उससे भाग जाने के कारण होता है। वे ठान लेते हैं कि वे मसीह का क्रूस नहीं उठाएँगे; और जब क्रूस आता है तो वे पाते हैं कि वह कहीं अधिक भयानक रूप में, कहीं अधिक कुचल देने वाले बोझ के साथ आता है, उसकी अपेक्षा जिस रूप में वह आता यदि वे केवल ईश्वरीय मार्गदर्शन के अधीन अपने आप को सौंप देने में सन्तुष्ट रहते; क्योंकि उन सब पर क्रूस का आना आवश्यक है जिन्हें आगे आने वाली महिमा के लिये तैयार किया जाना है। —डब्ल्यू. हे एटकेन।

    29 मई

    मुद्रित पृष्ठ 55

    हमारे प्रभु यीशु मसीह . . . ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। गलातियों 1:4। मसीह से जुड़ जाना ही संसार से छूट जाने का एकमात्र भेद है। —ए. जे. गॉर्डन।

    30 मई

    मुद्रित पृष्ठ 55

    तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। मत्ती 5:14। दीपक बातें नहीं करते, परन्तु वे चमकते अवश्य हैं। प्रकाशस्तम्भ कोई ढोल नहीं बजाता, कोई घण्टा नहीं पीटता; तौभी जल के पार बहुत दूर तक नाविक को उसकी मित्रवत् चिनगारी दिखाई देती है। इसी प्रकार अपने कामों के द्वारा अपने धर्म को चमकने दीजिए। आपके जीवन का मुख्य उपदेश आपके सारे आचरण के द्वारा स्पष्ट किया जाए। —स्पर्जन।

    31 मई

    मुद्रित पृष्ठ 55

    मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यूहन्ना 15:5। जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। फिलिप्पियों 4:13। उससे अलग होकर हम कुछ भी नहीं कर सकते। जब तक हम उसमें बने रहते हैं, कुछ भी असम्भव नहीं। इसलिये हमारे जीवन का एकमात्र उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम मसीह के साथ जीवित और गहन एकता में बने रहें, हर उस बात से सावधान रहें जो उसे तोड़ सकती है, और उसे दृढ़ करने और बढ़ाने के हर साधन को काम में लाएँ। और ठीक जितना हम ऐसा करेंगे, उतना ही हम पाएँगे कि हर सम्भव संकट के लिये उसकी सामर्थ हम में बहती चली आ रही है। हो सकता है कि हम उसकी उपस्थिति का अनुभव न करें; परन्तु जब भी हम उसमें से लेना आरम्भ करेंगे, हम उसे उपस्थित पाएँगे। ऐसी कोई परीक्षा नहीं जिस पर हम प्रबल न हो सकें; ऐसा कोई अभाव नहीं जिसे हम धीरज से सह न सकें; ऐसी कोई कठिनाई नहीं जिसका हम सामना न कर सकें; ऐसा कोई काम नहीं जिसे हम पूरा न कर सकें; ऐसा कोई अंगीकार या गवाही नहीं जिसे हम न दे सकें, यदि केवल हमारे प्राण यीशु मसीह के साथ स्वस्थ एकता में जी रहे हों; क्योंकि जैसा हमारा दिन या घड़ी हो, वैसी ही हमारी शक्ति होगी। —एफ़. बी. मेयर।

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