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यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
1 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 16प्रार्थना में लगे रहो। कुलुस्सियों 4:2। क्या आपको किसी वस्तु की घटी नहीं? तो मुझे डर है कि आप अपनी दरिद्रता को नहीं जानते। क्या आपके पास परमेश्वर से माँगने के लिये कोई दया नहीं? तो प्रभु की दया आपको आपकी दुर्दशा दिखाए। प्रार्थनाहीन प्राण मसीहहीन प्राण है। प्रार्थना विश्वास करनेवाले शिशु की तोतली बोली है, लड़नेवाले विश्वासी का जयघोष है, और यीशु में सो जानेवाले मरते हुए संत का अन्तिम शान्ति-गीत है। —स्पर्जन
2 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 16जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। इफिसियों 2:21। जीवन-रूपी तम्बू एक अद्भुत भवन है; उसकी रहस्यमय और महिमामय दीवारों को खड़ा करने में हर प्रकार के काम करनेवालों के लिये स्थान है। यदि हम सबसे बड़ा काम नहीं कर सकते, तो सबसे छोटा काम कर सकते हैं। हमारा स्वर्ग इस सत्य के अनुभव से निकलेगा कि जिसे हम बना रहे थे वह परमेश्वर का तम्बू था, और हम परमेश्वर की आशीष के अधीन काम कर रहे थे। —जोसेफ़ पार्कर
3 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 17संसार से प्रेम न रखो। यूहन्ना 2:15। उससे प्रेम न रखिए, और फिर भी उससे प्रेम रखिए। उससे उसके प्रेम के साथ प्रेम रखिए जिसने उसके लिये मरने को अपना पुत्र दे दिया। उससे उसके प्रेम के साथ प्रेम रखिए जिसने उसके लिये अपना लहू बहाया। उससे स्वर्गदूतों के प्रेम के साथ प्रेम रखिए, जो उसके मन फिराने पर आनन्द करते हैं। उसकी भलाई करने के लिये उससे प्रेम रखिए; उसकी पीड़ाओं को अपने आँसू, उसके दुःखों को अपनी करुणा, उसकी घटियों को अपना धन, उसकी विपत्तियों को अपनी प्रार्थनाएँ, और उसके दान-पुण्य, परोपकार और मसीही भक्ति के खेतों को अपनी शक्तियाँ और अपने परिश्रम के घण्टे दीजिए। आप उस पर प्रभाव डाले बिना, या उससे प्रभावित हुए बिना जी नहीं सकते। या तो आप संसार को बेहतर बनाएँगे, या वह आपको बदतर बना देगा। परमेश्वर अपने अनुग्रह और पवित्र आत्मा के द्वारा आपकी सहायता करे कि आप संसार में ऐसे जीएँ कि उससे ऊपर जीएँ, और उसके परे देखें; और उससे ऐसा प्रेम रखें कि जब आप उसे छोड़ें, तो उसे उससे बेहतर दशा में छोड़ें जैसा आपने उसे पाया था। —गथरी
4 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 17तू अपनी मुट्ठी खोलकर, सब प्राणियों की इच्छा को तृप्त करता है। भजन संहिता 145:16। इच्छा—कैसा मनोहर शब्द है! यदि वह हमारी आवश्यकता, हमारी घटी को ही पूरा कर देता, तो भी यह बहुत बड़ी बात होती; परन्तु वह इससे कहीं आगे बढ़ जाता है। करुणा हमारी आवश्यकता को पूरा करने के लिये प्रेरित होती है; कर्तव्य कभी-कभी हमारी घटियों की सुधि ले सकता है; परन्तु इच्छा को तृप्त करने में एक कोमल चौकसी, हमारे विषय में एक मधुर और अनुग्रहपूर्ण जानकारी, आशीष देने की एक उत्सुकता निहित है। परमेश्वर तब तक कभी सन्तुष्ट नहीं होता जब तक वह हमारी इच्छाओं को तृप्त न कर दे। —मार्क गाय पियर्स
5 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 17हे यहोवा के सेवको, जो रात रात को यहोवा के भवन में खड़े रहते हो . . . यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, वह सिय्योन में से तुझे आशीष देवे। भजन संहिता 134:1, 3। यदि मैं अपने मित्र के प्रेम को जानना चाहूँ, तो मुझे देखना होगा कि वह जाड़े में क्या कर सकता है। ईश्वरीय प्रेम के साथ भी ऐसा ही है। गर्मी की धूप में, जब जीवन के मधुर स्वर हवा में गूँजते हैं और
जीवन के फल पेड़ पर लगे होते हैं, आराधना करना मेरे लिये बहुत सहज है। परन्तु यदि पक्षी का गीत थम जाए, और पेड़ का फल गिर जाए; तो क्या मेरा हृदय फिर भी गाता रहेगा? क्या मैं रात को परमेश्वर के भवन में खड़ा रहूँगा? क्या मैं उसकी अपनी रात में उससे प्रेम करूँगा? क्या मैं उसके गतसमनी में उसके साथ एक घड़ी भी जाग सकूँगा? क्या मैं वाया डोलोरोसा पर उसका क्रूस उठाकर ले चलने में हाथ बटाऊँगा? मेरा प्रेम उसके अपमान में उसके पास आया है। मेरे विश्वास ने उसे उसकी दीन दशा में पा लिया है। मेरे हृदय ने उसके तुच्छ भेष के भीतर से उसके प्रताप को पहचान लिया है, और अन्ततः मैं जानता हूँ कि मैं दान की नहीं, वरन दाता की लालसा करता हूँ। जब मैं रात को उसके भवन में खड़ा रह सकता हूँ, तब मैंने उसे केवल उसी के लिये ग्रहण किया है। —जॉर्ज मैथेसन
6 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 18जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूँ, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। यूहन्ना 2:6। इस संसार को जिस प्रचार की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह है जूते पहिने हुए वे उपदेश जो यीशु मसीह के साथ चल रहे हैं। —संकलित
7 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 18तब हम जानेंगे, यदि हम यहोवा को जानने के लिये यत्न करते रहें। होशे 6:3। प्रभु हमें अपने ज्ञान के मार्ग पर ले आया है, और हमें आज्ञा देता है कि हम उस मार्ग के सारे विचित्र घुमावों में से होकर उस पर तब तक चलते रहें जब तक वह उस मैदान में न जा खुले जहाँ परमेश्वर का सिंहासन है। हमारा जीवन प्रभु को जानने के लिये निरन्तर आगे बढ़ते रहना है। जिन अनुभवों में से होकर हमें जाने के लिये बुलाया जाता है, उनमें से कुछ पर हम अचम्भा करते हैं, परन्तु बाद में हम देखते हैं कि उन्होंने हमें अपने प्रभु का कुछ नया ज्ञान दिया। . . . हमें किसी अधिक उज्ज्वल अवसर की प्रतीक्षा नहीं करनी है; परन्तु वर्तमान का सदुपयोग करके हमें अपने लिये उस भविष्य तक एक पुल बनाना है। —जी. बोवेन
8 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 18अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर निकल जा। उत्पत्ति 12:1। अब्राहम . . . अपने लोगों में जा मिला। उत्पत्ति 25:8। सारी सहभागिता के होते हुए भी हम मानो टापुओं पर रहते हैं, जो एक बड़े द्वीपसमूह में बिखरे हुए हैं,
हर एक अपनी छोटी-सी चट्टान पर, और हमारे बीच समुद्र थपेड़े मारता रहता है; परन्तु वह समय आता है जब, यदि हमारे हृदय उस महान प्रभु पर लगे हों जिसकी उपस्थिति हमें एक बनाती है, तो समुद्र फिर न रहेगा और सारी अलग-थलग चट्टानें एक बड़े महाद्वीप के भाग बन जाएँगी। . . . यदि हम वर्तमान से अलगाव की, और इस बात की भावना को पोषित करें कि हमारे सच्चे नाते अनदेखे लोक में हैं, यदि हम यहाँ परदेशियों की नाईं रहें क्योंकि हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है, तो मृत्यु हमें हमारे साथियों से घसीटकर अलग न करेगी और न हमें खदेड़कर किसी सूने देश में ले जाएगी, वरन हमें वहाँ ले आएगी जहाँ और भी घनिष्ठ बन्धन उन “मधुर मण्डलियों” को एक साथ बाँधेंगे, और भेड़ें एक दूसरे से सटकर बैठेंगी क्योंकि वे सब उस एक चरवाहे के चारों ओर इकट्ठी होंगी। तब बहुत से टूटे बन्धन फिर से बुने जाएँगे, और अकेला भटकनेवाला उन प्रियजनों से फिर मिलेगा जिनसे उसने “बहुत पहले प्रेम किया था और कुछ समय के लिये खो दिया था।” —एलेक्स. मैक्लारेन
9 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 19तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे। यशायाह 30:18। परमेश्वर का यही ढंग है। रात के सबसे अन्धेरे पहरों में उसके पाँवों की आहट लहरों के ऊपर से पास आती है। जब प्राणदण्ड के दिन की पौ फट ही रही होती है, तब स्वर्गदूत पतरस की कोठरी में आता है। जब मोर्दकै के लिये फाँसी का खम्भा तैयार हो जाता है, तब राजा की अनिद्रा उस संकट में पड़ी जाति के पक्ष में पासा पलट देती है। आह, प्रिय प्राण, हो सकता है कि छुटकारा पाने से पहले आपकी दशा अत्यन्त बिगड़ जाए; परन्तु छुटकारा आपको मिलेगा अवश्य! परमेश्वर आपको प्रतीक्षा करवाता रह सकता है, परन्तु वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखेगा, और अपने अटल वचन को पूरा करने के लिये प्रगट होगा। —एफ़. बी. मेयर
10 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 19वह हमारी जाति से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे आराधनालय को बनाया है। लूका 7:5। संगमरमर और ग्रेनाइट नाशवान स्मारक हैं, और उनके शिलालेख शायद ही कभी पढ़े जाते हैं। अपने नाम मनुष्यों के हृदयों पर खोदिए; केवल वे ही अमर हैं! —थियोडोर कायलर
11 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 20मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूँ, उन सब को . . . ताड़ना देता हूँ। प्रकाशितवाक्य 3:19। मैंने एक बार एक पहाड़ी की नंगी ढलान पर एक काली छाया पड़ी देखी। उसका कारण खोजते हुए मैंने ऊपर निर्मल नीले आकाश में प्रकाश के समान उजला एक छोटा-सा बादल तैरता देखा। हमारे दुःख के साथ भी ऐसा ही है। वह यहाँ पृथ्वी पर अन्धकारमय और उदास हो सकता है; फिर भी ऊपर देखिए, तो आप पाएँगे कि वह उसकी ज्योति की एक छाया मात्र है जिसका नाम प्रेम है। —डीन आल्फ़र्ड
12 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 20इन पत्थरों का क्या मतलब है? यहोशू 4:21। तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं। 1 पतरस 2:5। (आर. वी.) किसी मसीही के जीवन और चाल-चलन में कुछ ऐसा उल्लेखनीय, ऐसा निराला होना चाहिए कि लोग यह पूछने पर विवश हो जाएँ, “इसका क्या मतलब है?” . . . क्या आपके चरित्र, वचनों और जीवन की आदतों में आपके चारों ओर के संसार से इतना भिन्न कुछ है कि लोग अनायास ही अपने आप से या दूसरों से यह पूछने पर विवश हो जाएँ, “इसका क्या मतलब है?” इसका अर्थ यह नहीं कि कोई बनावटी विलक्षणता हो, केवल निराला दिखने के लिये कोई निरालापन हो; वह तो प्राचीन दिनों के फरीसीपन की नकल मात्र होगा। . . . ओह, काश हम यह समझ लें कि परमेश्वर हमें इसी उद्देश्य से संसार में भेजता है, जैसे उसने अपने एकलौते पुत्र को भेजा! —एस. ए. ब्लैकवुड
13 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 20सब . . . ने उसका मुखड़ा स्वर्गदूत का सा देखा प्रेरितों के काम 6:15। चेहरा हर दिन अपनी भोर की प्रार्थना से, और स्वर्ग की ओर खुलनेवाली खिड़कियों से भोर के समय बाहर निहारने से बनता है। —जोसेफ़ पार्कर
14 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 20यहोवा की आज्ञा से वे डेरों में टिके रहते, और यहोवा ही की आज्ञा से वे कूच करते थे। गिनती 9:23। शान्ति और स्थिर ऊँचाई का यही भेद है। यदि
जंगल में किसी इस्राएली के मन में यहोवा से स्वतन्त्र होकर कोई कूच करने की बात समा जाती; यदि वह भीड़ के ठहरे रहने के समय चल पड़ने, या भीड़ के चलते समय रुक जाने की ठान लेता, तो हम सहज ही देख सकते हैं कि उसका परिणाम क्या होता। और हमारे साथ भी सदा ऐसा ही होगा। यदि हम तब चलें जब हमें ठहरना चाहिए, या तब ठहरें जब हमें चलना चाहिए, तो ईश्वरीय उपस्थिति हमारे साथ न रहेगी।—सी. एच. एम.
15 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 21और उसी में तुम पर भी, जब तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। इफिसियों 1:13। प्रभु अपने लोगों पर छाप लगाता है, कि हर कोई उन्हें पहचान ले। आपके विषय में यह छाप लगना आत्मा का आप में प्रभु की समानता उत्पन्न करना है। आप जितने अधिक पवित्र होते जाते हैं, छाप उतनी ही अधिक स्पष्ट और साफ़, और हर आने-जानेवाले के लिये उतनी ही अधिक प्रत्यक्ष होती जाती है, क्योंकि तब लोग आपको पहचान लेंगे कि आप यीशु के साथ रहे हैं। —एन्ड्रयू बोनार
16 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 21कल के दिन के विषय में मत फूल। नीतिवचन 27:1। आनेवाले कल की एकमात्र तैयारी आज का सही उपयोग है। राज-मिस्त्री के हाथ का पत्थर अपने स्थान पर रखा जाना और दूसरे पत्थर को ग्रहण करने के योग्य बैठाया जाना चाहिए। यदि आज पर ध्यान न दिया जाए, तो कल व्यर्थ ही आता है। जो बुलाहट आज आपके पास आती है उसकी उपेक्षा न कीजिए, क्योंकि ऐसी उपेक्षा कल के विषय में फूलने के सिवा और कुछ नहीं। —जी. बोवेन
17 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 21यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरी सहायता करूँगा। यशायाह 41:14। हे मेरे प्राण, क्या यह पर्याप्त नहीं? क्या तुझे एक साथ मिले हुए त्रिएक परमेश्वर की सर्वशक्ति से अधिक बल की आवश्यकता है? क्या तुझे उस बुद्धि से अधिक बुद्धि चाहिए जो पिता में है, उस प्रेम से अधिक प्रेम जो पुत्र में प्रगट होता है, या उस सामर्थ्य से अधिक सामर्थ्य जो आत्मा के प्रभावों में प्रत्यक्ष है? अपना खाली घड़ा यहाँ ले आ! निश्चय यह कुआँ उसे भर देगा।
शीघ्र कर, अपनी घटियों को बटोर, और उन्हें यहाँ ले आ—अपना खालीपन, अपने दुःख, अपनी आवश्यकताएँ। देख, परमेश्वर की यह नदी तेरी आपूर्ति के लिये भरी हुई है; तू इसके सिवा और क्या चाह सकता है? हे मेरे प्राण, अपने इस बल में आगे बढ़। अनादि परमेश्वर तेरा सहायक है! —स्पर्जन
18 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 22हर एक को उसका काम। मरकुस 13:34। परमेश्वर के महान संसार के लिये वही सबसे अधिक करता है जो अपने छोटे-से संसार में सबसे अच्छा करता है। —संकलित
19 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 22जो मछलियाँ तुम ने अभी पकड़ी हैं, उन में से कुछ लाओ। यूहन्ना 21:10। ऐसा क्यों था? ओह, प्रभु चाहता है कि हम उससे केवल पाएँ ही नहीं, वरन उसकी सेवा टहल भी करें; और हमारी सेवा अपने सच्चे उद्देश्य तक तब पहुँचती है जब वह हमारे प्रिय प्रभु का भोजन बन जाती है। उसे यह भाया कि जब वे उसकी मछलियाँ खा रहे थे, तब वह उनकी मछलियाँ खाए। यह वही दोहरा भोज था जिसके विषय में वह प्रकाशितवाक्य के कोमल सन्देश में कहता है, “मैं उसके साथ भोजन करूँगा, और वह मेरे साथ।” —ए. बी. सिम्पसन
20 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 22विश्वास ही से अब्राहम, जब वह ऐसी जगह जाने के लिये बुलाया गया जिसे वह बाद में मीरास में लेनेवाला था, तो उसने आज्ञा मानी। इब्रानियों 11:8। वह किधर जाता है, यह वह न जानता था; उसके लिये इतना जानना ही बहुत था कि वह परमेश्वर के साथ जा रहा है। वह प्रतिज्ञाओं पर उतना नहीं, जितना प्रतिज्ञा करनेवाले पर टिका था। उसने अपने भाग की कठिनाइयों पर नहीं, वरन उस सनातन, अविनाशी, अनदेखे राजा, एकमात्र बुद्धिमान परमेश्वर पर दृष्टि रखी, जिसने उसका मार्ग ठहराने की कृपा की थी, और जो निश्चय ही अपने आप को सच्चा प्रमाणित करेगा। हे महिमामय विश्वास! यह तेरा काम है, ये तेरी सम्भावनाएँ हैं: मुहरबन्द आदेशों के साथ जहाज़ पर चल पड़ने का सन्तोष, क्योंकि सर्वोच्च नौसेनाध्यक्ष प्रभु के प्रेम और बुद्धि पर अडिग भरोसा है; उठ खड़े होने, सब कुछ छोड़ने और मसीह के पीछे हो लेने की तत्परता, क्योंकि यह आनन्दपूर्ण निश्चय है कि पृथ्वी की सबसे उत्तम वस्तु की तुलना स्वर्ग की सबसे छोटी वस्तु से भी नहीं की जा सकती।—एफ़. बी. मेयर
21 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 23यहोवा ज्ञानी परमेश्वर है, और कामों को तौलनेवाला है। 1 शमूएल 2:3। जो कुछ हम उसके पास लाते हैं, परमेश्वर उसे नापता नहीं। वह उसे तौलता है। —मार्क गाय पियर्स
22 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 23ज्योति पाने के बाद तुम ने दुखों के बड़े झमेले को सहा। इब्रानियों 10:32। संसार के साम्हने परमेश्वर के लिये हमारा साहस सदा गुप्त में परमेश्वर के साथ व्यक्तिगत व्यवहार का परिणाम होना चाहिए। अपने आप पर, पाप पर और संसार पर हमारी विजयें सदा पहले वहीं लड़ी जाती हैं जहाँ परमेश्वर की आँख के सिवा और कोई आँख नहीं देखती। . . . यदि हमारे ये गुप्त संघर्ष नहीं होते, तो कोई आश्चर्य नहीं कि हमारे कोई खुले संघर्ष भी न हों। बाहरी संघर्ष का अभाव प्राण की भीतरी नींद को प्रगट कर देता है। —एफ़. व्हिटफ़ील्ड
23 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 23फिलिप्पुस ने नतनएल से मिलकर उस से कहा, कि जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया . . . चलकर देख ले। यूहन्ना 1:45, 46। यह जान लेने के बाद कि “वह हम को मिल गया”, अगला काम यह है कि किसी और को ढूँढ़ें, और उससे कहें, “चलकर देख ले।” —फ़्रांसिस रिडले हैवरगल
24 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 23हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता, कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है; जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है। यूहन्ना 3:8। हम जानते हैं कि हवा वहीं चलना चाहती है जहाँ शून्य स्थान हो। यदि आप हवा का प्रचण्ड झोंका पाते हैं, तो आप जानते हैं कि कहीं कोई खाली स्थान है। मैं इस बात के विषय में पूरी तरह निश्चित हूँ: यदि हम सारे घमण्ड, दम्भ, आत्म-धार्मिकता, स्वार्थ-साधन, और प्रशंसा, सम्मान और उन्नति की लालसा को निकाल बाहर कर सकें—यदि किसी ईश्वरीय सामर्थ्य से हम इन सब से पूरी तरह खाली कर दिए जाएँ, तो आत्मा बड़ी आँधी की सी सनसनाहट के साथ हमें भरने के लिये आ जाएगा। —ए. जे. गॉर्डन
25 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 24तेरी नम्रता ने मुझे बढ़ाया है। 2 शमूएल 22:36। मसीह की नम्रता सबसे सुन्दर आभूषण है जिसे कोई मसीही पहिन सकता है।—विलियम आर्नट
26 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 24याकूब ने भी अपना मार्ग लिया और परमेश्वर के दूत उसे आ मिले। उत्पत्ति 32:1। जिस मार्ग पर परमेश्वर ने हमें चलने की आज्ञा दी है, उसी में हम स्वर्गदूतों को अपने चारों ओर पाएँगे। हम उन्हें अपने ही चुने हुए मार्गों पर भी मिल सकते हैं, यह सच है, परन्तु वह उस प्रकार का स्वर्गदूत होगा जिससे बिलाम मिला था, हाथ में तलवार लिये हुए, पराक्रमी और सुन्दर, परन्तु क्रोध से भरा भी; और अच्छा यही है कि हम उसका सामना न करें! परन्तु मित्र-भाव से सहायता करनेवाले, परमेश्वर के प्रेम के दूत, उसके अनुग्रह के प्रेरित, उन सड़कों पर नहीं फिरते जिन्हें हम अपने लिये बनाते हैं। —एलेक्स. मैक्लारेन
27 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 24मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। यूहन्ना 14:6। स्वर्ग प्रायः दूर और अनजाना-सा जान पड़ता है, परन्तु यदि वही, जिसने वहाँ तक का मार्ग बनाया, हमारा मार्गदर्शक है, तो हमें मार्ग भूलने से डरने की आवश्यकता नहीं। हम बहुत आगे तक देखना नहीं चाहते—केवल इतनी दूर तक कि उसे पहचान सकें और उसके पदचिह्नों को खोज सकें। . . . जो मसीह के पीछे चलते हैं, अन्धकार में से होकर भी, वे निश्चय पिता के पास पहुँचेंगे। —हेनरी वैन डाइक
28 फ़रवरी
मुद्रित पृष्ठ 24जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर . . . निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊँ, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। फिलिप्पियों 3:13, 14। सच्चा काम उस पर पछताने से नहीं होता जो सुधारा नहीं जा सकता, परन्तु जो हम हैं उसका सबसे अच्छा उपयोग करने से होता है। वह इस शिकायत से नहीं होता कि हमारे पास सही औज़ार नहीं हैं, परन्तु जो औज़ार हमारे पास हैं उनका भली भाँति उपयोग करने से होता है। हम जो हैं, और जहाँ हैं, वह परमेश्वर की विधानपूर्ण
व्यवस्था है—परमेश्वर का किया हुआ, चाहे वह मनुष्य का गलत किया हुआ ही क्यों न हो। जीवन भूलों की एक श्रृंखला है, और सबसे अच्छा मसीही वह नहीं जो सबसे कम गलत कदम उठाता है। सबसे अच्छा वह है जो अपनी भूलों को सुधारकर सबसे शानदार विजयें प्राप्त करता है। —एफ़. डब्ल्यू. रॉबर्टसन
