महान विशेषाधिकार
महान विशेषाधिकार
चौथे अध्याय में, हम देखते हैं कि इस महान उद्धार के कारण हम प्रभु को कैसे पुकार सकते हैं (Heb. 4.16। हमने देखा है कि हमें बचाने में परमेश्वर का एक महान और ऊँचा उद्देश्य है, अर्थात् आनेवाली नई सृष्टि में हमें राजकुमार और राजा बनाना। जो सब प्रभु यीशु के अनमोल लहू से छुड़ाए गए हैं, उन्हें यह विशेषाधिकार प्राप्त है (Rev. 5:9, 10)। उस उद्देश्य के लिये, प्रभु ने अपनी अनुग्रह हमारी सब आवश्यकताओं, कमियों और निर्बलताओं के लिये उपलब्ध कराई है। उसके अनुग्रह के सिंहासन के सामने आने से हम उसकी अनुग्रह पा सकते हैं। हमारी परीक्षा, परीक्षण, क्लेश या कठिनाई चाहे जो भी हो, उसकी अनुग्रह हमारे लिये पर्याप्त है। हमारी आवश्यकता एक बड़े पहाड़ के समान हो सकती है, फिर भी प्रभु यीशु मसीह स्वयं हमें विश्वास के साथ साहसपूर्वक अपने अनुग्रह के सिंहासन के सामने आने के लिये आमन्त्रित करता है। इसीलिये हमें परमेश्वर की अनुग्रह के बारे में, और उसे कैसे पाएँ और उसका आनन्द लें, इस बारे में और अधिक सीखना चाहिये।
हम अपना मसीही जीवन केवल उसकी अनुग्रह से आरम्भ करते हैं, न कि किसी मानवीय योग्यता से। परमेश्वर अनन्त धार्मिकता की माँग करता है। परमेश्वर की धार्मिकता और हमारी धार्मिकता में कोई तुलना नहीं है। इस महान उद्धार को पाने के लिये हम में से किसी के पास तनिक भी योग्यता नहीं है। यह केवल परमेश्वर की अनुग्रह से और प्रभु यीशु मसीह के अनमोल लहू की सामर्थ्य में हमारे विश्वास से ही है, कि हम यह उद्धार पा सकते हैं (Eph. 2:58) और परमेश्वर की महिमा और अनुग्रह को प्रकट कर सकते हैं। प्रेरित पौलुस साक्षी देता है 1 Cor. 15:10, “परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से मैं जो कुछ हूँ, वह हूँ।” इसका अर्थ है कि उसने प्रभु के लिये जो कुछ किया या सहा, वह केवल परमेश्वर की अनुग्रह से ही था। परमेश्वर के सेवक के रूप में वह अनेक क्लेशों में से गुजरा। उसे अपनी अनुग्रह का पूरा अर्थ सिखाने के लिये, प्रभु ने उसके शरीर में एक पीड़ादायक काँटा रहने दिया: जिसे दूर करने के लिये उसने प्रभु से तीन बार विनती की। हमें नहीं मालूम कि वह काँटा क्या था, परन्तु वह बहुत पीड़ादायक था। परमेश्वर का उत्तर था, “मेरी अनुग्रह तेरे लिये बहुत है।” फिर उसने बाद में गवाही दी, “इसलिये मैं मसीह के निमित्त निर्बलताओं में, निन्दा में, दरिद्रता में, उपद्रवों में, और संकटों में सन्तुष्ट रहता हूँ; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूँ, तभी बलवन्त होता हूँ।” इस प्रकार हम पाते हैं कि हमारे सारे क्लेश परमेश्वर द्वारा इसलिये होने दिए जाते हैं कि वे हमें उसकी अनुग्रह का अर्थ सिखाएँ और हमें उसका आनन्द लेने में समर्थ बनाएँ।
इस सारे संसार में सबसे निर्बल विश्वासी भी उसकी अनुग्रह का दावा करके बलवन्त बन सकता है। हमें अपनी निर्बलताओं या कमियों के लिये उदास या निराश होने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि हमें अनुग्रह के सिंहासन तक साहसपूर्वक पहुँच प्राप्त है। हमारे लिये प्रभु हर सम्भव परीक्षा में से गुज़रा, फिर भी पाप रहित रहा। इसीलिये वह अब हमारी सब मानवीय निर्बलताओं के लिये हमारे लिये मध्यस्थता कर रहा है। जब मुझे लगता है कि मेरी शक्ति क्षीण हो रही है, मेरी परीक्षा मेरे लिये बहुत अधिक है, मेरा विश्वास अधिकाधिक निर्बल होता जा रहा है, और मेरा हृदय संदेहों से भर जाता है, तो मैं कहता हूँ, “हे प्रभु यीशु मसीह, तू मेरा महायाजक है, कृपया मेरी ओर से मध्यस्थता करके मुझे उठा। अब मुझे अपनी भरपूर अनुग्रह दे”। वह मुझे साहस, विश्वास और शक्ति देता है।
कृपया अपनी स्वर्गीय बुलाहट को समझें। आप चाहे कितने भी निर्बल क्यों न हों, प्रभु के पास आपको अपने सिंहासन तक लाने का हर प्रबन्ध है। यदि आपको कोई संदेह हो, तो महायाजक, प्रभु यीशु मसीह की मध्यस्थता सेवकाई का दावा करें। विश्वास करें कि उसने वे ही परीक्षाएँ सहीं जिनका आप सामना कर रहे हैं। वह ठीक-ठीक जानता है कि आप किस दौर से गुजर रहे हैं और उसकी अनुग्रह पूरी तरह पर्याप्त है। प्रभु हमें अपनी स्वर्गीय बुलाहट के लिये उस अनुग्रह का दावा करना सिखाए।
