पादरियों को सम्बोधन
An Address to the Clergy
जॉन वेस्ली
यह हिन्दी संस्करण अंग्रेज़ी मूल से पूर्ण रूप से, अनुच्छेद-दर-अनुच्छेद, कृत्रिम बुद्धि (AI) की सहायता से अनुवादित है; मानवीय समीक्षा जारी है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
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इस पुस्तक के बारे में
6 फ़रवरी 1756 को लन्दन से लिखा गया जॉन वेस्ली का "पादरियों को सम्बोधन" दो प्रश्नों की जाँच करता है: हमें कैसे मनुष्य होना चाहिए? और क्या हम ऐसे हैं, या नहीं? वेस्ली प्राकृतिक और अर्जित वरदानों की, और फिर सेवक के उद्देश्य, स्नेह और आचरण में परमेश्वर के अनुग्रह की चर्चा करते हैं, और हर सेवक को परमेश्वर के सामने अपने आप को जाँचने के लिए प्रश्न करते हैं। यह हिन्दी संस्करण अंग्रेज़ी मूल पाठ से पूर्ण रूप से, अनुच्छेद-दर-अनुच्छेद अनुवादित है।
मूल अंग्रेज़ी पाठ सार्वजनिक क्षेत्र (public domain) में है। अंग्रेज़ी वेब संस्करण में पहला पृष्ठ दूसरे पृष्ठ के आरम्भ की प्रतिलिपि है; वह संरचना इस अनुवाद में वैसी ही रखी गई है। यह हिन्दी अनुवाद कृत्रिम बुद्धि (Claude) की सहायता से पूर्ण रूप से किया गया है; मानवीय समीक्षा शेष है। सन्देह की स्थिति में अंग्रेज़ी मूल ही प्रामाणिक है।
लेखक के बारे में
जॉन वेस्ली (1703–1791) एंग्लिकन पादरी, सुसमाचार-प्रचारक और मेथोडिस्ट आन्दोलन के संस्थापक थे। उद्धार, विश्वास द्वारा धर्मी ठहराए जाने, पवित्रता और मसीही सिद्धता पर उनके उपदेश आज भी संसार भर के मसीहियों का मार्गदर्शन करते हैं।
अध्याय
- पादरियों को सम्बोधन≈ 3 मिनट
- पादरियों को सम्बोधन (क्रमशः)≈ 11 मिनट
- पादरियों को सम्बोधन≈ 9 मिनट
- पादरियों को सम्बोधन (क्रमशः)≈ 35 मिनट
