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अध्याय 4

परमेश्वर की वाचा

मेरे सामने चल · बख्त सिंह

परमेश्वर की वाचा

अध्याय चार: परमेश्वर की वाचा

देखें उत्पत्ति 15 में हमारे पास हमारे प्रभु का अब्राहम को दिया गया पाँचवाँ दर्शन है, जब प्रभु ने अब्राहम के विश्वास को परखने के लिए उसे दर्शन दिया।

"परमेश्वर के सारे हथियार" में हमें विश्वास की ढाल दी गई है (इफिसियों 6:16); क्योंकि केवल एक बलवन्त, जीवित विश्वास के द्वारा ही हम शत्रु को हरा सकते हैं। मरकुस 11:22 में प्रभु स्वयं इसे परमेश्वर का विश्वास कहता है, जैसा हम हाशिये में देख सकते हैं। गलातियों 2:20। हमारे में परमेश्वर स्वयं वास करता है तभी हम बलवन्त विश्वास रख सकते हैं। इस दर्शन में परमेश्वर ने अब्राहम से कहा उत्पत्ति 15;'हे अब्राहम, मुझ पर और मेरे वचन पर विश्वास कर'।

परमेश्वर ने आगे कहा: " मैं तेरी ढाल और तेरा अत्यधिक फल हूँ।" भजन संहिता 84:11 में परमेश्वर को " सूर्य और ढाल" कहा गया है। प्रतिफल विश्वास पर निर्भर करता है, हम प्रतिफल कमा नहीं सकते। प्रभु हमें विश्वास देने के लिए दुःखों और परीक्षाओं का उपयोग करता है। (1 पतरस 1:7)। परमेश्वर ने अब्राहम से इतनी स्पष्टता से बात की थी, फिर भी उसके लिए विश्वास करना कठिन था (उत्पत्ति 15:2,3)। अब्राहम अनेक वर्षों से प्रतीक्षा कर रहा था, और यह जानकर कि वह निःसंतान है, वह अपनी संपत्ति अपने मुख्य सेवक के लिए छोड़ते हुए अपनी वसीयत बनाने चला था। परमेश्वर ने उसे इस भूल से बचाने के लिए उसे दर्शन दिया। हमारी सीमाओं के कारण हमें प्रायः अनेक संदेह होते हैं। कभी-कभी हमारा विश्वास बलवन्त हो सकता है, परन्तु संदेह पुनः हमें सताने आ जाते हैं, और परमेश्वर अपने प्रेम और दया में बार-बार हस्तक्षेप करता है।

अंततः परमेश्वर स्वयं सही समय पर अब्राहम को दर्शन दिया। उसने उसे बाहर बुलाकर उससे कहा: "हे अब्राहम, स्वर्ग की ओर देख। अपने आपको मत देख, न अपनी पत्नी को, न अपनी सीमाओं को, न अपनी पत्नी की सीमाओं को। परिस्थितियों को मत देख, परन्तु ऊपर की ओर देख, तब तेरा विश्वास बलवन्त होगा। स्वर्ग की ओर देखकर तारों की गिनती कर, तेरा वंश वैसा ही होगा।"

आज तक कोई नहीं जानता कि तारों की संख्या कितनी है। वे इतने अधिक और इतने दूर हैं। परमेश्वर जानता था कि वह तारों को गिन नहीं सकेगा, परन्तु उसका उद्देश्य उसके विश्वास को बलवन्त करना था, और केवल ऊपर की ओर देखने से ही हमें विश्वास मिल सकता है। शत्रु हमें नीचे की ओर, अपनी सीमाओं, अपनी कमियों या अपनी असफलताओं की ओर देखने पर विवश करेगा। हमारी आँखें निरन्तर उस पर ही टिकी रहनी चाहिए, और हमें विश्वास से उसकी प्रतिज्ञाओं को थाम लेना चाहिए। (पद 13-17)

यिर्मयाह 34:18 इस भाग पर कुछ प्रकाश डालता है। उन दिनों जब दो पक्षों को कोई करार करना होता था, तो वे एक पशु को लेकर उसे मारकर दो भागों में बाँट देते थे। दोनों पक्ष उन पशु के टुकड़ों के बीच से निकलते थे, इस प्रकार एक ऐसी प्रतिज्ञा करते थे जिसे तोड़ा नहीं जा सकता था। उसी प्रकार परमेश्वर अब्राहम के साथ एक वाचा बाँध रहा था; उसने उससे दो पशु और दो पक्षी लेकर (पद 10, 15, 17) उन्हें मारकर दो-दो भागों में काटने को कहा। फिर प्रभु ने एक जलती हुई मशाल उन टुकड़ों के बीच से निकलवाई, इस प्रकार अब्राहम के साथ एक अटूट वाचा बाँधी (पद 13-17)।

अब्राहम परमेश्वर की बात सुन रहा था, और परमेश्वर उसे पहले से बता सका कि उसका वंश एक जाति के रूप में मिस्र में चार सौ वर्ष रहेगा और चौथी पीढ़ी में उस देश में लौट आएगा। परमेश्वर इस प्रकार उस देश के लोगों, अर्थात अमोरियों और हित्तियों को अपने पापों से पश्चाताप करने के लिए चार शताब्दियाँ दे रहा था। यदि वे अपने पापों से पश्चाताप न करते, तो उनका न्याय किया जाना था। लैव्यव्यवस्था 18:23-25 उस देश की अशुद्धता का वर्णन है। जब इस्राएल की सन्तान मिस्र देश से लौट आए, तो परमेश्वर वहाँ रहने वाली जातियों के पश्चाताप करने की चार शताब्दियों से प्रतीक्षा कर रहा था, परन्तु चूँकि उन्होंने पश्चाताप नहीं किया, इसलिए उनका न्याय किया जाना पड़ा। परमेश्वर ने इस्राएल की सन्तान से कहा कि वे उन सब नगरों और उनके निवासियों को पूर्णतः नष्ट कर दें।

प्रभु यीशु मसीह ने आज अपने लहू के द्वारा हमारे साथ एक वाचा बाँधी है और उस वाचा के द्वारा हम उसकी विरासत के अधिकारी बनते हैं। उसी समय हमें उसके द्वारा अन्य शक्तियों का न्याय करने के लिए भी उपयोग किया जाएगा। (1 कुरिन्थियों 6:2, 3) ऐसे विशेषाधिकार के लिए हमें एक बलवन्त, सक्रिय विश्वास दिया जाना चाहिए — ऐसा विश्वास जो संदेहों पर विजय पाता है, और जब वह हमसे बोलता है तो सुनता और आज्ञा मानता है।

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