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मनुष्य जिस प्रकार का बोता है, उसी प्रकार का काटने की आशा रखता है। यदि मैं आपसे कहूँ कि पिछले वर्ष मैंने दस एकड़ में गेहूँ बोया और तरबूज़ उग आए, या मैंने खीरे बोए और शलजम काटे, तो आप इस पर विश्वास नहीं करेंगे। यह एक अटल नियम है कि आप उसी प्रकार का बीज काटते हैं जिस प्रकार का बोते हैं। गेहूँ बोइए और आप गेहूँ काटेंगे, बलूत का फल बोइए और बलूत का पेड़ उगता है, एक छोटा-सा एल्म का पौधा लगाइए और समय आने पर आपके पास एक बड़ा एल्म का पेड़ होगा। एक दिन पूर्व देश के कहानीकार लुक़मान के स्वामी ने उससे कहा, “अमुक खेत में जाकर जौ बो दो।” लुक़मान ने उसके बदले जई बो दी। कटनी के समय उसका स्वामी उस स्थान पर गया, और हरी जई को उगते देखकर उससे पूछा: “क्या मैंने तुमसे यहाँ जौ बोने को नहीं कहा था? तो फिर तुमने जई क्यों बोई?” उसने उत्तर दिया, “मैंने इस आशा में जई बोई कि जौ उग आएगा।” उसके स्वामी ने कहा, “यह कैसा मूर्खतापूर्ण विचार है? क्या तुमने कभी ऐसी बात सुनी है?” लुक़मान ने उत्तर दिया, “आप स्वयं संसार के खेत में निरन्तर बुराई के बीज बोते रहते हैं, और फिर भी पुनरुत्थान के दिन सद्गुण के फल काटने की आशा रखते हैं। इसलिए मैंने भी सोचा कि कदाचित् जई बोकर मुझे जौ मिल जाए।”
स्वामी इस उत्तर से लज्जित हुआ और उसने लुक़मान को स्वतंत्र कर दिया। वनस्पति में समान से समान उत्पन्न होता है, और परिश्रम में भी समान से समान उत्पन्न होता है। यदि किसी मनुष्य ने बढ़ई का काम सीखा है, तो वह घड़ीसाज़ के रूप में श्रेष्ठ होने की आशा नहीं रखता। यदि उसने कानून का ज्ञान प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम किया है, तो वह जीविका के लिए डॉक्टरी करने की आशा नहीं रखता। मनुष्य उसी क्षेत्र में काटने की आशा रखते हैं जिसमें उन्होंने सीखा है। यह नियम परमेश्वर के राज्य में भी ठीक उतना ही सच है जितना मनुष्य के राज्य में; आत्मिक जगत में भी ठीक उतना ही सच है जितना प्राकृतिक जगत में। यदि मैं जंगली बीज बोता हूँ, तो मैं जंगली बीज ही काटूँगा; यदि मैं झूठ बोता हूँ, तो मैं झूठ ही काटूँगा; यदि मैं व्यभिचार बोता हूँ, तो मैं व्यभिचारी काटूँगा; यदि मैं व्हिस्की बोता हूँ, तो मैं शराबी काटूँगा। आप इस नियम को मिटा नहीं सकते, यह लागू है। बाइबल में इससे अधिक गम्भीर कोई दूसरा सत्य नहीं। मान लीजिए कि कोई पड़ोसी, जिससे मैं मिलना नहीं चाहता, मेरे घर आता है और मैं अपने बेटे से कहता हूँ कि यदि वह मेरे विषय में पूछे तो उससे कह देना कि मैं शहर से बाहर गया हूँ। वह दरवाज़े पर जाता है और मेरे पड़ोसी से झूठ बोलता है; छः महीने भी न बीतेंगे कि वह लड़का मुझसे झूठ बोलेगा; मैं वह झूठ काटूँगा। कुछ समय पहले एक मनुष्य ने मुझसे कहा, “आजकल हमें ईमानदार क्लर्क क्यों नहीं मिल पाते?” मैंने उत्तर दिया, “मैं नहीं जानता, परन्तु कदाचित् मैं इसका एक कारण सोच सकता हूँ। जब व्यापारी अपने क्लर्कों को यह सिखाते हैं कि जो माल आधा सूती है उसे पूरा ऊनी बताएँ, और किराने के सामान में मिलावट करके उसे शुद्ध बताएँ, जब वे
सफ़ेद संगमरमर पीसकर उसे पिसी हुई चीनी में मिला देते हैं, और क्लर्क यह जानता है, तो आपको ईमानदार क्लर्क नहीं मिलेंगे।” जब तक व्यापारी अपने क्लर्कों को झूठ बोलना और गलत बातें बताना, देशी माल पर फ्रांसीसी या अंग्रेज़ी लेबल लगाकर उसे आयातित माल बताकर बेचना सिखाते रहेंगे, तब तक उनके क्लर्क बेईमान ही होंगे। बेईमान व्यापारी बेईमान क्लर्क बनाते हैं। मैं कोई कल्पित कथा नहीं सुना रहा, मैं सत्य कह रहा हूँ। यह कविता नहीं, बल्कि गम्भीर गद्य है कि मनुष्य को उसी प्रकार का बीज काटना पड़ता है जिस प्रकार का वह बोता है। शराब बेचने के विरुद्ध यह एक ज़बरदस्त तर्क है। इस प्रश्न के संयम सम्बन्धी और धार्मिक पहलुओं को छोड़ भी दें, तो पृथ्वी पर कोई भी मनुष्य तेज़ शराब बेचने का जोखिम नहीं उठा सकता। यदि मैं आपके बेटे को शराब बेचकर उसे शराबी बना दूँ, तो कोई और मनुष्य मेरे बेटे को शराब बेचकर उसे शराबी बना देगा। शराब बेचनेवाले हर मनुष्य का कोई बेटा या भाई या कोई और सम्बन्धी शराबी है। शराब के व्यापारियों के बेटे कहाँ हैं? उनकी बेटियाँ किससे ब्याही गई हैं? चारों ओर देखिए और पता लगाइए कि क्या आपको कोई ऐसा मनुष्य मिलता है जो बीस वर्ष से उस व्यापार में हो और जिसके अपने परिवार में कोई छिपा हुआ कलंक न हो। मैंने एक बार यह चुनौती दी, और अगले दिन एक मनुष्य ने मुझसे कहा, “मैं कल रात आपकी सभा में नहीं था, परन्तु मैंने सुना है कि आपने यह चौंका देनेवाली बात कही कि कोई ऐसा मनुष्य नहीं जो बीस वर्ष से शराब के व्यापार में रहा हो और जिसके अपने परिवार में वह शाप न आया हो।”
“हाँ,” मैंने कहा, “मैंने कहा था।” “यह सच नहीं है,” उसने कहा, “और मैं चाहता हूँ कि आप अपनी बात वापस लें। मेरे पिता शराब बेचते थे, और मैं भी शराब बेचता हूँ, और वह शाप न कभी मेरे पिता के परिवार में आया और न मेरे परिवार में।” मैंने कहा, “क्या! दो पीढ़ियों से वह नारकीय वस्तु बेच रहे हैं, और वह शाप कभी परिवार में नहीं आया! मैं इसकी जाँच करूँगा, और यदि मैं पाऊँ कि मैं गलत हूँ तो मैं अपनी बात उतने ही सार्वजनिक रूप से वापस लूँगा जितने सार्वजनिक रूप से मैंने वह कही थी।” कमरे में उस नगर के दो प्रमुख नागरिक थे, जिनके चेहरों पर, जब वह मनुष्य बोल रहा था, मैंने एक विचित्र भाव देखा। उसके जाने के बाद, उनमें से एक ने कहा: “श्रीमान् मूडी, क्या आप जानते हैं कि उस मनुष्य का अपना सगा भाई शराबी था और कुछ सप्ताह पहले उसने आत्महत्या कर ली और सात बच्चों के साथ एक विधवा छोड़ गया; वे अब उसी के घर में रहते हैं! वह स्वयं भी भयानक शराबी था, जब तक कि अपने भाई की आत्महत्या के आघात ने उसे चंगा न कर दिया।” मैं नहीं जानता कि आप इसे कैसे समझाएँगे, जब तक कि वह यह न सोचता हो कि उसका भाई उसका सम्बन्धी नहीं था। कदाचित् वह कैन के ढंग का कोई मनुष्य था, जो कहता है, “क्या मैं अपने भाई का रखवाला हूँ?” जब मैं शिकागो में एक कलीसिया का पास्टर था, तब हम कामगारों तक पहुँचने का प्रयत्न कर रहे थे। वे कहा करते थे: “दोपहर के भोजन के समय कारखाने में आइए, और हम आपको बोलने का अवसर देंगे।”
मैं उनसे पूछता, “तुम कलीसिया में क्यों नहीं आते?” “अरे,” वे कहते, “वहाँ तो सब कुछ आपकी ही मर्ज़ी से चलता है, और हम पलटकर उत्तर नहीं दे सकते; परन्तु कारखाने में आइए और हम आपसे कुछ प्रश्न पूछेंगे।” इसलिए मैं वहाँ गया, और कभी-कभी उन्होंने मेरे लिए बड़ी कठिन स्थिति पैदा कर दी। जिन पात्रों को वे बार-बार सामने लाते थे उनमें से एक प्रिय पात्र याकूब था। बहुत बार लोगों ने मुझसे कहा है, “आप समझते हैं कि याकूब एक संत था, है न? वह तो बड़ा धूर्त था।” बहुतों ने कहा है कि वे समझते हैं कि याकूब एसाव जितना भी अच्छा नहीं था। इस बात पर ध्यान दीजिए। आप बाइबल में पढ़ते हैं, “मैं याकूब को उसके चालचलन के अनुसार दण्ड दूँगा।” प्रतिफल का यह नियम उसके पूरे जीवन में चलता है; यद्यपि वह परमेश्वर का मित्र, अब्राहम का सम्बन्धी, और वाचा की वंश-परम्परा में तीसरा था, तौभी परमेश्वर ने याकूब से वैसा ही बीज कटवाया जैसा उसने बोया था। किसी ने कहा है कि “याकूब के दुर्भाग्य एक-समान रूप से ऐसे थे कि वे उसे उसके दोषों का चित्र भी और दण्ड भी स्मरण दिलाएँ।” जब इसहाक ने अपने बुढ़ापे में कुछ हिरन का मांस चाहा, और एसाव को उसे लाने के लिए बाहर भेजा, तो याकूब चुपके से बाहर निकल गया और अपने पिता की भेड़-बकरियों में से एक बकरी का बच्चा ले आया, और उसकी माता रिबका ने उसे पकाया; वह उसे अपने बूढ़े अन्धे पिता के पास ले गया और कहा कि मैं एसाव हूँ। बूढ़े ने उसकी आवाज़ पहचान ली, परन्तु उसने बड़ी चतुराई से बकरी के बच्चे की खाल अपने हाथों और गले पर लपेट ली थी; इसलिए बूढ़े ने उसे टटोला और कहा:
“बोल तो याकूब का सा है, पर हाथ एसाव ही के से जान पड़ते हैं।” इसके द्वारा उसने अपने भाई के पहिलौठे का आशीर्वाद पा लिया, परन्तु उसने उसके लिए उसके वास्तविक मूल्य से दस हज़ार गुना अधिक चुकाया। “जो मेरा बटुआ चुराता है, वह कूड़ा-करकट चुराता है।” जो मनुष्य मेरा बटुआ चुराता है, सबसे अधिक हानि उसी की होती है, मेरी नहीं। जब याकूब बूढ़ा हो गया, तो वह निरन्तर इस सन्देह में जीता था कि उसके बेटे उसे धोखा दे रहे हैं। अपने ही पिता को धोखा देने का पाप फल लाया। इस लेन-देन में सबसे बड़ी हानि याकूब की ही हुई। जब एसाव लौटा तो याकूब को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। तब परमेश्वर उससे बेतेल में मिला। “और देखो, यहोवा उसके ऊपर खड़ा होकर कहता है, कि मैं यहोवा, तेरे दादा अब्राहम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूँ: जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझको और तेरे वंश को दूँगा: और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएँगे। और सुन, मैं तेरे संग रहूँगा, और जहाँ कहीं तू जाए वहाँ तेरी रक्षा करूँगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊँगा: मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा न कर लूँ तब तक तुझको न छोड़ूँगा।” लोग याकूब के जीवन में यहाँ तक पढ़ते हैं और कहते हैं, “मैं ऐसे परमेश्वर से और कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहता जो ऐसे मनुष्य के साथ अनुग्रह का व्यवहार करे जिसने इतना नीच काम किया था।” मेरे मित्र, ठहरिए। पद्दनराम तक उसके पीछे चलिए। वह वहाँ बीस वर्ष रहा, और उस
समय में उसकी मज़दूरी दस बार बदली गई। उसने सुन्दर राहेल के लिए सात वर्ष सेवा की, और फिर उसके ऊपर एक दूसरी स्त्री थोप दी गई। याकूब ने छल से पहिलौठे पुत्र का आशीर्वाद प्राप्त किया था, परन्तु लाबान ने व्यंग्य से उसे याद दिलाया, “हमारे यहाँ ऐसी रीति नहीं, कि जेठी से पहिले दूसरी का विवाह कर दें।” उसने पाया कि लाबान भी उसी के समान कड़ा सौदा कर सकता था। जहाँ कहीं आप किसी तेज़, चालाक मनुष्य को पाएँगे, आप सदा यही पाएँगे कि वह अपने चारों ओर ठीक वैसे ही मनुष्यों को खींच लाता है, और जो छल करता है वह स्वयं छला जाएगा। “एक जैसे पंखवाले पक्षी साथ-साथ झुंड बनाते हैं”; निन्दा करनेवाले इकट्ठे होते हैं, और तेज़, चालाक मनुष्य इकट्ठे होते हैं। याकूब ने लाबान में ठीक अपने ही जैसा मनुष्य पाया। यह “हीरे को हीरा काटे” वाली बात थी। थोड़ा और आगे देखिए। याकूब के बारह बेटे थे, परन्तु वह यूसुफ़ और बिन्यामीन से दूसरों की अपेक्षा अधिक प्रेम करता था क्योंकि वे उसकी प्रिय राहेल के बेटे थे। वह यूसुफ़ के साथ पक्षपात करता था, और उसने उसके लिए एक रंगबिरंगा अंगरखा बनवाया। पक्षपात किसी भी परिवार में पुराने आदम को जगा देगा। एक सुबह यूसुफ़ अपने मन की सरलता में एक स्वप्न सुनाता है जिसमें उसके पिता और उसके सब भाइयों ने उसे दण्डवत् किया था। तब उसके भाई उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगे, और जब उसके पिता ने उसे उनका पता लगाने भेजा जब वे भेड़-बकरियाँ चरा रहे थे, तो उन्होंने कहा: “अब वह हमारे हाथ में है; आओ, हम उसको घात करके किसी गड़हे में डाल दें, और यह कह देंगे, कि कोई दुष्ट पशु उसको खा गया।”
बाद में उन्होंने उसे बेच दिया, और उसका रंगबिरंगा अंगरखा लेकर उसे एक बकरी के बच्चे के लहू में डुबोया, और उसे अपने पिता के पास ले जाकर कहा: “हमको यह मिला है; देखकर पहिचान ले कि यह तेरे पुत्र का अंगरखा है कि नहीं।” और उसने उसको पहिचान लिया और कहा, “हाँ, यह मेरे ही पुत्र का अंगरखा है; किसी दुष्ट पशु ने उसको खा लिया है।” अब ध्यान दीजिए: याकूब ने बकरी के बच्चे की खाल से अपने पिता को धोखा दिया, और उसके बेटों ने बकरी के बच्चे के लहू से उसे धोखा दिया। याकूब ने अपने पिता से झूठ बोला, और उसके बेटों ने उससे झूठ बोला। झूठ लौटकर घर आ गया। हर झूठ का आपके पास लौटकर आना निश्चित है। आप इतनी गहरी कब्र नहीं खोद सकते कि उसका पुनरुत्थान न हो। कदम पर कदम, आपके सब पाप लौटकर आएँगे। “जान रखो कि तुमको तुम्हारा पाप लगेगा।” आप सोच सकते हैं कि आप बड़े चतुर और दूरदर्शी हैं, और योजना बना सकते हैं और बातों को ढाँप सकते हैं, परन्तु ऊँचे स्वर्ग की यह आज्ञा है कि कोई पाप ढँका न रहेगा; परमेश्वर उसे उघाड़ देगा। आप सर्वशक्तिमान को धोखा नहीं दे सकते। याकूब ने यह जान लिया। उसे वही काटना पड़ा जो उसने बोया था। फिर दाऊद को देखिए। कुछ वर्ष पहले एक मनुष्य ने मुझसे कहा: “क्या आप नहीं समझते कि दाऊद भी उतना ही नीचे गिरा जितना शाऊल?” हाँ, वह उससे भी नीचे गिरा, क्योंकि परमेश्वर ने उसे उससे भी ऊँचा उठाया था। अन्तर यह है कि जब शाऊल गिरा तो पश्चाताप का कोई चिह्न नहीं था, परन्तु जब दाऊद गिरा, तो उसके टूटे हुए हृदय से विलाप उठा; वहाँ सच्चा पश्चाताप था। पवित्रशास्त्र के सारे वृत्तान्त में कोई भी मनुष्य इतना ऊँचा नहीं उठा और इतना नीचे नहीं गिरा जितना दाऊद। परमेश्वर ने उसे भेड़शाला से लेकर सिंहासन पर बिठाया। उसने उसे
बहुतायत से धन और भूमि दी। वह महिमा के शिखर पर था, और मनुष्यों के बीच प्रिय और सम्मानित था। परन्तु एक दिन, आपको याद होगा, दाऊद राजभवन की छत पर टहल रहा था, और उसने बतशेबा को देखा, और उसके प्रति कामना की, और व्यभिचार का भयानक पाप किया; और फिर, उस पाप को ढाँपने के लिए, उसने बतशेबा के पति को मतवाला किया, और उसकी हत्या करवा दी। यह आज्ञा हुई: “मैं तेरे घराने में से विपत्ति उठाऊँगा, और तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी।” दाऊद का बेटा अम्नोन दाऊद की अपनी ही बेटी के साथ व्यभिचार करता है। अबशालोम अम्नोन के लिए भोज करता है और उसकी हत्या करवा देता है। थोड़े ही समय बाद वह अपने पिता दाऊद को सिंहासन से हटाने के लिए सेना लेकर आता है, और राजभवन की छत पर सबके सामने दाऊद की रखेलियों के साथ व्यभिचार करता है; यदि परमेश्वर सब पर प्रभुता न कर रहा होता, तो वह अपने पिता को मार डालता। दाऊद ने व्यभिचार बोया और उसे अपने ही परिवार में काटा। उसने हत्या बोई और उसे अपने ही परिवार में काटा। मेरा विश्वास है कि जिस बात ने उस पिता के हृदय से वह कड़वा विलाप निकलवाया जब उसने कहा, “हाय मेरे बेटे अबशालोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे अबशालोम! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता,” वह यह तथ्य था कि ये उसके अपने पाप की मज़दूरी थी। जिस समय से वह ऊरिय्याह की पत्नी के साथ उस पाप में गिरा, तब से लेकर अपनी कब्र में उतरने तक, एक के बाद एक लहरें उसके ऊपर से होकर जाती रहीं। यदि परमेश्वर ने दाऊद को नहीं छोड़ा, तो क्या आप सोचते हैं कि यदि हम पाप में गिरें और अपने पापों को मान न लें और उनसे न फिरें, तो वह हमें छोड़ देगा? यदि कभी किसी मनुष्य के पास
[मूल स्कैन का अपठनीय अंश]
अपने पापों को ढाँपने का अवसर था, तो वह दाऊद के पास था। किसी न्यायी या पंचों की यह हिम्मत न थी कि उसके विरुद्ध दण्ड की आज्ञा सुनाएँ। वह काम अँधेरे में किया गया था, परन्तु उसका पाप उस पर आ पड़ा। नातान उसके मार्ग में भेजा गया, और हे जवान, किसी दिन नातान आपके सामने भी प्रगट होगा। यदि आप पश्चाताप न करें और अपने पापों से न फिरें, तो कोई न कोई दूत मार्ग में आपको मारेगा। मेरे मित्र, जैसे दाऊद ने होश में आने पर परमेश्वर को पुकारा, वैसे ही आप अभी क्यों नहीं पुकारते? वही प्रार्थना कीजिए—हमें कितना धन्यवादी होना चाहिए कि वह प्रार्थना हमारे पास है!—आप उसे अभी घुटनों पर क्यों नहीं करते? पाप-क्षमा के लिए दाऊद की प्रार्थना। “हे परमेश्वर, अपनी करुणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे। मुझे भली भाँति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर! मैं तो अपने अपराधों को जानता हूँ, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है। मैंने केवल तेरे ही विरुद्ध
पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे। देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा। देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा। जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊँगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूँगा।
मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिससे जो हड्डियाँ तूने तोड़ डाली हैं वे मगन हो जाएँ। अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल। हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। मुझे अपने सामने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझसे अलग न कर। अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊँगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे। हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊँगा। हे प्रभु, मेरा मुँह खोल दे, तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूँगा। क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता। टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।” इतिहास से उदाहरण। परन्तु आप कहते हैं कि आप बाइबल पर विश्वास नहीं करते। तो इतिहास को देखिए, और देखिए कि यह नियम सच है या नहीं। मैक्सेन्शियस ने कॉन्स्टेन्टाइन को डुबाने के लिए एक नकली पुल बनवाया, परन्तु स्वयं ही डूब गया। बायज़ीद को तैमूरलंग लोहे के उसी पिंजरे में लिए फिरा जो उसने तैमूर-
लंग के लिए बनवाने का इरादा किया था। मैक्सिमिनस ने हज़ारों मसीहियों की आँखें निकलवा दीं; थोड़े ही समय बाद उसकी प्रजा में आँखों का एक भयानक रोग फैल गया, जिससे वह स्वयं भी बड़ी पीड़ा में मरा। वालेंस ने लगभग अस्सी मसीहियों को एक जहाज़ में समुद्र में भिजवाकर जीवित जलवा दिया: वह गोथों से हार गया और भागकर एक झोंपड़ी में जा छिपा, जहाँ वह जीवित जल गया। अलेक्ज़ेंडर छठा उस दाखमधु के विष से मरा जो उसने किसी दूसरे के लिए तैयार किया था। फ्रांस के हेनरी तृतीय को उसी कमरे में छुरा घोंपा गया जहाँ उसने फ्रांसीसी प्रोटेस्टेंटों के क्रूर हत्याकांड की योजना बनाने में सहायता की थी। मैरी एंटोनेट ने, अपने विवाह के लिए नोत्र दाम गिरजाघर को जाते समय, सैनिकों से कहा कि वे सब भिखारियों, लूले-लँगड़ों और चिथड़े पहने लोगों को जुलूस के मार्ग से हट जाने की आज्ञा दें। वह इन दुखियारों का दृश्य सहन नहीं कर सकती थी। थोड़े ही समय बाद, जल्लाद की गाड़ी में बँधी हुई, वह उन भीड़ों के बीच से वधस्थल की ओर ले जाई जा रही थी जो उसे बर्फ़ जैसे ठण्डे और ग्रेनाइट जैसे कठोर हृदयों से देख रही थीं। जब फूलों से पूछा गया कि भूख से मरती हुई जनता कैसे जीवित रहेगी, तो उसने कहा: “उन्हें घास खाने दो।” बाद में, क्रोध से पागल भीड़ ने उसे पेरिस की गलियों में पकड़ लिया, उसे फाँसी पर लटका दिया, उसका सिर एक भाले पर टाँग दिया और उसका मुँह घास से भर दिया।
मनुष्य जितना बोता है, उससे अधिक काटता है।
“पर कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।”—मत्ती 13:8।
