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पापियों में सबसे बड़े पर अनुग्रह की बहुतायत

Grace Abounding to the Chief of Sinners

जॉन बनयन

पापियों में सबसे बड़े पर अनुग्रह की बहुतायत

यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

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1 अध्याय · ≈ 300 मिनट · हिन्दी

इस पुस्तक के बारे में

जॉन बनयन की आत्मिक आत्मकथा — मन-परिवर्तन, संघर्ष और अनुग्रह। यह वेब पुस्तक पूरी पुस्तक को एक ही पृष्ठ पर प्रस्तुत करती है, जिसमें बनयन के अनुच्छेद-क्रमांक और अन्त में पवित्रशास्त्र-सन्दर्भों की अनुक्रमणिका भी सम्मिलित है।

यह हिन्दी अनुवाद UECF.NET के अंग्रेज़ी वेब संस्करण (सार्वजनिक डोमेन पाठ) से किया गया है। मूल पाठ का कोई अंश छोड़ा या जोड़ा नहीं गया है; मूल की पृष्ठ-शीर्ष पंक्तियाँ (रनिंग हेडर) हटा दी गई हैं और अनुक्रमणिका में पवित्रशास्त्र की पुस्तकों के नाम हिन्दी में दिए गए हैं।

जॉन बनयन के बारे में

जॉन बनयन (1628–1688) इंग्लैंड के बेडफ़र्ड के एक ठठेरे और प्रचारक थे। बिना अनुज्ञा प्रचार करने के कारण उन्होंने बारह वर्ष बन्दीगृह में बिताए; वहीं उन्होंने यह आत्मकथा (1666) लिखी और बाद में “मसीही यात्रा” (द पिलग्रिम्स प्रोग्रेस) की रचना की।

अध्याय

  1. अनुग्रह की बहुतायत≈ 300 मिनट
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