परिचय
प्रभु यीशु मसीह की पुनरुत्थान की सामर्थ्य का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुनरुत्थान की सामर्थ्य से ही प्रभु यीशु मसीह मरे हुओं में से जिलाया गया। इसी सामर्थ्य से वह सारी प्रधानता, अधिकार, सामर्थ्य और प्रभुता से, और न केवल इस युग में वरन आनेवाले युग में भी लिये जानेवाले हर एक नाम से बहुत ऊंचा किया गया (Eph. 1: 20-21)। यह सामर्थ्य हमें विजयी से भी बढ़कर बनाने के लिए, और अमर, महिमान्वित शरीरों के साथ राजाओं और याजकों के रूप में प्रभु के साथ रहने में समर्थ बनाने के लिए भी महिमा के साथ प्रकट होती है। आराधना और स्तुति से भरे हृदय के साथ, प्रेरित पौलुस Eph. 1: 3, "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, जिसने मसीह में हमें स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार के आत्मिक आशीषों से आशीषित किया है।" इफिसियों के पहले अध्याय के पहले भाग में पौलुस उन महान आत्मिक आशीषों में से कुछ का उल्लेख करता है, जो जगत की उत्पत्ति से पहले हमारे प्रेमी परमेश्वर ने मसीह यीशु में हमारे लिए तैयार की थीं। पद 15 से आगे, वह समझाता है कि ये आशीषें कैसे हम सब के द्वारा भरपूर रूप से भोगी जा सकती हैं, जो क्रूस पर हमारे लिए पूरे किए गए कार्य में साधारण विश्वास के द्वारा प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरुत्थान में आत्मिक रूप से उसके साथ एक कर दिए गए हैं। इस संबंध में प्रेरित बड़ी उत्कंठा से प्रार्थना कर रहा है कि इफिसुस के विश्वासी जान लें, "उसकी सामर्थ्य हम विश्वास करनेवालों के लिये कैसी असीम रूप से महान है, उसके उस प्रभावशाली सामर्थ्य के अनुसार, जो उसने मसीह में तब दिखाया जब उसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और स्वर्गीय स्थानों में सब से ऊपर अपनी दाहिनी ओर बैठाया … और सब कुछ उसके पांवों तले कर दिया, और उसे सब वस्तुओं पर कलीसिया के लिये सिरका ठहराया, जो उसकी देह है, अर्थात उसकी परिपूर्णता है जो सब में सब कुछ भरनेवाला है" (Eph. 1: 19-23। जिस सामर्थ्य से प्रभु यीशु मसीह फिर से जी उठा और अपने पुनरुत्थान के बाद इतना ऊंचा किया गया, वही सामर्थ्य हम में भी उंडेली गई है। फिर भी, आज विश्वासियों में कितनी आत्मिक दरिद्रता पाई जाती है, क्योंकि वे अपनी सब आवश्यकताओं के लिए इस सामर्थ्य को प्रतिदिन ग्रहण करने में असफल रहते हैं!
