अध्याय 51
अध्याय XVIIIIIII के अपने विश्वास के बारे में, और उसके बचाव के उसके सार्वजनिक क्षेत्र के बारे में...
(३) मेरा पहला प्रस्ताव है, और भविष्य में अपनी आशा न बनाए रखना, और न किसी लाभ की आशा रखना; क्योंकि जितना अधिक मेरे पास होगा, उतना अधिक मैं बन जाऊंगा; और दूसरी जगह में बसे रहना।
हे कलीसिया, तू बहुतों को पकड़ नहीं सकता; वैसे ही यदि तू ऐसा करे, तो वह तेरी मृत्यु के समय तुझे पछताएगा; क्योंकि आम तौर पर यह बताया गया है कि कभी ऐसा न हो कि ऐसे पछतावा करनेवाले की मृत्यु कभी हुई हो। जितना ज़्यादा मैं पकड़े रहूंगा, उतना ज़्यादा स्वामी मेरे पास है, और मुझे और भी बोझ उठाना पड़ेगा; और यह उस प्राण की स्वतंत्रता के विपरीत है, जो आध्यात्मिक जीवन में सबसे अच्छा है। बड़े धन के बन्धे हुए हैं, और उसके बन्धन बन्धे रहते हैं, और ऐसी वस्तुओं की लालसा आत्मा को भ्रष्ट करती है, और मन की शान्ति और मन की शान्ति को भ्रष्ट करती है; और ऐसी चिन्ता अकसर अशुद्ध होती है, और मन की कठोरता से होती है।
उसी प्रकार जैसे ज़्यादा संपत्ति की भूख कट जानी चाहिए, वैसे ही मेरी वर्तमान सम्पत्ति थोड़ी ही कम होनी चाहिए, क्योंकि यदि मैं उन ५५ों को दान कर दूं, जो मेरे पास हैं, तो मुझे और अधिक परिश्रम क्यों करना चाहिए? यदि मैं परमेश्वर को थोड़ा सा दे देता हूं, तो यह उतना ही होता है, जितना कि मैं ने बहुत दिया है; क्योंकि परमेश्वर ने भेंट की, परन्तु भेंट देनेवाले के मन को नहीं तौला; फिर विधवा को धनवानों के साम्हने क्यों ग्रहण किया गया? फिर भी मैं देखता हूं, कि जो कुछ मैं ने दिया है, वह और जो कुछ मुझ को मिला है, यदि मैं उसे और अधिक दूं, तो और भी क्यों अधिक करूं?
मेरी वर्तमान संपत्ति भी काफ़ी है, और हमारे सामान्य जीवन और मेरी स्थिति का संबंध है ।
(4) इस उद्देश्य को हासिल करने के बाद, मैंने संकल्प किया है कि मैं किसी भी कार्डिनल या धर्ममत के लिए अदालत का भुगतान नहीं करूंगा, इसलिए कि इस तरह के उपभोग से कई गिर जाते हैं और पाप में फिर पड़ जाते हैं. तू कमज़ोर है, और यदि आप कर रहे हैं, तो परमेश्वर के प्रति अधीनता दिखाने के लिए, कई खतरों का सामना करना होगा. तू तो मृत्यु के निकट है, और किसी प्रकार के सुख विलास का भार उठाने के लिये इतना दृढ़ नहीं।
तू लेन- देन के लिये स्वामी की सेवा न करना, और न किसी काम के विषय में ज्योतिष- विद्या का अभ्यास करना; और न किसी मनुष्य को संसार में किसी प्रकार की अशुद्धता के कारण तुझे मना करना चाहिए, क्योंकि ये बहुत से बुरे काम हैं, और वे सन्देह और अविश्वास के कारण अशुद्ध हैं ।
और ये भी महज़ तुम्हारा दीन है फिर तो तुम लोगों को इस दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी से निहाल कर दिया है पस तुम उसके हुक्म पर चलो और उसको मज़बूती से पकड़ लो और नेकी करो और नेकी करने वालों में से हो जाओ तुम उन कालों को कभी न देखना जो यात्रा के लिये कठिन हैं, और न लोहू बहाने के लिये, न किसी और वस्तु के लिये, जो वायुमंडल के घनत्व पर विचार करने के लिये रखी गई है, क्योंकि ऐसा उत्सुक चुनाव 56 आज्ञाओं और पवित्रा पिता द्वारा वर्जित है।