अध्याय 5
र नहीं, परन्तु अपने ही उद्देश्य और उस अनुग्रह के अनुसार, जो मसीह यीशु मे
उपदेश III।
2 तीमुथियुस, अध्याय 1, पद 9 और 10।
9. जिस ने हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से हमें बुलाया; हमारे कामों के अनुसार नहीं, पर अपने ही उद्देश्य और उस अनुग्रह के अनुसार जो सनातन से मसीह यीशु में हम पर हुआ;
10. पर अब हमारे उद्धारकर्ता मसीह यीशु के प्रगट होने से प्रकाशित हुआ, जिस ने मृत्यु का नाश किया, और जीवन और अमरता को सुसमाचार के द्वारा प्रकाशित कर दिया।
आज प्रातःकाल हमने सन्त पौलुस के पाठ के अनुसार दिखाया कि यदि हम यह जानना चाहें कि हमारे उद्धार में हमारे परमेश्वर की दया कितनी मुफ़्त है, तो हमें उसकी सनातन युक्ति तक पहुँचना होगा, जिसके द्वारा उसने जगत की उत्पत्ति से पहले हमें चुन लिया। क्योंकि वहाँ हम देखते हैं कि उसने न हमारे व्यक्तित्व को देखा, न हमारी योग्यता को, और न उन किन्हीं गुणों को जो हम किसी प्रकार ला सकते थे। हमारे जन्म से पहले ही हम उसकी पुस्तक में लिख लिये गए थे; वह हमें अपनी सन्तान के रूप में गोद ले चुका था। इसलिए आओ, हम सब कुछ उसकी दया के हाथ सौंप दें, यह जानते हुए कि हम अपने विषय में घमण्ड नहीं कर सकते, जब तक कि हम उस महिमा को उससे छीन न लें जो उसी की है।
मनुष्यों ने परमेश्वर के अनुग्रह को धुँधला करने के लिए तरह-तरह की कुतर्क-रचनाएँ गढ़ने का प्रयत्न किया है। क्योंकि उन्होंने कहा है कि यद्यपि परमेश्वर ने जगत की उत्पत्ति से पहले मनुष्यों को चुना, तथापि यह इस आधार पर हुआ कि उसने पहले से देख लिया था कि एक मनुष्य दूसरे से भिन्न होगा। पवित्रशास्त्र स्पष्ट दिखाता है कि परमेश्वर ने मनुष्यों को चुनते समय यह प्रतीक्षा नहीं की कि वे योग्य हैं या नहीं; परन्तु कुतर्कियों ने सोचा कि वे यह कहकर परमेश्वर के अनुग्रह को धुँधला कर सकते हैं कि यद्यपि उसने बीते हुए गुणों का विचार नहीं किया, तो भी उसकी दृष्टि आगे होनेवाले गुणों पर थी। क्योंकि वे कहते हैं कि यद्यपि याकूब और उसके भाई एसाव ने न भला किया था न बुरा, और परमेश्वर ने एक को चुना और दूसरे को ठुकराया, तो भी उसने पहले से देख लिया था (क्य
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