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डी. एल. मूडी का एक उपदेश — मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो? मूल पाठ: मत्ती 22:42 — मैं समझता हूँ कि इसे पढ़नेवालों में कोई ऐसा नहीं है जिसने मसीह के विषय में कम या अधिक न सोचा हो। आपने उसके विषय में सुना है, और लोगों को उसके विषय में प्रचार करते सुना है। लगभग उन्नीस सौ वर्षों से लोग उसके विषय में बातें करते आए हैं, और उसके विषय में सोचते आए हैं। कुछ लोगों ने उसके विषय में — कि वह कौन है — अपना मन बना लिया है, और निःसन्देह कुछ ने नहीं बनाया है। और यद्यपि ये सब वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी आज यह प्रश्न उठता है, और हम में से हर एक से पूछा जाता है: “मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो?” मैं नहीं जानता कि इसे एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य से पूछने के लिये उचित प्रश्न क्यों न समझा जाए। यदि मैं आपसे पूछूँ कि आप किसी प्रसिद्ध सार्वजनिक व्यक्ति के विषय में क्या सोचते हैं, तो आप उसके विषय में पहले से ही अपना मन बना चुके होंगे। यदि मैं आपसे पूछूँ कि आप राष्ट्रपति के विषय में क्या सोचते हैं, तो आप तुरन्त खुलकर बोल देंगे और एक मिनट में मुझे अपनी राय बता देंगे। यदि मैं विदेश मंत्री के विषय में पूछूँ, तो आप बेझिझक मुझे बता देंगे कि आपके पास उसके पक्ष में या उसके विरोध में क्या है। तो फिर लोग प्रभु यीशु मसीह के विषय में अपना मन क्यों न बनाएँ, और उसके पक्ष में या उसके विरोध में अपना स्थान क्यों न ले लें? यदि आप उसके विषय में अच्छा सोचते हैं, तो क्यों न उसके विषय में अच्छा बोलें, और उसकी ओर खड़े हो जाएँ? और यदि आप उसके विषय में बुरा सोचते हैं, और
उसे एक धोखेबाज़ मानते हैं, और यह मानते हैं कि वह जगत का उद्धार करने के लिये नहीं मरा, तो क्यों न आप अपनी आवाज़ उठाएँ, और कह दें कि आप उसके विरोधी हैं? मसीहियत के लिये वह एक सुखद दिन होगा जब लोग बस अपना पक्ष चुन लें — जब हम निश्चित रूप से जान सकें कि वास्तव में कौन उसकी ओर है, और कौन उसके विरोध में है। संसार किसी और के विषय में क्या सोचता है, इसका बहुत कम महत्व है। राजा और राजकुमार, राष्ट्रपति और सेनापति शीघ्र ही चले जाएँगे। हाँ, तुलना में इस बात का बहुत कम महत्व है कि हम उनके विषय में क्या सोचते हैं। उनके जीवन में केवल थोड़े ही लोगों की रुचि हो सकती है; परन्तु पृथ्वी पर रहनेवाले हर एक जीवित प्राणी का सम्बन्ध इस मनुष्य से है। संसार के सामने प्रश्न यह है, “मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो?” मैं आपसे यह नहीं पूछता कि आप एपिस्कोपल कलीसिया के विषय में, या प्रेस्बिटेरियन लोगों के, या बैपटिस्ट लोगों के, या रोमन कैथोलिक लोगों के विषय में क्या सोचते हैं; मैं आपसे यह नहीं पूछता कि आप इस पादरी या उस पादरी के विषय में, इस सिद्धान्त या उस सिद्धान्त के विषय में क्या सोचते हैं; परन्तु मैं आपसे यह पूछना चाहता हूँ कि आप उस जीवित व्यक्ति, यीशु मसीह के विषय में क्या सोचते हैं। मैं पूछना चाहूँगा, क्या वह सचमुच परमेश्वर का पुत्र था — वह महान परमेश्वर-मनुष्य? क्या उसने किसी उद्देश्य से स्वर्ग छोड़ा और इस संसार में नीचे आया? क्या वह सचमुच खोए हुओं को ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने के लिये आया था? मैं चरनी से आरम्भ करना चाहूँगा, और उन तैंतीस वर्षों में, जब वह यहाँ पृथ्वी पर था, उसके पीछे-पीछे चलना चाहूँगा। मैं आपसे पूछना चाहूँगा कि आप उसके इस संसार में आने के विषय में, और एक चरनी में जन्म लेने के विषय में क्या सोचते हैं, जबकि वह एक महल भी हो सकता था; उसने स्वर्ग का वैभव और महिमा, और स्वर्गदूतों का राजसी दल क्यों छोड़ दिया; वह महलों और मुकुटों और प्रभुता को छोड़कर अकेला यहाँ नीचे क्यों आया? मैं पूछना चाहूँगा कि आप एक शिक्षक के रूप में उसके विषय में क्या सोचते हैं। किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें न कीं जैसी उसने कीं। मैं एक प्रचारक के रूप में उस पर विचार करना चाहूँगा। मैं आपको उस पहाड़ की ढलान पर ले चलना चाहूँगा, कि हम उन वचनों को सुनें जो उसके कोमल होंठों से निकलते हैं। आज के प्रचारकों की बात करते हैं! मैं हज़ार
बार यह पसन्द करूँगा कि संसार के सब बुद्धिमानों को जीवन भर सुनने के बजाय मसीह के चरणों में पाँच मिनट बैठूँ!
मैं आपसे पूछना चाहूँगा कि आप एक वैद्य के रूप में उसके विषय में क्या सोचते हैं। यदि कोई मनुष्य मसीह के समान चंगा कर सके, तो उसे बहुत जल्दी एक चिकित्सक के रूप में प्रसिद्धि मिल जाए। उसके पास कभी कोई ऐसा रोगी नहीं लाया गया जिससे वह निपट न सका हो। उसे केवल वचन कहना होता था, और रोग उसके सामने से भाग जाता था। देखिए, कोढ़ से भरा हुआ एक मनुष्य आ रहा है। “हे प्रभु, यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है,” वह पुकारता है। “मैं चाहता हूँ,” वह महान वैद्य कहता है, और पल भर में कोढ़ जाता रहता है। संसार में असाध्य रोगों के लिये अस्पताल हैं, परन्तु उसके लिये कोई भी रोग असाध्य नहीं था। अब उसे बैतनिय्याह के उस छोटे से घर में देखिए, जहाँ वह मार्था और मरियम के घायल हृदयों पर पट्टी बाँध रहा है, और मुझे बताइए कि शान्ति देनेवाले के रूप में आप उसके विषय में क्या सोचते हैं। वह विधवा का पति और अनाथों का पिता है। थके-माँदे लोग उसकी छाती पर विश्राम-स्थान पा सकते हैं, और मित्रहीन लोग उसे अपना मित्र मान सकते हैं। वह कभी बदलता नहीं, वह कभी विफल नहीं होता, वह कभी मरता नहीं। उसकी सहानुभूति सदा ताज़ी है, उसका प्रेम सदा सेंत-मेंत है। हे विधवाओ और अनाथो, हे शोकित और विलाप करनेवालो, क्या आप शान्ति देनेवाले मसीह के लिये परमेश्वर का धन्यवाद नहीं करेंगे? परन्तु ये वे बातें नहीं हैं जिन पर मैं अभी विचार करना चाहता हूँ। आइए, हम उन लोगों के पास चलें जो मसीह को जानते थे, और उनसे पूछें कि वे उसके विषय में क्या सोचते थे। आजकल यदि आप जानना चाहते हैं कि कोई मनुष्य कैसा है, तो उन लोगों से उसके विषय में पूछताछ कीजिए जो उसे सबसे अच्छी तरह जानते हैं। मैं पक्षपात नहीं करना चाहता; हम मसीह के शत्रुओं और मित्रों, दोनों के पास चलेंगे। हम उसके मित्रों और उसके शत्रुओं से पूछेंगे, “मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो?” यदि हम केवल उन्हीं के पास जाएँ जो उसे पसन्द करते थे, तो आप कहेंगे, “अरे, वह तो इतना अन्धा है; वह उस मनुष्य को इतना अधिक मानता है कि उसे उसके दोष दिखाई ही नहीं देते। उससे आपको कुछ नहीं मिलेगा, सिवाय उसके पक्ष की बातों के; यह तो पूरी तरह एकतरफ़ा मामला है।” इसलिये हम सबसे पहले उसके शत्रुओं के पास चलेंगे, उनके पास जिन्होंने उससे घृणा की, उसे सताया, उसे शाप दिया और उसे मार डाला। मैं आपको जूरी के कटघरे में बैठाऊँगा, और उन्हें बुलाऊँगा कि वे हमें बताएँ कि वे उसके विषय में क्या सोचते हैं।
गवाहों में सबसे पहले, आइए हम फरीसियों को बुलाएँ। हम जानते हैं कि वे उससे कितनी घृणा करते थे। आइए, हम उनसे कुछ प्रश्न पूछें। आओ, फरीसियो, हमें बताओ कि परमेश्वर के पुत्र के विरुद्ध तुम्हारे पास क्या है! मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो? सुनिए, वे क्या कहते हैं! “यह तो पापियों को ग्रहण करता है।”
उसके विरुद्ध लाने के लिये कैसा तर्क है! अरे, यही तो वह बात है जिसके कारण हम उससे प्रेम करते हैं! यही तो सुसमाचार की महिमा है। वह पापियों को ग्रहण करता है। यदि वह ऐसा न करता, तो हमारा क्या होता? क्या उसके विरुद्ध लाने के लिये तुम्हारे पास इसके सिवा और कुछ नहीं है? अरे, यह तो उसकी की गई सबसे बड़ी प्रशंसाओं में से एक है! एक बार फिर: जब वह काठ पर लटका हुआ था, तब तुमने उसके विषय में यह कहा था, “इसने औरों को बचाया, और अपने को नहीं बचा सकता।” तो वह औरों को बचाने के लिये मरा, परन्तु वह अपने आप को भी बचाए और हमें भी, यह कैसे हो सकता था? उसने तुम्हारे और मेरे प्राण के लिये अपना प्राण दे दिया। हाँ, फरीसियो, तुमने अपने जीवन में एक बार तो सच कहा! उसने औरों को बचाया। वह औरों के लिये मरा। वह बहुतों की छुड़ौती बना; इसलिये उसके विषय में तुम जो सोचते हो वह बिलकुल सच है — “इसने औरों को बचाया, और अपने को नहीं बचा सकता।” अब आइए, हम काइफा को बुलाएँ। उसे अपने लहराते हुए वस्त्रों में यहाँ खड़ा होने दो; आइए, हम उससे उसकी गवाही माँगें। काइफा, जब मसीह का मुकद्दमा चला तब तुम महायाजक थे। तुम महासभा के अध्यक्ष थे। जब उन्होंने उसे दोषी ठहराया तब तुम सभा-भवन में थे। तुमने स्वयं उसे दण्ड की आज्ञा दी। हमें बताओ, गवाहों ने क्या कहा? किस आधार पर तुमने उसका न्याय किया? उसके विरुद्ध क्या गवाही लाई गई? “इसने परमेश्वर की निन्दा की है,” काइफा कहता है। “इसने कहा, ‘अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सामर्थ्य की दाहिनी ओर बैठे, और स्वर्ग के बादलों पर आते देखोगे।’ जब मैंने यह सुना, तो मैंने
उसे परमेश्वर की निन्दा का दोषी पाया, मैंने अपने वस्त्र फाड़े, और उसे मृत्यु-दण्ड दिया।” हाँ, उनके पास उसके विरुद्ध बस यही था कि वह परमेश्वर का पुत्र था; और उन्होंने उसे इसलिये मार डाला कि उसने अपनी दुल्हन के लिये आने की प्रतिज्ञा की थी। अब आइए, हम पिलातुस को बुलाएँ। उसे गवाहों के कटघरे में आने दो। पिलातुस, यह मनुष्य तुम्हारे सामने लाया गया था। तुमने उसकी जाँच की। तुमने आमने-सामने उससे बातें कीं। मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो? “मैं उसमें कुछ भी दोष नहीं पाता,” पिलातुस कहता है। “उसने कहा कि वह यहूदियों का राजा है” (जैसा उसने क्रूस के ऊपर लिखवाया था), “परन्तु मैं उसमें कुछ भी दोष नहीं पाता।” उस मनुष्य की गवाही ऐसी है जिसने उसकी जाँच की! और जब वह वहाँ यहूदियों की भीड़ के बीच में खड़ा है, तभी एक मनुष्य कोहनियों से रास्ता बनाता हुआ जल्दी-जल्दी आता है। वह दौड़कर पिलातुस के पास पहुँचता है, और हाथ बढ़ाकर उसे एक सन्देश देता है। वह उसे फाड़कर खोलता है; पढ़ते-पढ़ते उसका चेहरा पीला पड़ जाता है — “तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना, क्योंकि मैंने आज स्वप्न में उसके कारण बहुत दुःख उठाया है।” यह पिलातुस की पत्नी की ओर से है — मसीह के विषय में उसकी गवाही। आप जानना चाहते हैं कि उसके शत्रु उसके विषय में क्या सोचते थे? आप जानना चाहते हैं कि एक अन्यजाति मनुष्य क्या सोचता था? तो लीजिए, यह रहा, “उसमें कुछ भी दोष नहीं”; और एक अन्यजाति मनुष्य की पत्नी, “उस धर्मी”! और अब देखिए — यहूदा भीतर आता है। वह तो अच्छा गवाह होना चाहिए। आइए, हम उससे बात करें। आओ, यहूदा, हमें बताओ, मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो? तुम स्वामी को भली-भाँति जानते थे। तुमने उसे चाँदी के तीस सिक्कों में बेच दिया। तुमने चूमा लेकर उसे पकड़वाया। तुमने उसे वे आश्चर्यकर्म करते देखा। तुम यरूशलेम में उसके साथ थे। बैतनिय्याह में, जब उसने लाज़र को मरे हुओं में से बुलाया, तब तुम वहाँ थे। उसके विषय में तुम क्या समझते हो?
मैं उसे प्रधान याजकों के सामने आते हुए देख सकता हूँ; जब वह रुपयों को मेज़ पर पटकता है तो मैं उनकी खनखनाहट सुन सकता हूँ — “मैंने निर्दोष लहू को पकड़वाया है!” यह रहा वह मनुष्य जिसने उसे पकड़वाया, और यह है जो वह उसके विषय में सोचता है! हाँ, मेरे मित्र, परमेश्वर ने हर उस मनुष्य से, जिसका उसके पुत्र की मृत्यु से कोई भी सम्बन्ध था, यह गवाही लिखित रूप में दर्ज करवाई कि वह एक निर्दोष मनुष्य था। आइए, हम उस सूबेदार को लें जो प्राणदण्ड के समय उपस्थित था। रोमी सिपाही उसके अधिकार में थे। उसी ने उनसे कहा था कि उससे उसका क्रूस उठवाएँ। उसी ने आज्ञा दी थी कि उसके पैरों और हाथों में कीलें ठोकी जाएँ, और उसके पंजर में भाला बेधा जाए। सूबेदार को आगे आने दो। “सूबेदार, प्राणदण्ड देनेवाले तुम्हारे अधिकार में थे। तुमने ध्यान रखा कि उसकी मृत्यु की आज्ञा का पालन हो। तुमने उसे मरते देखा। तुमने उसे क्रूस पर से बोलते सुना। हमें बताओ, मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो?” सुनो! उसे देखो! वह अपनी छाती पीट रहा है और पुकारता है, “सचमुच यह परमेश्वर का पुत्र था।” मैं क्रूस पर के डाकू के पास जाकर पूछ सकता हूँ कि वह उसके विषय में क्या सोचता था। पहले तो उसने उसकी निन्दा की और उसे बुरा-भला कहा। परन्तु फिर उसने बेहतर सोचा। “इसने कोई अनुचित काम नहीं किया,” उसने कहा। मैं और आगे जा सकता हूँ। मैं स्वयं दुष्टात्माओं को बुलाकर उनसे उनकी गवाही माँग सकता हूँ। क्या उनके पास उसके विषय में कुछ कहने को है? अरे, दुष्टात्माओं ने भी उसे परमेश्वर का पुत्र कहा! मरकुस में हम अशुद्ध आत्मा को यह चिल्लाते पाते हैं, “हे यीशु, परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र।” लोग कहते हैं, “अरे, मैं विश्वास करता हूँ कि मसीह परमेश्वर का पुत्र है, और क्योंकि मैं बुद्धि से इसे मानता हूँ, इसलिये मेरा उद्धार हो जाएगा।” मैं आपसे कहता हूँ, दुष्टात्माओं ने भी यही किया। और उन्होंने इससे भी अधिक किया — वे थरथराती थीं।
अब आइए, हम उसके मित्रों को बुलाएँ। हम चाहते हैं कि आप उनकी गवाही सुनें। आइए, सबसे पहले हम प्रचारकों के उस राजकुमार को बुलाएँ। आइए, हम अग्रदूत, जंगल के प्रचारक, यूहन्ना को सुनें। स्वयं स्वामी को छोड़, किसी ने इस मनुष्य के समान प्रचार नहीं किया — इस मनुष्य ने, जिसने सारे यरूशलेम और सारे यहूदिया को अपना प्रचार सुनने के लिये जंगल में खींच लिया; इस मनुष्य ने, जो उल्का की चमक के समान जातियों के बीच प्रकट हुआ। यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को अपना चमड़े का पटुका और रोएँ का वस्त्र पहने हुए आने दो, और वह हमें बताए कि वह मसीह के विषय में क्या सोचता है। उसके वचन, यद्यपि वे पलिश्तीन के जंगल में गूँजे थे, सदा के लिये उस पुस्तक में लिखे हुए हैं, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत का पाप उठा ले जाता है।” यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला उसके विषय में यही सोचता था। “मैंने गवाही दी है कि यही परमेश्वर का पुत्र है।” कोई आश्चर्य नहीं कि उसने सारे यरूशलेम और यहूदिया को अपनी ओर खींच लिया, क्योंकि उसने मसीह का प्रचार किया, और जब कभी लोग मसीह का प्रचार करते हैं, तो उनके पीछे चलनेवाले अवश्य ही बहुत होते हैं। आइए, हम पतरस को भीतर बुलाएँ, जो रूपान्तरण के पहाड़ पर उसके साथ था, जो उस रात उसके साथ था जिस रात वह पकड़वाया गया। “आओ, पतरस, हमें बताओ कि मसीह के विषय में तुम क्या सोचते हो। गवाहों के कटघरे में खड़े होकर उसके विषय में गवाही दो। तुमने एक बार उसका इन्कार किया था। तुमने शपथ खाकर कहा था कि तुम उसे नहीं जानते। पतरस, क्या यह सच था? क्या तुम उसे नहीं जानते?” “उसे जानता हूँ!” मैं कल्पना कर सकता हूँ कि पतरस कह रहा है: मैंने उनसे झूठ कहा था। मैं उसे जानता था। उसके बाद मैं उसे यरूशलेम के इन पापियों पर उनका दोष जमाते हुए सुन सकता हूँ। वह उसे “प्रभु भी और मसीह भी” कहता है। पिन्तेकुस्त के दिन उसकी गवाही यही थी। “परमेश्वर ने उसी यीशु को प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।” और परम्परा हमें बताती है कि जब वे पतरस को मृत्यु-दण्ड देने आए, तो उसने अनुभव किया कि वह इस योग्य नहीं
कि उसी रीति से मरे जिस रीति से उसका स्वामी मरा था, और उसने विनती की कि उसे सिर नीचे की ओर करके क्रूस पर चढ़ाया जाए। पतरस उसको इतना अधिक मानता था! अब आइए, हम उस प्रिय चेले, यूहन्ना की बात सुनें। वह मसीह के विषय में किसी भी दूसरे मनुष्य से अधिक जानता था। उसने अपने उद्धारकर्ता की छाती पर अपना सिर रखा था। उसने उस प्रेम-भरे हृदय की धड़कन सुनी थी। यदि आप जानना चाहते हैं कि वह उसके विषय में क्या सोचता था, तो उसके सुसमाचार को देखिए।
मत्ती उसके विषय में ऐसे लिखता है मानो वह अपने सिंहासन से आया हुआ राजसी राजा हो, मरकुस उसे सेवक के रूप में, और लूका मनुष्य के पुत्र के रूप में प्रस्तुत करता है। यूहन्ना अपनी लेखनी उठाता है, और एक ही वार में उसके ईश्वरत्व का प्रश्न सदा के लिये सुलझा देता है। वह आदम के समय से भी पहले तक पीछे जाता है। “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।” प्रकाशितवाक्य को देखिए। वह उसे “चमकता हुआ भोर का तारा” कहता है। अतः यूहन्ना उसके विषय में अच्छा सोचता था, क्योंकि वह उसे भली-भाँति जानता था। हम सन्देह करनेवाले चेले थोमा को बुला सकते हैं। थोमा, तुमने उस पर सन्देह किया था। तुम विश्वास नहीं कर सके कि वह जी उठा है, और तुमने अपनी उँगलियाँ उसके पंजर के घाव में डालीं। तुम उसके विषय में क्या सोचते हो? “हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!” थोमा कहता है। फिर दिकापुलिस को जाइए, और आप पाएँगे कि मसीह वहाँ रहकर दुष्टात्माओं को निकालता रहा है। आइए, हम उस देश के लोगों को बुलाकर पूछें कि वे उसके विषय में क्या सोचते हैं। “उसने जो कुछ किया सब अच्छा किया है,” वे कहते हैं। परन्तु हमारे पास लाने के लिये और भी गवाह हैं। सतानेवाले शाऊल को लीजिए, जो कभी उसके सबसे बुरे शत्रुओं में से एक था। धमकियाँ देता हुआ वह उससे मिलता है। “हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है?” मसीह कहता है; और वह यह भी जोड़ सकता था, “मैंने तेरा क्या बिगाड़ा है? क्या मैंने किसी रीति से तेरी हानि की है? क्या मैं तुझे आशीष देने नहीं आया? शाऊल, तू मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों करता है?” और तब शाऊल पूछता है, “हे प्रभु, तू कौन है?” “मैं यीशु नासरी हूँ, जिसे तू सताता है।” आप देखिए, वह अपने नाम से लज्जित नहीं था; यद्यपि वह स्वर्ग में जा चुका था, फिर भी — “मैं यीशु नासरी हूँ।” उस एक भेंट ने
शाऊल में कैसा परिवर्तन कर दिया! कुछ वर्ष बाद हम उसे यह कहते सुनते हैं, “मैंने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूँ, जिससे मैं मसीह को प्राप्त करूँ।” उद्धारकर्ता के विषय में कैसी गवाही! परन्तु मैं और भी आगे जाऊँगा। मैं पृथ्वी से दूर उस दूसरे लोक में जाऊँगा। मैं स्वर्गदूतों को बुलाऊँगा और उनसे पूछूँगा कि वे मसीह के विषय में क्या सोचते हैं। उन्होंने उसे जगत की उत्पत्ति से पहले पिता की गोद में देखा था। सृष्टि के भोर से पहले, भोर के तारों के एक साथ गाने से पहले, वह वहाँ था। उन्होंने उसे सिंहासन छोड़कर चरनी में नीचे आते देखा। उनके देखने के लिये वह कैसा दृश्य था! इन स्वर्गीय प्राणियों से पूछिए कि तब वे उसके विषय में क्या सोचते थे। एक बार उन्हें बोलने की अनुमति दी जाती है; एक बार स्वर्ग की चुप्पी टूटती है। बैतलहम के मैदानों पर उनके गीत सुनिए, “देखो, मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ, जो सब लोगों के लिये होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है।” वह जगत का उद्धार करने के लिये सिंहासन छोड़ देता है। क्या यह कोई आश्चर्य की बात है कि स्वर्गदूत उसके विषय में अच्छा सोचते थे? फिर वे छुड़ाए हुए पवित्र लोग हैं — जो उसे आमने-सामने देखते हैं। यहाँ पृथ्वी पर उसे कभी पहचाना नहीं गया, ऐसा लगता था कि कोई भी उससे वास्तव में परिचित नहीं था: परन्तु उस लोक में वह जाना जाता था जहाँ वह जगत की उत्पत्ति से था। वहाँ वे उसके विषय में क्या सोचते हैं? यदि हम स्वर्ग से कुछ सुन सकते, तो हम एक ऐसा जयजयकार सुनते जो उसके नाम की महिमा और बड़ाई करता। हमें बताया गया है कि जब यूहन्ना प्रभु के दिन आत्मा में था, और ऊपर उठा लिया गया, तो उसने अपने चारों ओर एक जयजयकार सुना, लाखों और करोड़ों, और हज़ारों-हज़ार स्वरों का, “वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है!” हाँ, वह इन सब के योग्य है। स्वर्ग उसके विषय में कितना भी अच्छा कहे, कम है। आह, काश पृथ्वी उस गूँज को उठा ले, और स्वर्ग के साथ मिलकर
गाए, “वह सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है!” परन्तु एक और गवाह है, जो इन सब से भी ऊँचा है। कुछ लोग सोचते हैं कि पुराने नियम का यहोवा ही नये नियम का मसीह है। परन्तु जब यीशु यूहन्ना से बपतिस्मा लेकर यरदन से बाहर आया, तो स्वर्ग से एक वाणी हुई। परमेश्वर पिता बोला। यह मसीह के विषय में उसकी गवाही थी: “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ।” आह, हाँ! परमेश्वर पिता पुत्र के विषय में अच्छा सोचता है। और यदि परमेश्वर उससे प्रसन्न है, तो हमें भी उससे प्रसन्न होना चाहिए। यदि पापी और परमेश्वर दोनों मसीह से प्रसन्न हैं, तो पापी और परमेश्वर का मिलन हो सकता है। जिस क्षण आप भी पिता के समान कहते हैं, “मैं उससे प्रसन्न हूँ,” और उसे ग्रहण कर लेते हैं, उसी क्षण आप परमेश्वर से ब्याहे जाते हैं। क्या आप इस गवाह पर विश्वास नहीं करेंगे, इस सबसे अन्तिम गवाह पर, जो स्वयं सेनाओं का प्रभु, राजाओं का राजा है? वह इसे एक बार फिर दोहराता है, ताकि सब इसे जान लें। रूपान्तरण के पहाड़ पर पतरस और याकूब और यूहन्ना से वह फिर कहता है, “यह मेरा प्रिय पुत्र है; इसकी सुनो।” और वह वाणी पलिश्तीन भर में, समुद्र से समुद्र तक सारी पृथ्वी पर गूँजती और बार-बार गूँजती चली गई; हाँ, वह वाणी अब भी गूँज रही है। “इसकी सुनो! इसकी सुनो!” मेरे मित्र, क्या आप अभी उसकी सुनेंगे? सुनिए! वह आपसे क्या कह रहा है? “हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।” क्या आप ऐसे उद्धारकर्ता के विषय में अच्छा नहीं सोचेंगे? क्या आप उस पर विश्वास नहीं करेंगे? क्या आप अपने सारे मन और बुद्धि से उस पर भरोसा नहीं करेंगे? क्या आप उसके लिये नहीं जीएँगे? यदि उसने हमारे लिये अपना प्राण दे दिया, तो क्या कम से कम हम इतना भी न करें कि उसके लिये अपना प्राण दे दें? यदि उसने मेरे लिये क्रूस उठाया और उस पर मर गया, तो क्या मुझे उसके लिये उसे उठाने को तैयार नहीं रहना चाहिए? आह, क्या हमारे पास उसके विषय में अच्छा सोचने का कारण नहीं है? क्या आप समझते हैं कि अपनी आवाज़ विरोध में उठाना उचित और भला है —
ऐसे उद्धारकर्ता के विरोध में? क्या आप समझते हैं कि यह चिल्लाना न्यायसंगत है, “उसे क्रूस पर चढ़ा! उसे क्रूस पर चढ़ा?” आह, परमेश्वर हम सब की सहायता करे कि हम उसके एकलौते पुत्र के विषय में अच्छा सोचकर पिता की महिमा करें।
