यह हिन्दी पाठ समीक्षा के लिए तैयार किया गया है। अंग्रेज़ी मूल प्रमाणिक है।

अध्याय 20

पवित्र आत्मा का बपतिस्मा (3 में से भाग 1)

पवित्रशास्त्र में पवित्र आत्मा के संबंध में प्रयुक्त सबसे गहरे अर्थवाले वाक्यांशों में से एक है “पवित्र आत्मा से बपतिस्मा।” इस वाक्यांश का प्रयोग सबसे पहले यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले ने किया। अपने और आनेवाले के विषय में कहते हुए उसने कहा, “मैं तो पश्चाताप के लिये तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूँ, परंतु जो मेरे बाद आनेवाला है वह मुझसे सामर्थी है; मैं उसके जूते उठाने के योग्य नहीं; वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” (मत्ती 3:11)। इस वचन में दूसरा “से” शब्द तिरछे अक्षरों में है; वह यूनानी में नहीं है। यहाँ दो अलग-अलग बपतिस्मों की बात नहीं की गई, एक पवित्र आत्मा से और एक आग से, बल्कि पवित्र पवन और आग का एक ही बपतिस्मा बताया गया है। बाद में यीशु ने भी यही अभिव्यक्ति प्रयोग की। प्रेरितों के काम 1:5 में वह कहता है, “क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।” जब यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले और हमारे प्रभु की यह प्रतिज्ञा प्रेरितों के काम 2:3, 4 (R. V.) में पूरी हुई, तो हम पढ़ते हैं, “और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए।” यहाँ “पवित्र आत्मा से भर जाना” एक और अभिव्यक्ति है जो “पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाने” के समानार्थक रूप में प्रयुक्त हुई है।

प्रेरितों के काम 10:44–46 में हम फिर पढ़ते हैं, “पतरस ये बातें कह ही रहा था कि पवित्र आत्मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया। और जितने खतना किए हुए विश्वासी पतरस के साथ आए थे, वे सब चकित हुए कि अन्यजातियों पर भी पवित्र आत्मा का दान उंडेला गया है। क्योंकि उन्होंने उन्हें नाना प्रकार की भाषा बोलते और परमेश्वर की बड़ाई करते सुना।” बाद में यरूशलेम में पतरस ने स्वयं इस अनुभव का वर्णन इस प्रकार किया, “जब मैं बोलने लगा, तो पवित्र आत्मा उन पर उसी रीति से उतरा जैसे आरंभ में हम पर उतरा था। तब मुझे प्रभु का वह वचन स्मरण आया, जो उसने कहा था, ‘यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।’ अतः जब परमेश्वर ने उन्हें भी वही दान दिया जो हमें प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने से मिला, तो मैं कौन था जो परमेश्वर को रोक सकता?” (प्रेरितों के काम 11:15–17)। यहाँ पतरस कुरनेलियुस और उसके घराने को मिले अनुभव को स्पष्ट रूप से पवित्र आत्मा से बपतिस्मा कहता है; इसलिए हम देखते हैं कि “पवित्र आत्मा उतरा” और “पवित्र आत्मा का दान” व्यवहार में “पवित्र आत्मा से बपतिस्मा” के समानार्थक अभिव्यक्तियाँ हैं। इस आशीष का वर्णन करने के लिए और भी अभिव्यक्तियाँ प्रयुक्त हुई हैं, जैसे “पवित्र आत्मा लो” (प्रेरितों के काम 2:38; 19:2–6); “पवित्र आत्मा उन पर आया” (प्रेरितों के काम 19:2–6); “पवित्र आत्मा का दान” (इब्रानियों 2:4; 1 कुरिन्थियों 12:4, 11, 13); “मैं अपने पिता की प्रतिज्ञा का फल तुम पर भेजता हूँ”; और “जब तक ऊपर से सामर्थ्य न पाओ” (लूका 24:49)।

पवित्र आत्मा का बपतिस्मा क्या है? पहली बात, पवित्र आत्मा का बपतिस्मा एक निश्चित अनुभव है, जिसके विषय में मनुष्य जान सकता है, और उसे जानना चाहिए, कि उसने उसे पाया है या नहीं। यह लूका 24:49 और प्रेरितों के काम 1:4 में हमारे प्रभु की अपने चेलों को दी गई उस आज्ञा से स्पष्ट है कि वे जिस कार्य के लिए उसने उन्हें नियुक्त किया था उसे आरंभ करने के लिए तब तक यरूशलेम से न जाएँ जब तक पिता की यह प्रतिज्ञा उन्हें न मिल जाए। यह प्रेरितों के काम के आठवें अध्याय के पन्द्रहवें और सोलहवें पदों से भी स्पष्ट है, जहाँ हमें साफ़ बताया गया है, “तब तक पवित्र आत्मा उनमें से किसी पर न उतरा था।” यह प्रेरितों के काम के उन्नीसवें अध्याय के दूसरे पद (R. V.) से भी स्पष्ट है, जहाँ पौलुस ने इफिसुस के उस छोटे चेला-समूह से यह निश्चित प्रश्न पूछा, “क्या तुमने विश्वास करते समय पवित्र आत्मा पाया?” स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा पाना इतना निश्चित अनुभव था कि इस प्रश्न का उत्तर हाँ या नहीं में दिया जा सकता था कि उन्होंने पवित्र आत्मा पाया है या नहीं। इस घटना में चेलों ने निश्चित उत्तर दिया, “नहीं,” कि उन्होंने यह तक नहीं सुना था कि पवित्र आत्मा दिया जाता है। उन्होंने यह नहीं कहा जो हमारा Authorized Version उनसे कहलवाता है कि उन्होंने यह भी नहीं सुना कि पवित्र आत्मा है भी या नहीं। वे जानते थे कि पवित्र आत्मा है; वे यह भी जानते थे कि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की निश्चित प्रतिज्ञा है, परंतु उन्होंने यह नहीं सुना था कि वह प्रतिज्ञा पूरी हो चुकी है। पौलुस ने उन्हें बताया कि वह पूरी हो चुकी है, और ऐसे उपाय किए जिनसे उस सभा के समाप्त होने से पहले ही वे निश्चित रूप से पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पा गए। गलातियों 3:2 से भी उतना ही स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा एक निश्चित अनुभव है, जिसके विषय में मनुष्य जान सकता है कि उसने उसे पाया है या नहीं।

इस खंड में पौलुस गलातिया के विश्वासियों से कहता है, “मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूँ कि तुम ने आत्मा को व्यवस्था के कामों से पाया या विश्वास के समाचार से?” उनका आत्मा पाना व्यक्तिगत चेतना की दृष्टि से इतना निश्चित था कि पौलुस उसे अपने तर्क के आधार के रूप में प्रस्तुत कर सका।

हमारे समय में पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के विषय में और उसके लिए की जानेवाली प्रार्थना के विषय में बहुत कुछ ऐसा कहा जाता है जो पूरी तरह धुँधला और अनिश्चित है। लोग सभा में खड़े होकर प्रार्थना करते हैं कि वे पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाएँ, और यदि आप बाद में प्रार्थना करनेवाले के पास जाकर पूछें, “क्या आपने वह पाया जो माँगा था? क्या आपने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया?” तो बहुत संभव है कि वह हिचकिचाए और लड़खड़ाते हुए कहे, “आशा है कि पाया”; परंतु बाइबल में ऐसी कोई अनिश्चितता नहीं है। इस विषय में, जैसे हर अन्य विषय में, बाइबल दिन के समान स्पष्ट है। वह एक ऐसा अनुभव प्रस्तुत करती है जो इतना निश्चित और वास्तविक है कि मनुष्य जान सकता है कि उसने पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाया है या नहीं, और इस प्रश्न का उत्तर हाँ या नहीं में दे सकता है, “क्या तुमने पवित्र आत्मा पाया है?”

दूसरी बात, यह स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पवित्र आत्मा का एक ऐसा कार्य है जो उसके पुनर्जन्म के कार्य से भिन्न और उसके अतिरिक्त है। यह प्रेरितों के काम 1:5 से स्पष्ट है, “क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।” अतः यह स्पष्ट है कि चेलों ने अभी तक पवित्र आत्मा से बपतिस्मा नहीं पाया था; उन्हें थोड़े दिनों के बाद यह बपतिस्मा मिलना था। परंतु जिन मनुष्यों से यीशु ने ये शब्द कहे वे पहले से पुनर्जन्म पाए हुए लोग थे। हमारे प्रभु ने स्वयं उन्हें ऐसा घोषित किया था। उसने उनसे यूहन्ना 15:3 में कहा था, “तुम तो उस वचन के कारण जो मैंने तुम से कहा है, शुद्ध हो।” परंतु वचन के कारण शुद्ध होने का क्या अर्थ है? 1 पतरस 1:23 इस प्रश्न का उत्तर देता है, “क्योंकि तुम नाशवान नहीं, परंतु अविनाशी बीज से, अर्थात् परमेश्वर के जीवित और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नए सिरे से जन्मे हो।” उसी रात कुछ पहले यीशु ने उनसे यूहन्ना 13:10 (R. V.) में कहा था, “जो नहा चुका है, उसे पाँव धोने के सिवाय और कुछ धोने की आवश्यकता नहीं, परंतु वह बिलकुल शुद्ध है; और तुम शुद्ध हो, परंतु सब के सब नहीं।” प्रभु यीशु ने उस प्रेरित-मंडली को शुद्ध अर्थात् पुनर्जन्म पाए हुए घोषित किया था, केवल उस एक को छोड़कर जो कभी पुनर्जन्म पाया हुआ मनुष्य नहीं था, अर्थात् यहूदा इस्करियोती जो उसे पकड़वाने पर था (पद 11 देखें)। शेष ग्यारह को यीशु मसीह ने पुनर्जन्म पाए हुए घोषित किया था। फिर भी वह इन्हीं मनुष्यों से प्रेरितों के काम 1:5 में कहता है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा एक ऐसा अनुभव था जिसे उन्होंने अभी तक नहीं पाया था, जो अभी भविष्य में था। अतः स्पष्ट है कि वचन के द्वारा पवित्र आत्मा से नया जन्म पाना एक बात है, और पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाना उससे भिन्न और उसके अतिरिक्त एक और बात है। प्रेरितों के काम 8:12 (R. V.) की उसी अध्याय के पन्द्रहवें और सोलहवें पदों से तुलना करने पर भी यही बात स्पष्ट होती है।

बारहवें पद में हम पढ़ते हैं कि चेलों की एक बड़ी मंडली ने फिलिप्पुस के परमेश्वर के राज्य और यीशु मसीह के नाम के विषय में प्रचार पर विश्वास किया था, और “प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्मा लिए हुए थे” (पद 16, R. V.)। निश्चय ही बपतिस्मा लिए हुए इन विश्वासियों की इस मंडली में कम से कम कुछ पुनर्जन्म पाए हुए लोग थे। जल-बपतिस्मा का सच्चा रूप चाहे जो भी हो, उन्होंने निस्संदेह सच्चे रूप में ही बपतिस्मा लिया था, क्योंकि बपतिस्मा देनेवाला आत्मा द्वारा नियुक्त मनुष्य था; फिर भी पन्द्रहवें और सोलहवें पदों में हम पढ़ते हैं, “उन्होंने (अर्थात् पतरस और यूहन्ना ने) जाकर उनके लिये प्रार्थना की कि वे पवित्र आत्मा पाएँ; क्योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर न उतरा था; उन्होंने केवल प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्मा लिया था।” वे बपतिस्मा पाए हुए विश्वासी थे; वे प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्मा लिए हुए थे; उनमें से कुछ निश्चय ही पुनर्जन्म पाए हुए थे, फिर भी उनमें से किसी ने अब तक पवित्र आत्मा नहीं पाया था, अर्थात् उससे बपतिस्मा नहीं पाया था। अतः फिर स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पवित्र आत्मा का ऐसा कार्य है जो उसके पुनर्जन्म के कार्य से भिन्न और उसके अतिरिक्त है। कोई मनुष्य पवित्र आत्मा द्वारा पुनर्जन्म पाकर भी पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाए बिना रह सकता है। पुनर्जन्म में आत्मा की सामर्थ्य से जीवन प्रदान किया जाता है, और जो उसे पाता है वह उद्धार पाता है; पवित्र आत्मा के बपतिस्मा में सामर्थ्य प्रदान की जाती है, और जो उसे पाता है वह सेवा के लिए सज्जित होता है। फिर भी पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पुनर्जन्म के क्षण में ही हो सकता है। उदाहरण के लिए कुरनेलियुस के घराने में ऐसा ही हुआ।

प्रेरितों के काम 10:43 में हम पढ़ते हैं कि जब पतरस प्रचार कर रहा था तो वह यीशु के विषय में यहाँ तक पहुँचा कि “उस की गवाही सब भविष्यद्वक्ता देते हैं कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी,” और उसी क्षण कुरनेलियुस और उसके घराने ने विश्वास किया, और तुरंत हम पढ़ते हैं, “पतरस ये बातें कह ही रहा था कि पवित्र आत्मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया। और जितने खतना किए हुए विश्वासी पतरस के साथ आए थे, वे सब चकित हुए कि अन्यजातियों पर भी पवित्र आत्मा का दान उंडेला गया है।” जिस क्षण उन्होंने यीशु के विषय में गवाही पर विश्वास किया, उसी क्षण उन्होंने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया, जल-बपतिस्मा लेने से भी पहले। पुनर्जन्म और पवित्र आत्मा का बपतिस्मा व्यवहार में एक ही क्षण में हुए, और आज भी अनेक अनुभवों में वे ऐसे ही होते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कलीसिया की सामान्य अवस्था में यही सामान्य अनुभव होना चाहिए। परंतु आज कलीसिया सामान्य अवस्था में नहीं है। कलीसिया का एक बहुत बड़ा भाग उसी स्थान पर है जहाँ पतरस और यूहन्ना के उतरने से पहले सामरिया के विश्वासी थे, और जहाँ पौलुस के आकर उन्हें उनके बड़े विशेषाधिकार के विषय में बताने से पहले इफिसुस के चेले थे — बपतिस्मा पाए हुए विश्वासी, प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्मा लिए हुए, पश्चाताप और पापों की क्षमा के लिए बपतिस्मा लिए हुए, परंतु अब तक पवित्र आत्मा से बपतिस्मा न पाए हुए।

फिर भी पवित्र आत्मा का बपतिस्मा हर विश्वासी का जन्मसिद्ध अधिकार है। यह मसीह की प्रायश्चित्तकारी मृत्यु के द्वारा हमारे लिए मोल लिया गया था, और जब वह पिता के दाहिने हाथ पर चढ़ गया तो उसने पिता की प्रतिज्ञा पाई और उसे कलीसिया पर उंडेल दिया; और यदि आज किसी के पास पवित्र आत्मा का बपतिस्मा व्यक्तिगत अनुभव के रूप में नहीं है, तो इसका कारण यह है कि उसने अपने जन्मसिद्ध अधिकार का दावा नहीं किया। मसीह की देह का प्रत्येक अंग संभावित रूप से पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया हुआ है (1 कुरिन्थियों 12:13), “क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हों क्या यूनानी, क्या दास हों क्या स्वतंत्र, एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया।” परंतु ऐसे बहुत से विश्वासी हैं जिनके लिए जो संभावित रूप से उनका है वह वास्तविक, यथार्थ, व्यक्तिगत अनुभव नहीं बना। सब मनुष्य यीशु मसीह की क्रूस पर प्रायश्चित्तकारी मृत्यु में संभावित रूप से धर्मी ठहराए गए हैं, अर्थात् धार्मिकता उनके लिए प्रदान की गई है और उनकी है (रोमियों 5:18, R. V.), परंतु जो संभावित रूप से हर मनुष्य का है, उसे प्रत्येक मनुष्य को मसीह में विश्वास के द्वारा अपना बनाना होता है; तभी धार्मिकता वास्तव में और अनुभव में उसकी होती है; ठीक वैसे ही, यद्यपि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा संभावित रूप से हर विश्वासी की संपत्ति है, फिर भी प्रत्येक व्यक्तिगत विश्वासी को उसे अपने लिए ग्रहण करना होता है, तभी वह अनुभव में उसका होता है। हम इससे भी आगे जाकर कह सकते हैं कि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा से ही मनुष्य पूर्ण अर्थ में मसीह की देह का अंग बनता है, क्योंकि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा से ही उसे वे कार्य करने की सामर्थ्य मिलती है जिनके लिए परमेश्वर ने उसे देह के एक अंग के रूप में ठहराया है।

जैसा हम पहले देख चुके हैं, हर सच्चे विश्वासी में पवित्र आत्मा है (रोमियों 8:9), परंतु हर विश्वासी के पास पवित्र आत्मा का बपतिस्मा नहीं है (यद्यपि जैसा हमने अभी देखा, हर विश्वासी उसे पा सकता है)। पवित्र आत्मा का हमारे भीतर रहना, संभवतः हमारे अस्तित्व के किसी छिपे हुए पवित्रस्थान में, निश्चित चेतना के पीछे रहना, एक बात है; और जिस व्यक्ति में वह निवास करता है उस पर उसका पूरा अधिकार कर लेना एक बिलकुल भिन्न और कहीं अधिक बड़ी बात है। कुछ लोग इस तथ्य पर इतना बल देते हैं कि हर विश्वासी के पास संभावित रूप से आत्मा का बपतिस्मा है, कि वे स्पष्ट सिखाते हैं कि हर विश्वासी के पास वास्तविक अनुभव के रूप में आत्मा का बपतिस्मा है। परंतु जब तक आज आत्मा का बपतिस्मा उससे मौलिक रूप से भिन्न न हो जो आदिम कलीसिया में आत्मा का बपतिस्मा था, वरन जब तक वह बिलकुल अवास्तविक न हो, तब तक या तो उनमें से बहुत बड़ा अनुपात जिन्हें हम सामान्यतः विश्वासी मानते हैं विश्वासी नहीं हैं, या फिर कोई पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाए बिना भी विश्वासी और पुनर्जन्म पाया हुआ मनुष्य हो सकता है। निश्चय ही आदिम कलीसिया में ऐसा ही था। पिन्तेकुस्त से पहले प्रेरितों के साथ ऐसा ही था; इफिसुस की कलीसिया के साथ ऐसा ही था; सामरिया की कलीसिया के साथ ऐसा ही था। और आज हज़ारों हैं जो गवाही दे सकते हैं कि उन्होंने मसीह को ग्रहण किया और नया जन्म पाया, और फिर बाद में, कभी-कभी बहुत बाद में, पवित्र आत्मा से निश्चित अनुभव के रूप में बपतिस्मा पाया।

यह अत्यंत व्यावहारिक महत्व का विषय है, क्योंकि बहुत से लोग उस भरपूरी का आनंद नहीं ले रहे जिसका वे ले सकते थे, क्योंकि वे पवित्रशास्त्र के अलग-अलग पदों को उनकी सीमा से आगे खींचकर और संपूर्ण पवित्रशास्त्र की स्पष्ट शिक्षा के विरुद्ध जाकर अपने आपको यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि वे पहले ही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पा चुके हैं, जबकि उन्होंने नहीं पाया है। यदि वे केवल अपने आप से यह स्वीकार कर लें कि उन्होंने नहीं पाया, तो वे ऐसे कदम उठा सकेंगे जिनसे वे निश्चित व्यक्तिगत अनुभव के रूप में पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पा सकें।

पवित्रशास्त्र की शिक्षा से अगली स्पष्ट बात यह है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा सदा गवाही और सेवा से जुड़ा होता है, और मुख्यतः उन्हीं के उद्देश्य से होता है।

लूका 24:49 में हमारे प्रभु ने इस बपतिस्मा के विषय में, जो उन्हें शीघ्र मिलनेवाला था, कहा, “और देखो, जिसकी प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है, मैं उसको तुम पर भेजता हूँ; और जब तक स्वर्ग से सामर्थ्य न पाओ, तब तक तुम यरूशलेम नगर में ठहरे रहो।” और फिर प्रेरितों के काम 1:5, 8 में उसने कहा, “क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे.... परंतु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम में, और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।” हमारे प्रभु की इस प्रतिज्ञा की पूर्ति के वृत्तांत में प्रेरितों के काम 2:4 में हम पढ़ते हैं, “और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।” इसके बाद पतरस ने जो कहा और उसके परिणाम का विस्तृत वर्णन आता है। परिणाम यह हुआ कि पतरस और अन्य प्रेरितों ने ऐसी सामर्थ्य से बात की कि उस दिन तीन हज़ार लोग पाप के लिए कायल हुए, उन्होंने अपने पाप को त्याग दिया और बपतिस्मा में यीशु मसीह को ग्रहण करने का अंगीकार किया, और उसके बाद वे सदा प्रेरितों की शिक्षा और संगति में, रोटी तोड़ने और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। प्रेरितों के काम के चौथे अध्याय के इकतीसवें से तैंतीसवें पद में हम पढ़ते हैं कि जब एक और अवसर पर प्रेरित पवित्र आत्मा से भर गए, तो परिणाम यह हुआ कि उन्होंने “परमेश्वर का वचन हियाव से सुनाया” और “प्रेरित बड़ी सामर्थ्य से प्रभु यीशु के जी उठने की गवाही देते रहे।” और प्रेरितों के काम के नौवें अध्याय में पौलुस के पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाने का वर्णन है।

सत्रहवें से बीसवें पद में हम पढ़ते हैं, “तब हनन्याह उठकर उस घर में गया, और उस पर हाथ रखकर कहा, ‘हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात् यीशु, जो उस रास्ते में जिससे तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है कि तू फिर दृष्टि पाए और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए।’ और तुरंत उसकी आँखों से छिलके से गिरे, और वह फिर दृष्टि पाकर उठा और बपतिस्मा लिया। फिर भोजन करके बल पाया.... और वह तुरंत आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा कि वह परमेश्वर का पुत्र है,” और बाईसवें पद में हम पढ़ते हैं कि उसने “इस बात का प्रमाण दे देकर कि यही मसीह है, दमिश्क के रहनेवाले यहूदियों का मुँह बंद कर दिया” (R. V.)। 1 कुरिन्थियों 12 में हमें पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की सबसे विस्तृत कलीसियाा मिलती है जो बाइबल के किसी भी खंड में पाई जाती है। यह संपूर्ण विषय पर प्रामाणिक खंड है। और वहाँ जो परिणाम लिखे गए हैं वे सेवा के लिए वरदान हैं। पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का मुख्य उद्देश्य विश्वासियों को प्रसन्न करना नहीं, बल्कि उन्हें उपयोगी बनाना है। यह केवल व्यक्तिगत विश्वासी के आनंदोल्लास के लिए नहीं है, यह मुख्यतः सेवा में उसकी कार्यक्षमता के लिए है। मैं यह नहीं कहता कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा विश्वासी को प्रसन्न नहीं करेगा; क्योंकि आत्मा के फल का एक अंश “आनंद” है, इसलिए यदि कोई पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है तो आनंद अवश्य उत्पन्न होगा। मैंने ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जाना जिसने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया हो और जिसके जीवन में देर-सबेर कोई नया आनंद न आया हो, ऐसा ऊँचा, शुद्ध और भरपूर आनंद जो उसने पहले कभी नहीं जाना था। परंतु यह बपतिस्मा का मुख्य उद्देश्य नहीं है, न ही सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख परिणाम।

इस बात पर बहुत बल देना आवश्यक है, क्योंकि बहुत से मसीही आत्मा के बपतिस्मा की खोज में व्यक्तिगत आनंदोल्लास और परमानंद खोज रहे हैं। वे मसीही जीवन को गहरा करने के लिए सम्मेलनों और सभाओं में जाते हैं और लौटकर बताते हैं कि उन्हें कैसी अद्भुत आशीष मिली, और अपने हृदय में आए किसी नए आनंदोल्लास का उल्लेख करते हैं; परंतु जब आप उन्हें देखते हैं तो यह देखना कठिन होता है कि वे अपने पास्टरों या अपनी कलीसियाओं के लिए पहले से अधिक उपयोगी हो गए हैं, और यह सोचने को विवश होना पड़ता है कि उन्होंने जो कुछ भी पाया हो, पवित्र आत्मा का वास्तविक बपतिस्मा नहीं पाया। आनंदोल्लास और परमानंद अपने स्थान पर ठीक हैं। जब वे आएँ तो उनके लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें — लेखक उनके विषय में कुछ जानता है — परंतु आज के जैसे संसार में, जहाँ पाप, स्वधार्मिकता और अविश्वास इतने प्रबल हैं, जहाँ पुरुषों, स्त्रियों और युवाओं की एक भयानक धारा अनंत विनाश की ओर बही जा रही है, मैं अपना सारा जीवन बिना आनंदोल्लास के एक भी स्पर्श के बिताना पसंद करूँगा, परंतु मसीह के लिए गवाही देने और दूसरों को मसीह के लिए जीतकर उन्हें बचाने की सामर्थ्य रखूँगा, बजाय इसके कि वर्ष के 365 दिन परमानंद में रहूँ पर पाप की भयानक धारा को रोकने और पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों को मेरे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के उद्धारक ज्ञान तक पहुँचाने की सामर्थ्य न हो।

पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का उद्देश्य मुख्यतः विश्वासियों को व्यक्तिगत रूप से पवित्र बनाना नहीं है। मैं यह नहीं कहता कि विश्वासियों को पवित्र बनाना पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है, क्योंकि जैसा हम पहले देख चुके हैं, वह “पवित्रता का आत्मा” है, और हम पवित्रता तक केवल उसी की सामर्थ्य से पहुँच सकते हैं। मैं यह भी नहीं कहता कि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का परिणाम महान आत्मिक परिवर्तन, उन्नति और शुद्धिकरण न होगा, क्योंकि प्रतिज्ञा है, “वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” (और इस संदर्भ में आग का विचार जाँचने, परिष्कृत करने, शुद्ध करने और भस्म करने का विचार है)। पिन्तेकुस्त के दिन प्रेरितों में अद्भुत परिवर्तन हुआ, और पिन्तेकुस्त के बाद से पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाए हज़ारों लोगों में अद्भुत परिवर्तन हुआ है; परंतु पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का मुख्य उद्देश्य गवाही और सेवा में कार्यक्षमता है। इसका संबंध चरित्र के गुणों से अधिक सेवा के वरदानों से है। यह आत्मिक सामर्थ्य या सेवा में वरदानों का प्रदान है, और कभी-कभी कोई व्यक्ति आत्मा की सामर्थ्य से दुर्लभ वरदान पा सकता है और फिर भी आत्मा के गुणों को कम ही प्रकट कर सकता है। (देखें 1 कुरिन्थियों 13:1–3; मत्ती 7:22, 23।) बाइबल के प्रत्येक खंड में जहाँ पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का उल्लेख है, वह गवाही या सेवा से जुड़ा है।

यदि हम रुककर विचार करें कि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के परिणाम क्या हैं, तो संभवतः हमें स्पष्ट विचार मिलेगा कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा वास्तव में क्या है।

पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के परिणाम क्या हैं?

1. पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ सब व्यक्तियों में ठीक एक जैसी नहीं होतीं। यह 1 कुरिन्थियों 12:4–13 से बहुत स्पष्ट दिखाई देता है, “वरदान तो कई प्रकार के हैं, परंतु आत्मा एक ही है। और सेवाएँ भी कई प्रकार की हैं, परंतु प्रभु एक ही है। और प्रभावशाली कार्य कई प्रकार के हैं, परंतु परमेश्वर एक ही है, जो सब में हर प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करता है। किंतु सब के लाभ पहुँचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है। क्योंकि एक को आत्मा के द्वारा बुद्धि की बातें, और दूसरे को उसी आत्मा के अनुसार ज्ञान की बातें दी जाती हैं; और किसी को उसी आत्मा से विश्वास, और किसी को उसी एक आत्मा से चंगा करने के वरदान दिए जाते हैं; फिर किसी को सामर्थ्य के काम करने की शक्ति, और किसी को भविष्यद्वाणी, और किसी को आत्माओं की परख, और किसी को नाना प्रकार की भाषा, और किसी को भाषाओं का अर्थ बताना। परंतु ये सब प्रभावशाली कार्य वही एक आत्मा करवाता है, और जिसे जो चाहता है वह बाँट देता है। क्योंकि जैसे देह एक है और उसके अंग बहुत हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी, एक ही देह हैं, वैसे ही मसीह भी है। क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हों क्या यूनानी, क्या दास हों क्या स्वतंत्र, एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया।” यहाँ हम एक ही बपतिस्मा देखते हैं, परंतु उस बपतिस्मा की सामर्थ्य की अभिव्यक्तियों की बड़ी विविधता। वरदान कई प्रकार के हैं, परंतु आत्मा एक ही है। वरदान सेवा की उन भिन्न-भिन्न दिशाओं के अनुसार बदलते हैं जिनके लिए परमेश्वर भिन्न-भिन्न लोगों को बुलाता है। कलीसिया एक देह है और देह के भिन्न-भिन्न अंगों के भिन्न-भिन्न कार्य हैं, और आत्मा उसे जो आत्मा से बपतिस्मा पाता है वे वरदान देता है जो उसे उस सेवा के योग्य बनाते हैं जिसके लिए परमेश्वर ने उसे बुलाया है। इसे ध्यान में रखना बहुत आवश्यक है। इसे न देख पाने के कारण बहुत से लोग इस पूरे विषय में सर्वथा भटक गए हैं।

इस विषय के अपने आरंभिक अध्ययन में मैंने यह तथ्य देखा कि अनेक अवसरों पर जिन्होंने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया वे अन्य भाषा बोले (जैसे प्रेरितों के काम 2:4; 10:46; 19:6) और मैं सोचता था कि क्या हर वह व्यक्ति जो पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है, अन्य भाषा नहीं बोलेगा। मैं आज किसी को नहीं जानता था जो अन्य भाषा बोल रहा हो, इसलिए मैं और भी सोचता था कि क्या पवित्र आत्मा का बपतिस्मा वर्तमान युग के लिए है। परंतु एक दिन मैं 1 कुरिन्थियों 12 का अध्ययन कर रहा था और देखा कि पौलुस ने कुरिन्थ की उस अद्भुत वरदान-संपन्न कलीसिया के विश्वासियों से, जिन सब के विषय में तेरहवें पद में कहा गया है कि उन्होंने आत्मा से बपतिस्मा पाया, कैसे कहा, “और परमेश्वर ने कलीसिया में कुछ को नियुक्त किया है; पहले प्रेरित, दूसरे भविष्यद्वक्ता, तीसरे शिक्षक, फिर सामर्थ्य के काम करनेवाले, फिर चंगा करने के वरदान, सहायता करनेवाले, प्रबंध करनेवाले, और नाना प्रकार की भाषा बोलनेवाले। क्या सब प्रेरित हैं? क्या सब भविष्यद्वक्ता हैं? क्या सब शिक्षक हैं? क्या सब सामर्थ्य के काम करनेवाले हैं? क्या सब को चंगा करने का वरदान मिला है? क्या सब अन्य भाषा बोलते हैं? क्या सब अर्थ बताते हैं?” इसलिए मैंने देखा कि पवित्रशास्त्र में स्पष्ट सिखाया गया है कि कोई पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पा सकता है और फिर भी अन्य भाषा का वरदान उसके पास न हो। मैंने यह भी देखा कि पवित्रशास्त्र के अनुसार अन्य भाषा का वरदान सब वरदानों में अंतिम और सबसे कम महत्व का है, और हमें उत्तम वरदानों की धुन में रहने का आग्रह किया गया है (1 कुरिन्थियों 12:31; 1 कुरिन्थियों 14:5, 12, 14, 18, 19, 27, 28)। कुछ समय बाद मैं एक और भूल में पड़ने के प्रलोभन में आया, जो अधिक विश्वसनीय दिखती थी पर वास्तव में इतनी ही पवित्रशास्त्र-विरोधी थी, अर्थात् यह कि यदि कोई पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाए तो उसे प्रचारक का वरदान मिलेगा। मैंने डी. एल. मूडी, चार्ल्स जी.

फिनी और अन्य उन लोगों की कथा पढ़ी थी जिन्होंने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया, और उस सामर्थ्य की भी जो उन्हें प्रचारकों के रूप में मिली, और यह विचार आया कि यदि कोई पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है तो क्या वह भी प्रचारक की सामर्थ्य न पाएगा? परंतु यह भी पवित्रशास्त्र-विरोधी था। यदि परमेश्वर ने किसी को प्रचारक होने के लिए बुलाया है और वह पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है, तो उसे प्रचारक की सामर्थ्य मिलेगी, परंतु यदि परमेश्वर ने उसे कुछ और होने के लिए बुलाया है तो उसे कुछ और बनने की सामर्थ्य मिलेगी। यह सोचने की भूल से कि हर वह व्यक्ति जो पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है प्रचारक की सामर्थ्य पाएगा, तीन बड़ी बुराइयाँ उत्पन्न होती हैं।

(1) निराशा की बुराई। बहुत से लोग प्रचारक की सामर्थ्य की आशा रखकर पवित्र आत्मा का बपतिस्मा खोजते हैं, परंतु परमेश्वर ने उन्हें उस कार्य के लिए नहीं बुलाया है, और यद्यपि वे आत्मा का बपतिस्मा पाने की शर्तें सचमुच पूरी करते हैं और आत्मा का बपतिस्मा पाते भी हैं, फिर भी प्रचारक की सामर्थ्य नहीं आती। बहुत से मामलों में इसका परिणाम कड़वी निराशा और कभी-कभी हताशा भी होता है। जिसने प्रचारक की सामर्थ्य की आशा रखी और उसे नहीं पाया, वह कभी-कभी यह भी संदेह करने लगता है कि वह परमेश्वर की संतान है या नहीं। परंतु यदि उसने इस विषय को ठीक से समझा होता तो वह जानता कि प्रचारक की सामर्थ्य न पाना इस बात का कोई प्रमाण नहीं कि उसने आत्मा का बपतिस्मा नहीं पाया, और इस बात का तो और भी कम प्रमाण कि वह परमेश्वर की संतान नहीं है।

(2) दूसरी बुराई इससे भी गंभीर है, अर्थात् दुस्साहस की बुराई। जिस मनुष्य को परमेश्वर ने प्रचारक या सेवक के कार्य के लिए नहीं बुलाया, वह प्रायः उसमें इसलिए कूद पड़ता है कि उसने पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाया है, या वह मान बैठा है कि उसने पाया है। वह सोचता है कि प्रचारक बनने के लिए मनुष्य को केवल पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की आवश्यकता है। यह सच नहीं है। सेवक के रूप में सफल होने के लिए मनुष्य को उस विशेष कार्य के लिए बुलाहट चाहिए,

और इसके अतिरिक्त उसे परमेश्वर के वचन का वह ज्ञान चाहिए जो उसे उस कार्य के लिए तैयार करे। यदि कोई सेवकाई के लिए बुलाया गया है और वचन का तब तक अध्ययन करता है जब तक उसके पास प्रचार करने को कुछ हो, और फिर वह पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है, तो वह प्रचारक के रूप में सफल होगा; परंतु यदि वह उस कार्य के लिए नहीं बुलाया गया, या उसके पास परमेश्वर के वचन का आवश्यक ज्ञान नहीं है, तो पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाने पर भी वह उस कार्य में सफल नहीं होगा।

(3) तीसरी बुराई इससे भी बड़ी है, अर्थात् उदासीनता की बुराई। बहुत से लोग जानते हैं कि वे प्रचार के कार्य के लिए नहीं बुलाए गए हैं। यदि वे यह सोचें कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा केवल प्रचारक की सामर्थ्य या प्रचार करने की सामर्थ्य देता है, तो पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का विषय उनके लिए व्यक्तिगत रूप से कोई चिंता का विषय नहीं रह जाता। उदाहरण के लिए, यहाँ एक माता है जिसके बच्चों का बड़ा परिवार है। वह भली-भाँति जानती है, या कम से कम आशा है कि जानती है, कि वह प्रचारक का कार्य करने के लिए नहीं बुलाई गई है। वह जानती है कि उसका कर्तव्य उसके बच्चों और उसके घर के प्रति है। यदि वह पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के विषय में पढ़े या सुने, और यह धारणा बना ले कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा केवल प्रचारक का कार्य करने या प्रचार करने की सामर्थ्य देता है, तो वह सोचेगी, “प्रचारक को इस आशीष की आवश्यकता है, मेरे पास्टर को इस आशीष की आवश्यकता है, परंतु यह मेरे लिए नहीं है”; परंतु यदि वह इस विषय को वैसे समझे जैसा बाइबल में सिखाया गया है, कि यद्यपि आत्मा का बपतिस्मा सामर्थ्य देता है, पर वह सामर्थ्य किस रूप में प्रकट होगी यह पूरी तरह उस कार्य-क्षेत्र पर निर्भर करता है जिसके लिए परमेश्वर हमें बुलाता है, और इसके बिना कोई प्रभावी कार्य नहीं हो सकता, और आगे यह भी देखे कि आज यीशु मसीह की कलीसिया में पवित्र की हुई मातृत्व से अधिक पवित्र और पावन कोई कार्य नहीं है, तो वह कहेगी, “प्रचारक को इस बपतिस्मा की आवश्यकता हो सकती है, मेरे पास्टर को इस बपतिस्मा की आवश्यकता हो सकती है; परंतु मुझे अपने बच्चों को प्रभु की शिक्षा और चेतावनी में पालने के लिए यह अवश्य चाहिए।”

2. यद्यपि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के वरदानों और अभिव्यक्तियों में विविधता है, फिर भी इस प्रकार बपतिस्मा पानेवाले हर एक को कोई न कोई वरदान मिलेगा। 1 कुरिन्थियों 12:7 (R. V.) में हम पढ़ते हैं, “परंतु सब के लाभ पहुँचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है।” मसीह की देह के सबसे तुच्छ अंग को भी उस देह में कोई कार्य करना है। देह “हर एक जोड़ की सहायता” से बढ़ती है (इफिसियों 4:16), और सबसे कम महत्व के जोड़ को भी पवित्र आत्मा उस कार्य को करने की सामर्थ्य देता है जो उसका है।

3. किसी भी स्थिति में आत्मा का बपतिस्मा कैसे प्रकट होगा, यह पवित्र आत्मा ही निर्धारित करता है। जैसा हम 1 कुरिन्थियों 12:11 में पढ़ते हैं, “परंतु ये सब प्रभावशाली कार्य वही एक आत्मा करवाता है, और जिसे जो चाहता है वह बाँट देता है।” पवित्र आत्मा यह निर्णय करने में पूर्णतः प्रभुतासंपन्न है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा किस प्रकार, अर्थात् किस विशेष वरदान, कार्य या सामर्थ्य में, प्रकट होगा। यह हमारा काम नहीं कि हम सेवा का कोई क्षेत्र चुनें और फिर पवित्र आत्मा से कहें कि वह हमें उस सेवा के योग्य बनाए। यह हमारा काम नहीं कि हम कोई वरदान चुनें और फिर पवित्र आत्मा से कहें कि वह हमें यह अपना चुना हुआ वरदान दे। हमारा काम केवल इतना है कि हम अपने आपको पूरी तरह पवित्र आत्मा के हाथों में सौंप दें कि वह हमें जहाँ चाहे भेजे, हमारे लिए जिस प्रकार की सेवा चाहे चुने और हमें जो वरदान चाहे दे। वह पूर्ण प्रभुतासंपन्न है और हमारी स्थिति उसके सामने बिना शर्त समर्पण की है। मुझे प्रसन्नता है कि ऐसा ही है। मैं आनंदित हूँ कि वह अपनी असीम बुद्धि और प्रेम से सेवा का क्षेत्र और वरदान चुनता है, और यह मुझ अल्पदृष्टि और मूर्ख पर नहीं छोड़ा गया। आत्मा की इस पूर्ण प्रभुता को न पहचानने के कारण ही बहुत से लोग आशीष से चूक जाते हैं और निराशा पाते हैं। वे अपना ही वरदान चुनने का प्रयास कर रहे हैं और इसलिए कुछ नहीं पाते। मैं स्कॉटलैंड में एक उत्साही परमेश्वर-संतान को जानता था, जिसने पवित्र आत्मा के बपतिस्मा और उससे मिलनेवाली सामर्थ्य के विषय में सुनकर बड़े त्याग के साथ अपना जहाज़ की प्लेटें लगाने का काम छोड़ दिया, जिसमें उसे बड़ी मज़दूरी मिलती थी। उसने सुना कि अमेरिका के उत्तर-पश्चिम में सेवकों की बड़ी आवश्यकता है। वह उत्तर-पश्चिम आया।

उसने पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की शर्तें पूरी कीं और मेरा विश्वास है कि उसने सचमुच पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया, परंतु परमेश्वर ने उसे प्रचारक के कार्य के लिए नहीं चुना था, और प्रचारक की सामर्थ्य उसके पास नहीं आई। कोई क्षेत्र खुलता नहीं दिखाई दिया, और वह बड़ी निराशा में था। उसने परमेश्वर के सामने अपनी स्वीकृति पर भी संदेह किया। एक सुबह वह मिनियापोलिस में हमारी कलीसिया में आया और उसने मुझे पवित्र आत्मा के बपतिस्मा पर बोलते सुना, और जब मैंने बताया कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा अनेक भिन्न रूपों में प्रकट होता है, और इस तथ्य से कि किसी के पास प्रचारक की सामर्थ्य नहीं है यह प्रमाणित नहीं होता कि उसने पवित्र आत्मा का बपतिस्मा नहीं पाया, तो उसके हृदय में प्रकाश आया। उसने अपने आपको बिना किसी आरक्षण के परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया कि वही कार्य-क्षेत्र और वरदान चुने। शीघ्र ही उसे रविवासरीय पाठशाला मिशनरी के रूप में अवसर मिला, और फिर जब उसने अपने लिए स्वयं चुनना छोड़ दिया और पवित्र आत्मा पर छोड़ दिया कि वह जैसा चाहे उसे बाँटे, तो एक अद्भुत बात हुई; उसे प्रचारक की सामर्थ्य मिली, और वह हमारे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में से एक के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचारक के रूप में बड़ी सामर्थ्य के साथ गया।

4. यद्यपि सामर्थ्य एक व्यक्ति में एक प्रकार की और दूसरे में दूसरे प्रकार की हो सकती है, फिर भी जब कोई पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाता है तो सदा सामर्थ्य होगी, परमेश्वर की ही सामर्थ्य। प्रेरितों के काम 1:5, 8 में हम पढ़ते हैं, “क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे.... परंतु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम में, और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।” जो भी इन पृष्ठों को पढ़ता है और जिसने अब तक पवित्र आत्मा का बपतिस्मा नहीं पाया है, यदि वह उसे परमेश्वर के मार्ग से खोजे तो निश्चय ही पाएगा, और उसकी सेवा में ऐसी सामर्थ्य आएगी जो पहले कभी नहीं थी, उसी कार्य के लिए सामर्थ्य जिसके लिए परमेश्वर ने उसे बुलाया है। यह केवल पवित्रशास्त्र की शिक्षा नहीं है; यह सदियों के धार्मिक अनुभव की भी शिक्षा है। धार्मिक जीवनियाँ ऐसे लोगों के उदाहरणों से भरी पड़ी हैं जो जितना हो सका काम करते रहे, जब तक एक दिन उन्हें यह देखने की ओर नहीं ले जाया गया कि पवित्र आत्मा के बपतिस्मा जैसा कोई अनुभव है और उसे खोजकर प्राप्त किया, और उसी घड़ी से उनकी सेवा में एक नई सामर्थ्य आई जिसने उसका स्वरूप ही पूरी तरह बदल दिया। इस विषय में सबसे पहले फिनी, मूडी और ब्रेनर्ड जैसे लोगों का ध्यान आता है, परंतु इस प्रकार के उदाहरण केवल कुछ असाधारण लोगों तक सीमित नहीं हैं। वे आम हैं। लेखक सारे संसार में सैकड़ों और हज़ारों लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिला है और उनसे पत्राचार किया है, जो उस नई सामर्थ्य की निश्चित गवाही दे सकते थे जो परमेश्वर ने उन्हें पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के द्वारा दी है। ये हज़ारों स्त्री-पुरुष मसीही सेवा की सब शाखाओं में थे; उनमें से कुछ सुसमाचार के सेवक हैं, कुछ प्रचारक, कुछ मिशन-कार्यकर्ता, कुछ वाई. एम. सी.

ए. सचिव, रविवासरीय पाठशाला के शिक्षक, पिता, माताएँ, व्यक्तिगत सेवक। इनमें से अनेक गवाहियों की स्पष्टता, विश्वास और आनंद से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता था।

मैं उस सेवक को शीघ्र नहीं भूलूँगा जिससे मैं कुछ वर्ष पहले कनेक्टिकट के न्यू ब्रिटेन में क्रिश्चियन एंडेवर की युवा-सभा के राज्य-सम्मेलन में मिला था। मैं व्यक्तिगत सेवा के विषय पर बोल रहा था और जब मैं संबोधन समाप्त करने पर आया तो मैंने कहा कि प्रभावी व्यक्तिगत सेवा करने के लिए हमें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाना आवश्यक है, और बहुत थोड़े वाक्यों में समझाया कि मेरा अर्थ क्या है। संबोधन के अंत में यह सेवक मंच पर मेरे पास आया और बोला, “वह आशीष जिसके विषय में आप बोल रहे थे, मेरे पास नहीं है, परंतु मैं उसे चाहता हूँ। क्या आप मेरे लिए प्रार्थना करेंगे?” मैंने कहा, “अभी ही प्रार्थना क्यों न करें?” उसने कहा, “ठीक है।” हमने दो कुर्सियाँ साथ-साथ रखीं और जब लोग आर्मरी से बाहर जा रहे थे तो उनकी ओर पीठ करके बैठ गए। उसने प्रार्थना की और मैंने भी प्रार्थना की कि वह पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाए। फिर हम अलग हो गए। कुछ सप्ताह बाद वाशिंगटन के एक सम्मेलन में उस दृश्य को देखनेवाले एक व्यक्ति ने मेरे पास आकर बताया कि यह सेवक एक बदले हुए मनुष्य के रूप में अपनी कलीसिया में कैसे लौटा; अब उसकी सभाओं से कलीसिया भर जाती है, उसमें अधिकतर युवक हैं, और हर सभा में मन-फिराव होते हैं। कुछ वर्ष बाद यह सेवक सेवा के किसी और क्षेत्र में बुलाया गया। उसके अत्यंत आत्मिक मित्रों ने उसे न जाने की सलाह दी, क्योंकि जिस कलीसिया में उसे बुलाया गया था उसके सभी प्रमुख वर्ग उत्साहपूर्ण सुसमाचार-कार्य के विरुद्ध थे, परंतु किसी कारण से उसने इसे परमेश्वर की बुलाहट माना और स्वीकार कर लिया। छह महीने में उनहत्तर लोगों ने मन फिराया, और उनमें से अड़तीस उस नगर के व्यापारी थे।

कुछ वर्ष पहले मॉन्ट्रियल में कनाडा के प्रांतों के यंग मेन्स क्रिश्चियन एसोसिएशन के अंतर-प्रांतीय सम्मेलन में उपस्थित होने के बाद मुझे एक युवक का पत्र मिला। उसने लिखा, “मैं मॉन्ट्रियल में आपकी अंतिम सभा में उपस्थित था। मैंने आपको पवित्र आत्मा के बपतिस्मा पर बोलते सुना। मैं अपने कमरे में गया और उस बपतिस्मा को अपने लिए खोजा और पाया। मैं अपनी कलीसिया की क्रिश्चियन एंडेवर सोसाइटी की लुकआउट कमेटी का अध्यक्ष हूँ। मैंने कमेटी के अन्य सदस्यों को बुलाया। मैंने पाया कि उनमें से दो उस सभा में उपस्थित थे और पहले ही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पा चुके थे। फिर हमने कमेटी के अन्य सदस्यों के लिए प्रार्थना की और उन्होंने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया। अब हम कलीसिया में जा रहे हैं और कलीसिया के युवा लगातार मसीह के पास लाए जा रहे हैं।”

एक बार एक सम्मेलन में एक स्त्री और एक पुरुष मेरे पास आए और उन्होंने बताया कि यद्यपि उन्होंने मुझे पहले कभी नहीं देखा था, उन्होंने बोस्टन में मसीही कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में दिए गए पवित्र आत्मा के बपतिस्मा पर एक संबोधन का विवरण पढ़ा था, और उन्होंने इस बपतिस्मा को खोजा और पाया। फिर उस पुरुष ने मुझे बताया कि रविवासरीय पाठशाला के अधीक्षक के रूप में उसकी सेवा में कौन-सी आशीष आई। जब उसने बात पूरी की, तो उसकी पत्नी बीच में बोल पड़ी, “हाँ, और उसमें सबसे अच्छी बात यह है कि मैं अपने ही बच्चों के हृदयों तक पहुँच सकी हूँ, जो मैं पहले कभी नहीं कर पाई थी।” यहाँ तीन स्पष्टतः भिन्न सेवा-क्षेत्र थे, परंतु हर एक में सामर्थ्य थी। फिर भी उस सामर्थ्य के परिणाम तुरंत मन-फिराव के रूप में प्रकट न हों, यह संभव है। स्तिफनुस पवित्र आत्मा से भरा था, परंतु जब वह अपने जी उठे प्रभु के लिए पवित्र आत्मा की सामर्थ्य में गवाही दे रहा था, तब उसने उस समय कोई मन-फिराव नहीं देखा। उसने केवल दाँत पीसना, क्रोध-भरी दृष्टि और निर्दय पत्थर देखे, और हमारे साथ भी ऐसा हो सकता है। परंतु उस मामले में भी एक मन-फिराव हुआ, यद्यपि उसे दिखाई देने में बहुत समय लगा, और वह मन-फिराव, तरसुस के शाऊल का मन-फिराव, सैकड़ों साधारण मन-फिरावों से अधिक मूल्यवान था।

5. पवित्र आत्मा के बपतिस्मा का एक और परिणाम गवाही और सेवा में साहस होगा। प्रेरितों के काम 4:31 में हम पढ़ते हैं, “जब वे प्रार्थना कर चुके तो वह स्थान जहाँ वे इकट्ठे थे हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और परमेश्वर का वचन हियाव से सुनाते रहे।” पवित्र आत्मा का बपतिस्मा उसे पानेवालों को मसीह की गवाही में नई स्वतंत्रता और निडरता देता है। यह कायरों को वीर बना देता है। हमारे प्रभु के क्रूस पर चढ़ाए जाने की रात पतरस ने अपने आपको एक कायर सिद्ध किया। उसने शपथ खाकर और कोसकर इनकार किया कि वह प्रभु को जानता है। परंतु पिन्तेकुस्त के बाद, यही पतरस उसी महासभा के सामने लाया गया जिसने यीशु को मृत्युदंड दिया था, और उसे स्वयं धमकाया गया, परंतु पवित्र आत्मा से भरकर उसने कहा, “हे प्रजा के अगुवो और पुरनियो, यदि हम से आज उस भलाई के विषय में जो एक लँगड़े मनुष्य के साथ की गई पूछ-ताछ की जाती है कि वह कैसे अच्छा हुआ है, तो तुम सब और सारे इस्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से, जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे सामने भला चंगा खड़ा है। यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्छ जाना और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों को कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें” (प्रेरितों के काम 4:8–12)। कुछ समय बाद जब महासभा ने उसे और उसके साथी यूहन्ना को आज्ञा दी कि वे यीशु के नाम से न बोलें न सिखाएँ, तो उन्होंने उत्तर दिया, “तुम ही न्याय करो, कि क्या परमेश्वर के निकट यह उचित है कि हम परमेश्वर की बात से बढ़कर तुम्हारी बात मानें? क्योंकि जो हमने देखा और सुना है, वह हम से नहीं रुक सकता” (प्रेरितों के काम 4:19, 20)।

और भी बाद के एक अवसर पर, जब उन्हें धमकाया गया और बोलने से मना किया गया और उनके प्राण संकट में थे, पतरस ने महासभा से मुँह पर कहा, “मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना ही कर्तव्य कर्म है। हमारे बापदादों के परमेश्वर ने यीशु को जिलाया, जिसे तुम ने लकड़ी पर लटकाकर मार डाला था। उसी को परमेश्वर ने प्रभु और उद्धारकर्ता ठहराकर, अपने दाहिने हाथ से ऊँचे पर चढ़ाया, कि वह इस्राएलियों को मन फिराव की शक्ति और पापों की क्षमा प्रदान करे। और हम इन बातों के गवाह हैं, और पवित्र आत्मा भी, जिसे

परमेश्वर ने उन्हें दिया है जो उसकी आज्ञा मानते हैं” (प्रेरितों के काम 5:29–32)। आज बहुतों का स्वाभाविक डर पवित्र आत्मा से भरने पर लुप्त हो जाता है, और वे बड़े साहस और स्वतंत्रता के साथ, परिणामों की पूर्ण निडरता के साथ, यीशु मसीह के लिए अपनी गवाही देते हैं।

6. पवित्र आत्मा का बपतिस्मा उसे पानेवाले को परमेश्वर, मसीह और आत्मिक बातों में लीन कर देता है। पिन्तेकुस्त के दिन के वृत्तांत में हम पढ़ते हैं, “वे सब पवित्र आत्मा से भर गए और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे। तब वे सब चकित और अचंभित होकर आपस में कहने लगे, ‘देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं? तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी-अपनी जन्म-भूमि की भाषा सुनता है? क्रेती और अरबी भी हैं; हम उन्हें अपनी-अपनी भाषा में परमेश्वर के बड़े-बड़े कामों की कलीसियाा करते सुनते हैं’” (प्रेरितों के काम 2:4, 7, 8, 11)। इसके बाद पतरस का उपदेश आता है, एक ऐसा उपदेश जो आरंभ से अंत तक पूरी तरह यीशु मसीह और उसकी महिमा से भरा है। बाद के एक दिन के विषय में हम पढ़ते हैं, “जब वे प्रार्थना कर चुके तो वह स्थान जहाँ वे इकट्ठे थे हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और परमेश्वर का वचन हियाव से सुनाते रहे। और प्रेरित बड़ी सामर्थ्य से प्रभु यीशु के जी उठने की गवाही देते रहे, और उन सब पर बड़ा अनुग्रह था.... तब पतरस ने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर उनसे कहा, ‘हे प्रजा के अगुवो और पुरनियो, यदि हम से आज उस भलाई के विषय में जो एक लँगड़े मनुष्य के साथ की गई पूछ-ताछ की जाती है कि वह कैसे अच्छा हुआ है, तो तुम सब और सारे इस्राएली लोग जान लें कि यीशु मसीह नासरी के नाम से, जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, और परमेश्वर ने मरे हुओं में से जिलाया, यह मनुष्य तुम्हारे सामने भला चंगा खड़ा है’”

(प्रेरितों के काम 4:31, 33, 8–10)। तरसुस के शाऊल के विषय में हम पढ़ते हैं कि जब वह पवित्र आत्मा से भर गया, तो “वह तुरंत आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा” (प्रेरितों के काम 9:17, 20, R. V.)। कुरनेलियुस के घराने के विषय में हम पढ़ते हैं, “पतरस ये बातें कह ही रहा था कि पवित्र आत्मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया। और जितने खतना किए हुए विश्वासी पतरस के साथ आए थे, वे सब चकित हुए कि अन्यजातियों पर भी पवित्र आत्मा का दान उंडेला गया है। क्योंकि उन्होंने उन्हें नाना प्रकार की भाषा बोलते और परमेश्वर की बड़ाई करते सुना।” यहाँ हम देखते हैं कि कुरनेलियुस का सारा घराना, जैसे ही वे पवित्र आत्मा से भरे, परमेश्वर की बड़ाई करने लगा। इफिसियों 5:18, 19 में हमें बताया गया है कि आत्मा से परिपूर्ण होने का परिणाम यह है कि जो इस प्रकार परिपूर्ण होते हैं वे आपस में भजनों और स्तुतिगानों और आत्मिक गीतों से बातें करेंगे, और अपने मन में प्रभु के सामने गाते और स्तुति करते रहेंगे। जो पुरुष पवित्र आत्मा से भरे हैं वे, जब तक पवित्र आत्मा की सामर्थ्य उन पर है, भावुक गाथा-गीत, हास्य-गीत या नाटकीय गायन नहीं गाएँगे। यदि संसार के किसी अत्यंत निर्दोष गीत को सुनते समय पवित्र आत्मा किसी पर आ जाए, तो उसे वह अच्छा नहीं लगेगा; वह मसीह के विषय में कुछ सुनने की लालसा करेगा। जिन्होंने पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाया है वे अपने विषय में अधिक बात नहीं करते, परंतु परमेश्वर के विषय में, और विशेष रूप से मसीह के विषय में बहुत बात करते हैं। यह अनिवार्य है, क्योंकि महिमा पाए हुए मसीह की गवाही देना पवित्र आत्मा का कार्य है (यूहन्ना 15:26; 16:14)।

पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के परिणामों के विषय में जो कुछ कहा गया है उसका सार यह है: पवित्र आत्मा का बपतिस्मा परमेश्वर के आत्मा का विश्वासी पर आना है, जो उसके मन को सत्यों, विशेषकर मसीह, की वास्तविक समझ से भरता है, उसकी क्षमताओं पर अधिकार करता है, और उसे ऐसे वरदान देता है जो उसके अपने नहीं हैं पर उसे उस सेवा के योग्य बनाते हैं जिसके लिए परमेश्वर ने उसे बुलाया है।

आत्मा के बपतिस्मा की अनिवार्यता। नए नियम में पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की अनिवार्यता के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। जब हमारे प्रभु अपने चेलों को छोड़कर पिता के पास जाने पर थे, तो उन्होंने कहा, “और देखो, जिसकी प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है, मैं उसको तुम पर भेजता हूँ; और जब तक स्वर्ग से सामर्थ्य न पाओ, तब तक तुम यरूशलेम नगर में ठहरे रहो” (लूका 24:49)। उसने अभी-अभी उन्हें यरूशलेम से आरंभ करके सब जातियों में अपना गवाह होने के लिए नियुक्त किया था (पद 47, 48), परंतु यहाँ वह उनसे कहता है कि इस गवाही के कार्य को आरंभ करने से पहले उन्हें पिता की प्रतिज्ञा के मिलने तक प्रतीक्षा करनी होगी, और इस प्रकार उस गवाही के कार्य के लिए जो उन्हें करना था स्वर्ग से सामर्थ्य पानी होगी। “मेरे पिता की प्रतिज्ञा” से यीशु का क्या अभिप्राय था, इसमें कोई संदेह नहीं, जिसकी प्रतीक्षा उन्हें उस सेवकाई को आरंभ करने से पहले करनी थी जो उसने उन पर सौंपी थी; क्योंकि प्रेरितों के काम 1:4, 5 में हम पढ़ते हैं, “और उनके साथ इकट्ठे होकर (उसने) उन्हें आज्ञा दी कि यरूशलेम को न छोड़ो, परंतु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की प्रतीक्षा करो, जिसकी कलीसियाा तुम मुझ से सुन चुके हो। क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परंतु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।” अतः स्पष्ट है कि “पिता की प्रतिज्ञा,” जिसके द्वारा सामर्थ्य पहनाई जानी थी, पवित्र आत्मा का बपतिस्मा थी। वह अपने चेलों से आगे कहता गया, “परंतु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम में, और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे” (प्रेरितों के काम 1:8)। अब ये किन लोगों से यीशु ने यह कहा? उन चेलों से जिन्हें उसने स्वयं इस कार्य के लिए प्रशिक्षित किया था।

तीन वर्ष से अधिक समय तक वे उसके साथ अत्यंत घनिष्ठता में रहे थे; वे उसके चमत्कारों, उसकी मृत्यु और उसके पुनरुत्थान के प्रत्यक्षदर्शी थे, और कुछ ही क्षणों में उसके स्वर्गारोहण के भी प्रत्यक्षदर्शी होनेवाले थे, जब वह उनकी आँखों के सामने ही स्वर्ग में उठा लिया गया। और उन्हें क्या करना था? केवल जाकर संसार को वह बताना जो उनकी अपनी आँखों ने देखा और उनके अपने कानों ने परमेश्वर के पुत्र के मुख से सुना था। क्या वे इस कार्य के लिए सज्जित नहीं थे? मसीही कार्य की तैयारी के हमारे आधुनिक विचारों के अनुसार हम कहेंगे कि वे पूरी तरह सज्जित थे। परंतु यीशु ने कहा, “नहीं, तुम सज्जित नहीं हो। जो तैयारी तुम पहले ही पा चुके हो उसके अतिरिक्त एक और तैयारी है, जो प्रभावी कार्य के लिए इतनी नितांत आवश्यक है कि जब तक तुम उसे न पाओ एक कदम भी न हिलना। यह दूसरी तैयारी पिता की प्रतिज्ञा है, पवित्र आत्मा का बपतिस्मा।” यदि प्रेरितों को, जो उस कार्य के लिए जिसे वे हाथ में लेने वाले थे सर्वथा असाधारण रूप से योग्य थे, कार्य के लिए इस तैयारी की आवश्यकता थी, तो हमें कितनी अधिक है? कार्य आरंभ करने से पहले यीशु ने अपने चेलों से जो माँगा उसके प्रकाश में, क्या हम में से किसी के लिए भी मसीह के लिए गवाही देने और कार्य करने का साहस करना, जब तक कि हम ने भी पिता की प्रतिज्ञा, पवित्र आत्मा का बपतिस्मा, न पाया हो, सबसे दुस्साहसी धृष्टता जैसा नहीं लगता? प्रत्यक्षतः यह तत्काल कुछ करने की अनिवार्य आवश्यकता थी। सारा संसार नाश हो रहा था और केवल वे ही उद्धारक सत्य को जानते थे, फिर भी यीशु ने उन्हें कड़ाई से आज्ञा दी, “ठहरो।” मसीह को ग्रहण योग्य कार्य की तैयारी के रूप में पवित्र आत्मा के बपतिस्मा की नितांत अनिवार्यता और महत्व का इससे प्रबल प्रमाण और क्या हो सकता है?

परंतु बात यहीं समाप्त नहीं होती। प्रेरितों के काम 10:38 में हम पढ़ते हैं, “कि परमेश्वर ने किस प्रकार यीशु नासरी को पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से अभिषेक किया; वह भलाई करता और सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा, क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था।” यीशु मसीह के लिखित जीवन में यह किस ओर संकेत करता है? यदि हम लूका 3:21, 22 और लूका 4:1, 4, 17, 18 देखें तो हमें उत्तर मिलेगा। लूका 3:21, 22 (R. V.) में हम पढ़ते हैं कि जब यीशु बपतिस्मा लेकर प्रार्थना कर रहा था, “आकाश खुल गया, और पवित्र आत्मा शारीरिक रूप में कबूतर के समान उस पर उतरा, और यह आकाशवाणी हुई, ‘तू मेरा प्रिय पुत्र है, तुझ से मैं प्रसन्न हूँ।’” फिर अगली बात जो हम पढ़ते हैं, जिसके बीच में यीशु की मानवीय वंशावली के सिवा कुछ नहीं है, यह है, “और यीशु पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर यरदन से लौटा, और आत्मा के द्वारा जंगल में ले जाया गया” (लूका 4:1)। फिर उसकी परीक्षा की कथा आती है; फिर चौदहवें पद में हम पढ़ते हैं, “और यीशु पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से भरा हुआ गलील को लौटा, और उसकी कलीसियाा आसपास के सारे देश में फैल गई।” और सत्रहवें और अठारहवें पदों में, “और यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक उसे दी गई, और पुस्तक खोलकर उसने वह जगह निकाली जहाँ यह लिखा था, ‘प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उसने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है,’ इत्यादि।” अतः स्पष्ट है कि यरदन पर उसके बपतिस्मा के संबंध में ही यीशु को पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से अभिषिक्त किया गया, और जब तक उसने इस प्रकार पवित्र आत्मा से बपतिस्मा नहीं पाया, उसने अपनी सार्वजनिक सेवकाई आरंभ नहीं की। और यीशु कौन था? मसीही जगत का सामान्य विश्वास है कि वह पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से अलौकिक रीति से गर्भ में आया था, कि वह परमेश्वर का एकलौता पुत्र था, वह ईश्वर था, परमेश्वर से परमेश्वर, फिर भी सच्चा मनुष्य।

यदि ऐसे व्यक्ति ने, जो “हमारे लिये एक आदर्श छोड़ गया कि हम उसके चिह्नों पर चलें,” उस सेवकाई में जिसके लिए पिता ने उसे भेजा था तब तक कदम नहीं रखा जब तक वह इस प्रकार निश्चित रूप से पवित्र आत्मा से बपतिस्मा न पा चुका, तो हमारे लिए ऐसा करने का साहस करना कैसा है? यदि इन लिखित तथ्यों के प्रकाश में हम ऐसा करने का साहस करें, तो क्या यह सबसे अक्षम्य धृष्टता जैसा नहीं लगता? निस्संदेह हम में से बहुतों ने अज्ञानता में ऐसा किया है, परंतु क्या अब हम और अज्ञानता का बहाना कर सकते हैं? स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा सेवा की हर दिशा में मसीह के लिए प्रभावी कार्य हेतु एक नितांत आवश्यक तैयारी है। हमारे पास सेवा की बहुत स्पष्ट बुलाहट हो सकती है, शायद उतनी ही स्पष्ट जितनी प्रेरितों के पास थी, परंतु जैसे उन पर वैसे ही हम पर भी यह आज्ञा है कि उस सेवा को आरंभ करने से पहले हम तब तक ठहरे रहें जब तक हम ऊपर से सामर्थ्य न पहन लें। सामर्थ्य का यह पहनाया जाना पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के द्वारा होता है।

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