अध्याय 1
प्राक्कथन
बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में डॉ. बाउंड्स को हम मन की आँखों से अपने छोटे-से गाँव की गलियों में चलते हुए देख सकते हैं; वे अपनी पांडुलिपियाँ सुतली से बाँधे हुए थे, जो पुराने परचों की पीठ पर और प्रयुक्त लिफ़ाफ़ों पर लिखी गई थीं; वे किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ रहे थे जो इन पांडुलिपियों को प्रकाशन के लिए तैयार करने का बीड़ा उठाए, और अपने मित्रों से कहते थे कि प्रार्थना करें कि परमेश्वर उनके लिए ऐसा मनुष्य खड़ा करे जो उनके लेखन को प्रकाश में लाए। डॉ. बाउंड्स के विद्वान मित्र क्लॉडियस लाइसियस चिल्टन ने कहा, “आज पृथ्वी पर वर्तमान संपादक के सिवाय कोई ऐसा मनुष्य नहीं है जो इस विशाल सामग्री को स्वीकार करता और इसे संसार को देने में समय लगाता—वह संसार जो इस कार्य की महानता और विस्तार को तब तक समझना आरंभ भी नहीं करेगा जब तक संपादक, संकलनकर्ता और समीक्षक अनेक युगों तक अनंतकाल में न रह चुके हों।” डॉ. बाउंड्स की मुद्रित और अमुद्रित रचनाओं को संकलित करने, संशोधित करने, पुनर्लिखित करने और संपादित करने में सहायता करनेवाले मित्रों को हम इस अवसर पर अपना हार्दिक धन्यवाद अर्पित करते हैं। 1905 में उनका परिचय हमसे कराने के लिए और हमें यह आग्रहपूर्वक समझाने के लिए कि हमें प्रार्थना करना और वचन का प्रचार करना सिखाने के लिए इस प्रेरित-समान मनुष्य की आवश्यकता है, हम गेन्सविल, जॉर्जिया के रेव. रॉबर्ट ओ. स्मिथ को धन्यवाद देते हैं। विशेष रूप से एक मित्र—अटलांटा, जॉर्जिया के रेव. क्लेमेंट सी. गैरी—को इस कार्य में उनके योगदान के लिए हम अपनी सच्ची कृतज्ञता की प्रथम अभिव्यक्ति देते हैं। निजी और सार्वजनिक कर्तव्यों में व्यस्त रहते हुए भी, ऐसे भक्त और योग्य व्यक्ति से जितना श्रम और अध्ययन बहुत कम संपादकों को मिलने का सौभाग्य होता है, उसके लिए मैं उनका ऋणी हूँ। बाल्टीमोर, मैरीलैंड की कुमारी एम्ब्रोस का मैं उत्कृष्ट और शुद्ध आशुलिपि कार्य के लिए गहराई से ऋणी हूँ।
मैं यहाँ डॉ. बाउंड्स के मृत्यु से ठीक पहले मुझे लिखे गए पत्रों में से कुछ संक्षिप्त कथन प्रस्तुत करता हूँ, जो यह दिखाते हैं कि शैतान की पहुँच से बहुत दूर जाने से पहले उसके विषय में उनके विचार क्या थे।
“वाशिंगटन, जॉर्जिया, 15 दिसंबर 1911: मैं अपने आप को अधिकाधिक प्रार्थना में लगाने का प्रयत्न कर रहा हूँ। हमारी एकमात्र आशा परमेश्वर में है। मैं आपके प्रति सहानुभूति रखता हूँ, आपके लिए प्रार्थना करता हूँ और प्रेमपूर्ण स्नेह से आपको स्मरण करता हूँ। आनंद मनाइए कि आप अच्छी स्थिति में हैं। परमेश्वर आपको आपको सतानेवाले शैतान से बचाए। शैतान स्वर्ग की ओर बढ़ने में बड़ा सहायक है। उसके एजेंट जितने बुरे होते हैं, हम उतना ही अच्छा आगे बढ़ते हैं।”
“वाशिंगटन, जॉर्जिया, 1 जुलाई 1912: अधिकाधिक प्रार्थना कीजिए; प्रातः चार बजे के समय को थामे रहिए। परमेश्वर इसके पक्ष में होगा; शैतान इसके विरुद्ध। आगे बढ़िए, आप बहुत अधिक प्रार्थना नहीं कर सकते, बहुत कम प्रार्थना कर सकते हैं। शैतान आपसे इस बात पर समझौता कर लेगा कि आप सामान्य स्तर पर प्रार्थना करें, सोने जाते समय और प्रातः थोड़ी-सी प्रार्थना। यदि हम परमेश्वर के लिए इससे अच्छा नहीं करेंगे तो नरक भर जाएगा। प्रार्थना कीजिए, प्रार्थना कीजिए, प्रार्थना कीजिए, सदा प्रार्थना कीजिए, सदा आनंदित रहिए, निरंतर प्रार्थना कीजिए, हर बात में धन्यवाद दीजिए।”
यह संभव है कि उनकी प्रकाशित और अप्रकाशित रचनाओं में इतनी जाँच और इतने पृष्ठों के पुनर्लेखन के दौरान मैं अनेक त्रुटियों से बच गया हूँ, फिर भी मुझे आशा है कि इस पठन से अनेक आत्माओं की उन्नति होगी, वे अधिक पवित्र और भक्त बनेंगी, और जब बाउंड्स की संपूर्ण रचनाएँ एक आवश्यकतामंद संसार को दी जाएँगी तब परमेश्वर को अतिरिक्त महिमा मिलेगी।
होमर डब्ल्यू. हॉज।
ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क।
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