अध्याय 59
XVIIIII. अपने विश्वास के अपने सार्वजनिक पेशे के बारे में, और उसके बचाव के बारे में... सबसे ज़रूरी कारण है। किसी भी प्रकार से पीने के लिए किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं करना चाहिए जब तक शरीर ठंडा न हो जाए: यह स्वस्थ शरीर और प्राण के लिए स्वास्थ्यकर है. कोई भी चीज़ कभी आप को पीने के लिए ले जाए, या इतनी तेजी से एक उपवास करने के लिए: यह आपके पाँवों के नीचे बाँधना अच्छा है. (ऐ रसूल) एक वक्त वो भी था जब तुम इस किताब (कुरान) को जो तुम्हारे पास मौजूद है अच्छी तरह पढ़ा करो और (उसकी) तसदीक़ करने वालों के लिए मेरे पास आओ और मुझे ख़ुदा से दुआ करो ताकि तुम पर रहम किया जाए
(18) मैं हफ्ते के चौथे दिन प्रभु के नाम से बिनती करता हूँ कि मुझे बीमारी न हो, न किसी प्रकार की बीमारी हो । फिर भी मैं यह काम बिना किसी वाजिब कारण के किए 70 नियम के करता हूँ, फिर चाहे वह कितनी ही मुश्किल क्यों न हो । और इसी तरह सब्त के दिन और चौथे दिन भी, यहूदा ने प्रभु के साथ विश्वासघात किया, और साढ़े तीन दिन वह क्रूस पर चढ़ाया गया । जो कोई इन दिनों में धैर्य से काम ले और जो कोई अल्लाह के साथ कुफ़्र करे तो उसका कोई हिस्सा नहीं। मैं इससे भी बढ़कर तुम्हारे साथ हूँ और अल्लाह की कृपा-स्पष्ट करूँ। फिर यह मेरे लिए अधिक सरल है। मैं समझता हूँ कि मैं इन दिनों में अपने आपको पूरा-पूरा करनेवाला हूँ और मुझे विश्वास है कि अल्लाह के यहाँ यही सबसे अच्छा तरीक़ा है लेकिन यदि ऐसी उपवास किसी छोटी मात्रा में शरीर को चोट लग जाए, तो भी उस के बारे में न सोचिए, क्योंकि जब तू उपवास कर चुका, तब तू सर्वदा उत्तम स्वास्थ्य में रहा है ।
और ख़ुदा के नज़दीक ये ग़ज़ब की बात है कि तुम लोग ख़ुदा की आयतों से इन्कार करो और अच्छे अच्छे काम करो
( १९) जल्दी - जल्दी खाने के लिए उतावली, और पियक्कड़ों से दूर रहिए, क्योंकि ऐसा लोभ अपनी वस्तु के अहंकार से आगे बढ़ता है ।
अरयूब के पद की ओर उसका यह वचन है, कि इस से बड़ी घबराहट दूर हो जाती है, और मन को ठण्डा कर देती है, और उस मार्ग से जिस से पियक्कड़पन या बहुत ज्यादा बातें निकलती हैं, छुड़ाती है और फन्दे में पड़ जाती है।
और यह भी परमेश्वर की सारी मनसा को काट डालता, और बन्द कर देता है।
अच्छा होगा कि एक काम बड़े पैमाने पर करने के बजाय, उसकी कमी के कारण किसी के पाठ्यक्रम से बाहर फेंक दिया जाए। साथ ही, भौतिक स्वास्थ्य की चिंता भी अच्छी तरह से लिया जाता है, जैसा कि भोजन अच्छी तरह से लिया जाता है, इतना अधिक आसानी से और अच्छी तरह से अच्छी तरह से आ जाता है।
यह आदत लिखने और बोलने में और बोलने में भी प्रबल होनी चाहिए, क्योंकि यदि एक व्यक्ति इतनी तेज़ी से परमेश्वर की महिमा पाना चाहता है कि उसकी सारी शक्ति उसमें लगे ।
आज्ञा न मानने के विषय में किसी भली बात में ऐसा न करना; अर्थात् भले काम करने का मार्ग, और भले कामों में उस की चिन्ता न करना; और भले कामों में उस की चिन्ता किया करना, और दास की नाईं अपने आप को बुद्धिमान बना लो; इसलिये कि तुम में से जो कुछ हो, वह उत्तम रहे, और विशेष करके अपने लिये मनुष्यों के उद्धार का कारण हो। जो दरिद्र न हो, उसको किसी वस्तु में कुछ न देना; क्योंकि जो कंगाल नहीं, यदि तू बहुत धन पाए, तो उसे बहुत सा मिलेगा; और जो बहुत धन हो, यदि तू उसे दे, तो वह अपने ही उद्धार के लिये न तो विश्वासयोग्य भण्डारी है, और न समझदार है। तेरे देने में शारीरिक बातों का विचार है, परन्तु मैं किसी मनुष्य से कुछ ग्रहण नहीं करूंगा।