अध्याय 55
अध्याय XVIIIIII के अपने सार्वजनिक पेशे के बारे में, और उसके बचाव के बारे में...
तुम उन बातों के विषय में जो ऊपर हैं किसी बात में व्यस्त न रहो, जब तक कि यह न हो, कि यह थोड़ी देर और बिना विवाद किए किया जा सके; फिर भी यदि ऐसा किया जाए, तो अपने आप से कुछ न करो; इस बात को सदा ध्यान में रखो। तौभी जब तू सचमुच चैन कर सकता है, तब चैन के साथ शान्ति की रचना को अलग न करना।
जब तेरा कोई कुटुम्बा मारा जाए, वा मारा गया हो, वा मारा गया हो, तब उस से बिनती न करना, और न उसकी हानि करने की सम्मति देना; न उसको शान्ति के वचनों से चिताना, और न उसको मेल करने की आज्ञा देना। और यदि उसके मित्रा उस से पलटा लें, तो तू उन्हें शान्ति की बातें कहने से, और ऐसी हानि से रोक लेगा, कि वे ऐसा न कर सकें।
और तुम लोगों से नेकी करने को कहते हो और अपनी ख़बर नहीं लेते हालाँकि तुम ख़ुद दूसरे लोगों को (बराबर) रटा करते हो तो तुम उनमें से जो शख़्श अपने नफ्स की तरफ से नसीहत हासिल करे तो (याद रहे कि) जो शख्स (महज़) नेकी करे और ज्यादती करे तो उसका कोई टालने वाला नहीं और न हद से आगे बढ़ जाने वालों के सिवा (किसी चीज़ से) बेहतर है और जो शख्स नेकी करे तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं तौभी मेरा चैन, धर्म और न्याय के कामों से जो दूसरे के द्वारा नहीं किए जा सकते, और मेरे पड़ोसी की सेवा करने के लिये मेरी चौकसी करना बुरा है।
पवित्रा शास्त्रा के अध्ययन के विषय में, अब मैं ज्ञान की खोज में लौट आता हूं: अपने अध्ययन और अपने जीवन के दर्पण की जड़ ये हो, कि पहिले तो मसीह का सुसमाचार यही है, क्योंकि उस में मसीह का जीवन है।
( ४) ह्यूम के द होली स्क्रिप्चर्स् और ऐलममम की लिखी किताबों का अध्ययन करते वक्त, अंदरूनी ज्ञान के आधार पर । ( ५) सेंटों की पौराणिक कथा और भक्ति, जो कि पिता 63 के उपदेश आचरण पर हैं, जैसे कि ग्रेगरी के अतीत में, मठों पर आशीष प्राप्त करने के काम पर,
इसके अलावा, पौलुस की किताबों में परमेश्वर की प्रेरणा से लिखी गयी है, क्योंकि इन किताबों में कलीसिया की शिक्षाओं के बारे में काफी जानकारी दी गयी है । (8) सुलैमान, सभोपदेशक और नोइसस के नीतिवचन का अध्ययन, क्योंकि इन में कलीसिया के चुनावों और अधिकार - पत्रों में शामिल हैं. "मैं आत्मा के साथ प्रार्थना करूँगा और मैं समझ के साथ प्रार्थना करूँगा." (8) इस में पवित्र पिता की सेवाओं में शामिल है. मैं आत्मा के साथ गाऊंगा, और बुद्धि के साथ गाऊंगा। (9) मूसा की पुस्तकों का अध्ययन, ऐतिहासिक पुस्तकों, न्यायियों, न्यायियों, और राजाओं का इतिहास; भविष्यद्वक्ताओं और पिता की बातों का एक ही विचार है।
( १२) आदेशों का पालन करने के तरीक़े के बारे में, इसलिए कि यह जानने के लिए कि हमारे पूर्वज और कलीसिया का क्या निश्चित था: एक व्यक्ति को उन्हें स्वामी बनने के लिए प्रयास नहीं करना चाहिए, लेकिन केवल एक प्रयोग करना चाहिए