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हम यहाँ श्री मूडी के उपदेशों के केवल संक्षिप्त अंश ही दे सकते हैं; उनसे अधिक महत्त्व स्वयं मूडी का है। थियोडोर एल. कायलर, डी. डी., उनके विषय में यह आकलन देते हैं: “ड्वाइट एल. मूडी निस्संदेह इस शताब्दी में अमेरिका द्वारा उत्पन्न सबसे असाधारण सुसमाचार-प्रचारक थे, जैसे स्पर्जन ब्रिटेन द्वारा उत्पन्न सबसे असाधारण प्रचारक थे। दोनों की मंडली सारा मसीही जगत था।” लंदन के एक लेखक ने उनके प्रवचनों को ध्यान से सुनने के बाद उनके प्रचार के विषय में यह आकलन दिया: “वे वाक्पटु तो नहीं हैं, पर बहुत धाराप्रवाह बोलते हैं; वे काव्यात्मक या अलंकारपूर्ण नहीं हैं, परन्तु वे कभी बेसिर-पैर की बातें नहीं करते, और शायद ही कोई ऐसा वाक्य बोलते हैं जो सुनने योग्य न हो। वे तेज़ बोलनेवाले वक्ता हैं, आवश्यकता से अधिक तेज़; फिर भी वे जो कुछ कहते हैं वह समझदारी का, प्रभावशाली और सीधे विषय पर होता है, और बहुत लम्बा नहीं होता, जो एक बड़ा लाभ है। वे अपनी बोली, लहजे और जोश में पूरी तरह अमेरिकी हैं। उनके किस्से बहुतायत से हैं और अधिकांश उनके अपने अनुभव से प्राप्त हुए हैं; वे सदा उपयुक्त, प्रायः अत्यन्त मर्मस्पर्शी और कभी-कभी रोंगटे खड़े कर देनेवाले होते हैं। उनकी लगन तीव्र है, उनकी ऊर्जा अथक है, उनका साहस सिंह के समान है, उनकी व्यवहार-कुशलता असाधारण है, और आत्माओं के प्रति उनका प्रेम अत्यन्त कोमल है।” स्कॉटलैंड के प्रचारक श्री हेनरी मूरहाउस ने श्री मूडी के प्रचार का यह मूल्यांकन दिया:
“1. वे दृढ़ता से विश्वास करते हैं कि जब पापी विश्वास करते हैं तब सुसमाचार उनका उद्धार करता है, और वे क्रूस पर चढ़ाए गए और जी उठे उद्धारकर्ता की सीधी-सादी कहानी पर भरोसा रखते हैं। “2. जब वे प्रचार करने जाते हैं तो आशा रखते हैं कि आत्माएँ उद्धार पाएँगी, और परिणाम यह होता है कि परमेश्वर उनके विश्वास का आदर करता है। “3. वे ऐसे प्रचार करते हैं मानो फिर कभी कोई दूसरी सभा होनी ही न हो, और मानो पापी फिर कभी सुसमाचार की ध्वनि न सुन पाएँ। अभी निर्णय लेने की उनकी ये विनतियाँ अत्यन्त प्रभावशाली होती हैं। “4. वे सभा के बाद होनेवाली सभाओं में मसीहियों को काम में लगाते हैं। वे उनसे आग्रह करते हैं कि जो लोग उनके पास बैठे हों उनसे पूछें कि क्या उन्होंने उद्धार पाया है। उनके काम की हर बात बहुत सरल है, और मैं प्रभु की दाख की बारी में काम करनेवालों को सलाह दूँगा कि वे हमारे प्रिय भाई को देखें और सुनें, और यदि सम्भव हो तो आत्माओं को जीतने के विषय में उनसे कुछ धन्य पाठ सीखें।” एडिनबरा रिव्यू में एक लेखक ने श्री मूडी के प्रचार के विषय में कहा: “श्री मूडी हर प्रकार के दिखावे और आडम्बर से आश्चर्यजनक रूप से मुक्त हैं; वे ऐसे व्यक्ति के समान बोलते हैं जो अपनी कही हुई बात पर पूरी तरह विश्वास करता है, और जो अपना सन्देश सुनाने में पूरी गम्भीरता से लगा हुआ है। उत्तेजना बहुत कम होती है; कोई अतिरेक नहीं होता, परन्तु सभा का प्रभाव उस स्पष्ट छाप में दिखाई देता है जो श्रोताओं पर पड़ती है।” इंग्लैंड के स्वर्गीय डॉ. आर. डब्ल्यू. डेल, जो पहले श्री मूडी और उनके प्रचार को नापसन्दगी की दृष्टि से देखने के इच्छुक थे, प्रभावित हो गए और उन्होंने इस प्रकार लिखा: “श्री मूडी की अपनी सामर्थ्य के विषय में बोलना मुझे कठिन लगता है। वह इतनी वास्तविक है, और फिर भी साधारण प्रचारकों की सामर्थ्य से इतनी भिन्न है, कि मैं मुश्किल से जानता हूँ कि उसका विश्लेषण कैसे करूँ। उसकी वास्तविकता निर्विवाद है। जो व्यक्ति सुबह के समय तीन से छः हज़ार लोगों के श्रोतागण को आधे घण्टे तक, और दोपहर को पौन घण्टे तक, रुचि से बाँधे रख सकता और प्रभावित कर सकता है, और जो
सन्ध्या को फिर से तेरह या पन्द्रह हज़ार लोगों के तीसरे श्रोतागण को पौन घण्टे तक रुचि से बाँधे रख सकता है, उसमें किसी न किसी प्रकार की सामर्थ्य अवश्य होगी। निस्सन्देह, कुछ लोग उनकी बातों की अधिक परवाह किए बिना सुनते रहे, परन्तु यद्यपि मैं सामान्यतः ऐसी जगह बैठता था जहाँ से मैं देख सकूँ कि वे किस प्रकार की छाप डाल रहे हैं, फिर भी मैंने कदाचित ही बहुत से ऐसे चेहरे देखे जिन पर अत्यन्त सक्रिय और गम्भीर रुचि दिखाई न देती हो।” एक और लेखक ने कहा: “जिन लोगों ने इस आन्दोलन के विरोध में लिखा और बोला, जिन्होंने इसकी हँसी उड़ाई, वे सुनने गए और बदले हुए विचारों के साथ लौटे—दोपहर की प्रार्थना-सभा में छः हज़ार लोग, दोपहर बाद के बाइबल-व्याख्यान में छः हज़ार, और सन्ध्या की सभा में दस हज़ार, और पूछताछ-कक्ष भरे हुए—यह ऐसी बात है जिसे ‘एक्सचेंज’ को भी स्वीकार करना पड़ता है। परन्तु इससे भी बढ़कर परमेश्वर के आत्मा की वह महान सामर्थ्य है, जो कार्य करती और सक्रिय रहती है, जिसे कोई तालिका दर्ज नहीं कर सकती, कोई संख्या अंकित नहीं कर सकती।” शिकागो के रेवरेंड डॉ. फ्रेडरिक कैम्पबेल उनके काम के विषय में यह कहते हैं: “श्री मूडी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वे ईश्वरीय योजनाओं को पूरा करने के लिए परमेश्वर के विधान के हाथों में एक अत्यन्त उल्लेखनीय साधन हैं। एक मसीही के रूप में वे सुसमाचार की आत्मा से पूरी तरह ओत-प्रोत हैं, और पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाए हुए हैं। एक संगठनकर्ता के रूप में वे एक सेनापति हैं; वे स्त्री-पुरुषों की शक्तियों को अत्यन्त उल्लेखनीय रीति से इकट्ठा करते, बाँटते और नियंत्रित करते हैं। मुझे नहीं दिखता कि उनकी कोई भी योजना असफल हुई हो; जिस साहस के साथ उन्होंने मसीह के लिए अनसुने काम हाथ में लिए, वही सफलता की गारंटी रहा है। यदि साधारण प्रचारकों में उनका थोड़ा और साहस होता, उस विश्वास और उन कामों के साथ जो उसके साथ होने चाहिए, तो वे और भी बड़े काम कर पाते।” यहाँ श्री मूडी के एक उपदेश से कुछ सटीक अनुच्छेद दिए जा रहे हैं: “यूहन्ना रचित सुसमाचार में हम पढ़ते हैं कि लाज़र की कब्र पर हमारे प्रभु ने अपने चेलों से कहा, ‘पत्थर को उठाओ।’ लाज़र को जिलाने का काम किए जाने से पहले चेलों को अपना भाग
पूरा करना था। मसीह एक शब्द से पत्थर को हटा सकता था। उसके लिए उसे लुढ़क जाने की आज्ञा देना बहुत सहज होता, और वह उसकी आवाज़ मान लेता, जैसे मरे हुए लाज़र ने माना जब उसने उसे वापस जीवन में बुलाया। परन्तु प्रभु चाहता था कि उसकी सन्तान यह पाठ सीखे: कि आत्मिक रूप से मरे हुओं को जिलाने में उनका भी कुछ काम है। चेलों को न केवल पत्थर हटाना था, बल्कि मसीह द्वारा लाज़र को जिलाए जाने के बाद उन्हें ‘उसे खोलकर जाने देना’ भी था। “यह एक प्रश्न है कि क्या पृथ्वी पर कभी भी कोई मनुष्य ऐसा हुआ है जिसका मन-परिवर्तन परमेश्वर ने किसी न किसी रीति से किसी मानवीय साधन का उपयोग किए बिना किया हो। परमेश्वर हमारे बिना भी मनुष्यों का मन सहज ही बदल सकता है, परन्तु यह उसका तरीका नहीं है। “ ‘आपको प्रचारक कैसा लगा?’ कोई कहता है। ‘देखिए, मुझे मानना पड़ेगा कि मैं निराश हुआ। मुझे उसका ढंग पसन्द नहीं आया; उसके हाव-भाव में शालीनता नहीं थी।’ कोई दूसरा कहेगा, ‘उसकी बातों में तर्क नहीं था’; कोई और, ‘उसने पश्चाताप के विषय में पर्याप्त प्रचार नहीं किया’; कोई और, ‘पश्चाताप बहुत अधिक था और सुसमाचार नहीं था’; या ‘सब कुछ पश्चाताप ही था, सुसमाचार कुछ नहीं।’ ‘सच तो यह है,’ कोई कहता है, ‘उसने मेरे हृदय को बिलकुल नहीं छुआ’; दूसरे कहेंगे, ‘उसमें केवल हृदय था, दिमाग़ नहीं’; या ‘वह इच्छा-शक्ति से बहुत अधिक अपील करता है।’ “नाम के मसीहियों में आपको ऐसे सैकड़ों दोष निकालनेवाले मिल जाएँगे; परन्तु उनकी सारी आलोचनाएँ एक भी आत्मा को मसीह के पास नहीं ले जाएँगी। मैंने आज तक कोई ऐसा उपदेश नहीं दिया जिसकी मैं धज्जियाँ न उड़ा सकूँ और जिसमें दोष न निकाल सकूँ। मुझे लगता है कि यीशु मसीह का मुझसे कहीं अच्छा प्रतिनिधि होना चाहिए। परन्तु मैं इतने दिन जी चुका हूँ कि यह जान गया हूँ कि संसार में कुछ भी सिद्ध नहीं है।” श्री मूडी ने अपने प्रचार में प्रवचन-शास्त्र के अधिकांश नियमों और अंग्रेज़ी व्याकरण के बहुत से नियमों का उल्लंघन किया, परन्तु उनके पास परमेश्वर की ओर से एक सन्देश था और उन्होंने उसे स्वर्ग से भेजे गए पवित्र आत्मा की सामर्थ्य में सुनाया।
ऐसा प्रतीत होता है कि उनका प्रचार, उसमें उनके द्वारा उँडेला गया उत्साह, और अपने काम से वे जो अद्भुत परिणाम प्राप्त कर सके, वे सब अमेरिका के प्रत्येक युवक और युवती के लिए एक प्रोत्साहन होना चाहिए कि वे दौड़ के लिए कमर कसें और आत्माओं को बचाने की बुलाहट के लिए तैयार रहें।
