अध्याय 21
उसके परिश्रम के विषय में, और उसके द्रोहियों के विषय में उसका धीरज, और उसके परिश्रम का फल, और उसके शत्रुओं के प्रति उसका धीरज
( क) यीशु ने अपने चेलों को क्या करने के लिए उकसाया? ये बातें उन पत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई गई हैं, जिन्हें उसने कई लोगों को लिखा, और इसी प्रकार एक चिट्ठी में उन याजकों को भी लिखी, जो उससे अच्छी तरह वाकिफ थे। अतः हे मेरे प्रियों, यदि तुम मेरी बुराई को सुनो तो मेरी बुराई के बदले में सब कुछ व्यर्थ कर दिया जाता है। परन्तु मैं परमेश्वर की इच्छा पर आशा रखता हूं। हम में से कोई आलसी नहीं, केवल जलते हुए जलते हुए जल को निगल जाए! हम परमप्रधान के इन अशुद्ध वचनों को तुच्छ जानें और परमप्रधान के तुल्य हो जाएं, जो हमारे सृजनहार की महिमा के योग्य है।।
जब उसे एहसास हुआ कि कलीसिया के बहुत - से सदस्य उसके विरोध में थे, और कि उसका प्रचार उसके शत्रुओं की ईर्ष्या से रोका जा रहा था, और कि उसे प्रचार करने से मना किया गया था, वह इस क्रोध और ईर्ष्या की भावना में पड़ गया । और उस ने उन ठहराए हुए लोगों से कहा, जिन्हों ने इस निन्दा को झूठ के द्वारा प्राप्त किया था।
वे तो हमारे मुंह से निकले हैं, और ठीक और उचित ही हैं; क्योंकि हम उन की आज्ञाओं का पालन करना चाहते हैं; हम न तो किसी की हानि करना चाहते हैं, और न किसी पर कलंक लगाना चाहते हैं। "प्रभु अपने बन्दों में से जिसे उसने अपने उदार अनुग्रह से चुन लिया है, उसे वह जानता है जो चाहता है और जिसे चाहता है अपनी दयालुता से उन्हें प्रदान करता है। और यह कि उन लोगों के लिए जो उसके पास आए है, एक निश्चित अवधि तक की सुख-सामग्री है। और यह कि जो लोग उसके पास खुली निशानियाँ आ चुकी है, वे उसका निर्वाह करना चाहते है। मैं तो अपनी नेमत पूरी करने के लिए कहता हूँ।" अपने प्राणों के लिये ख़र्च करो, न कि अपनी भलाई के लिये, परन्तु बहुतों के लिये खोज में लगे रहो।
( २) उसने ऐसे विद्यार्थियों द्वारा भी पवित्र शास्त्र की अनेक पुस्तकें लिखीं जिन्हें उसने अपने उत्तम भाषण द्वारा उसकी ओर आकर्षित किया: उसने उनका प्रतिफल दिया, और उन्हें अपने घर में आने का निमंत्रण दिया, और परमेश्वर का वचन ज़्यादा बार सुनने के लिए बुलाया, ताकि वह उन्हें पवित्रता के लिए इस्तेमाल करे, और अपने जीवन में सुधार करे, जिस से वे अनन्तता के भागी हो सकें । नए और पवित्र जीवन के लिए, यदि वे सांसारिक जीवन को ठुकरा दें और उस ने परमेश्वर के पास अपनी सारी मजदूरी को एक ही समय में नहीं दिया, परन्तु बहुत से लोगों को बांट दिया, कि वे लोग आकर उसके साथ अनुग्रह से बर्ताव करें; और ये पुरूष उस से अत्यन्त प्रसन्न हुए, क्योंकि उन में से कितनों ने मसीह के साथ बड़ी लालसा से परिश्रम किया था, और मसीह की ओर से बिनती की, कि उन में से कुछ लेखकों की यह बिनती हो। और ख़ुदा की नेअमतों के जल्द ही उन्हें मालूम हो जाएगा वह इस तरह के आसान - से और कम पढ़े - लिखे लोगों से बात करना चाहता था