अध्याय 16
16:1 अपने जीवन के लिये जागते रहना।
अध्याय 16. 16:1 अपने जीवन के लिये जागते रहना। 16:2 अपने दीपक बुझने न देना और अपनी कमर खुली न रहने देना, पर तैयार रहना। 16:3 क्योंकि तुम वह घड़ी नहीं जानते जिसमें हमारा प्रभु आता है। 16:4 और तुम बार बार इकट्ठे होना, यह ढूँढ़ते हुए कि तुम्हारे प्राणों के लिये क्या उचित है। 16:5 क्योंकि तुम्हारे विश्वास का सारा समय तुम्हारे काम न आएगा, यदि तुम अन्त में सिद्ध न हो। 16:6 क्योंकि अन्तिम दिनों में झूठे भविष्यद्वक्ता और नाश करनेवाले बढ़ेंगे, और भेड़ें भेड़ियों में बदल जाएँगी, और प्रेम बैर में बदल जाएगा। 16:7 क्योंकि जब अधर्म बढ़ेगा, वे एक दूसरे से बैर रखेंगे, सताएँगे और पकड़वाएँगे। 16:8 और तब संसार का बहकानेवाला परमेश्वर के पुत्र के समान प्रगट होगा। 16:9 और वह चिह्न और अद्भुत काम करेगा, और पृथ्वी उसके हाथों में सौंपी जाएगी। 16:10 और वह अपवित्र काम करेगा, जो जगत के आरम्भ से कभी न हुए। 16:11 तब सारी सृजी हुई मनुष्यजाति परीक्षा की आग में आएगी, और बहुत ठोकर खाकर नाश होंगे। 16:12 पर जो अपने विश्वास में स्थिर रहेंगे वे उसी शाप के द्वारा बचाए जाएँगे। 16:13 और तब सत्य के चिह्न प्रगट होंगे। 16:14 पहिले आकाश में दरार का चिह्न, तब तुरही के शब्द का चिह्न, और तीसरे मरे हुओं का पुनरुत्थान। 16:15 तौभी सब का नहीं, पर जैसा कहा गया था। 16:16 प्रभु आएगा और उसके सब पवित्र जन उसके साथ। 16:17 तब संसार प्रभु को स्वर्ग के बादलों पर आते देखेगा।